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सौदा जेट और सहारा के फ़ायदे में | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
जेट एयरवेज़ और सहारा एयरलाइन्स के बीच जो सौदा हुआ है उसे आमतौर पर देखें तो यह सरकारी विमान कंपनियों के लिए घाटे का सौदा है और इन दोनों कंपनियों को ही फ़ायदा होगा. इसका सीधा कारण यह दिखता है कि सहारा एयरलाइन्स का जेट एयरवेज़ में विलय हो जाने के बाद विमानन क्षेत्र में जेट एयरवेज़ का कब्ज़ा पचास प्रतिशत से अधिक हो जाएगा. इसका मतलब यह होगा कि जेट एयरवेज़ का विमानन बाज़ार में एकाधिकार हो जाएगा क्योंकि बची हुई पचास प्रतिशत से भी कम जगह पर सरकारी कंपनियों और छोटी निजी कंपनियों को रहना होगा. नियम क़ायदों का फ़ायदा साफ़ दिखाई देता है कि सरकारी नियम क़ायदों के चलते निजी कंपनियों को फ़ायदा हुआ और इंडियन एयरलाइन्स (अब इंडियन) और एयर इंडिया जैसी सरकारी कंपनियों को नुक़सान हुआ. जेट एयरवेज़ ने अपने शुरुआती दिनों में जिस तरह की प्रगति की उसकी वजह उसे मिली हुई छूटें थीं. अब जेट और सहारा दोनों के पास एयरपोर्ट में पार्किंग से लेकर अंतरराष्ट्रीय उड़ानों तक सभी की सुविधा है और ऐसे में वे पहले भारत की सरकारी विमानन कंपनियों के साथ प्रतिस्पर्धा में होंगी. स्पष्ट है कि आगे आने वाले दिनों ने इंडियन और एयर इंडिया दोनों को बाज़ार में अपनी जगह बचाने के लिए कड़ा संघर्ष करना होगा. तेज़ी से बढ़ता बाज़ार भारत का बाज़ार जिस तरह बढ़ रहा है वैसा और किसी देश में विमानन का बाज़ार नहीं बढ़ रहा है. पूरी दुनिया में कहीं भी 25 प्रतिशत की दर से विमानन बाज़ार नहीं फैल रहा है. इसलिए भारत में एयरलाइन कंपनियों में जो सौदा हुआ है उसे बाक़ी दूसरे देशों में होने वाले सौदों से अलग करके देखना चाहिए क्योंकि भारत का सौदा कंपनियों को मज़बूत करने वाला सौदा है. जहाँ तक कर्मचारियों का सवाल है तो सौदा करने वाली दोनों कंपनियाँ इस वक़्त भले कुछ भी कह रही हों, लगता है कि सहारा एयरलाइन्स के कर्मचारियों को नुक़सान होने वाला है. जहाँ तक राजनीतिक समीकरणों का प्रश्न है, इस पर वामपंथी दलों को स्वाभाविक रुप से ऐतराज़ होना चाहिए, हो सकता है कि संसद के भीतर इसकी आवाज़ सुनाई पड़े. | इससे जुड़ी ख़बरें जेट एयरलाइंस ने एयर सहारा को ख़रीदा 19 जनवरी, 2006 | कारोबार इंडियन एयरलाइंस नहीं केवल इंडियन07 दिसंबर, 2005 | कारोबार खाड़ी के देशों के लिए सस्ती उड़ानें29 अप्रैल, 2005 | कारोबार भारत ब्रिटेन के बीच उड़ानें बढ़ेंगी13 अप्रैल, 2005 | कारोबार एयर डेकन काफ़िला बढ़ा रही है21 दिसंबर, 2004 | कारोबार अब 'एयर इंडिया एक्सप्रेस' उड़ान भरेगा01 जून, 2004 | कारोबार निजी विमान सेवाओं की विदेशी उड़ान11 दिसंबर, 2003 | कारोबार भारत में भी सस्ती एयरलाइंस30 नवंबर, 2002 | कारोबार | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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