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विदेशी निवेश सीपीएम को स्वीकार्य | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के मुख्य वामपंथी दल मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने घोषणा की है कि प्रमुख आर्थिक क्षेत्रों में अब वह प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की विरोधी नहीं है. सीपीएम के वरिष्ठ नेता सीताराम येचुरी ने पत्रकारों से कहा कि उनका दल विदेशी प्रत्यक्ष निवेश को स्वीकार करेगा बशर्ते इससे उत्पादन में वृद्धि हो और रोज़गार के अवसर बढ़ें. यह पहली बार है कि सीपीएम ने खुले रूप में विदेशी निवेश को स्वीकार किया है. इसके पहले तक पार्टी खुलेआम प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का विरोध करती आई है और उसकी दलील रही है कि इससे देश की आर्थिक समस्याएँ नहीं सुलझेगीं. लेकिन दूसरी ओर सीपीएम के नेतृत्ववाली पश्चिम बंगाल सरकार प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के लिए कोशिश करती रही है. इसको लेकर पार्टी की आलोचना भी होती रही है कि वह दोहरे मापदंड अपनाती है. येचुरी का कहना था कि पार्टी संयुक्त राष्ट्र से कर्ज़ के विरोध में नहीं है. लेकिन विश्व बैंक और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष से कर्ज़ तब तक स्वीकार्य नहीं होंगे जब तक कि ये संस्थाएँ कर्ज़ की शर्तें स्पष्ट नहीं कर देगीं. प्रेक्षकों का कहना है कि पार्टी के रुख़ में बदलाव नई आर्थिक परिस्थियों के कारण आया है. |
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