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समारोहों में शामिल न होने के संकेत | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
केरल और पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनावों का असर नज़र आने लगा है. मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के पोलित ब्यूरो की दिल्ली में चल रही बैठक में वामपंथी नेताओं ने सरकार को कई मुद्दों को लेकर आड़े हाथों लिया. उन्होंने ऐसे संकेत दिए कि वे सरकार के एक साल पूरा होने के मौक़े पर आयोजित सरकारी समारोहों में हिस्सा नहीं लेंगे. पोलित ब्यूरो के सदस्य एमके पंधे ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि सरकार ने अनेक विधेयक पेश किए लेकिन उसने आदिवासियों के ज़मीन के अधिकार, रोज़गार गारंटी और महिला आरक्षण जैसे विधेयक पेश नहीं किए. सीपीएम नेता इसको लेकर ख़फा हैं. उनका कहना कि सरकार ने नेपाल को हथियारों की आपूर्ति शुरू कर दी इसको लेकर भी हम सहमत नहीं है. सीपीएम पोलित ब्यूरो ने सरकार के कुछ क़दमों की सराहना भी की. इसमें चीन और पाकिस्तान के साथ संबंधों में सुधारने के प्रयास शामिल हैं. बैठक इसके पहले प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और यूपीए नेता सोनिया गाँधी ने गुरुवार को वामपंथी नेताओं के साथ नाश्ते पर मुलाक़ात की थी. इसमें भी वामपंथी नेताओं ने कृषि क्षेत्र के मजदूरों और आदिवासियों को ज़मीन सौंपे जाने संबंधी विधेयक न लाने के लिए यूपीए सरकार की आलोचना की थी. सरकार की ओर से वामपंथी नेताओं को न्यूनत साझा कार्यक्रम की प्रगति के बारे में जानकारी दी गई. वामपंथी नेताओं ने साझा कार्यक्रम को जल्द लागू करने को कहा था. उनका कहना था कि सरकार ने इस पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने का आश्वासन दिया था. इस बैठक में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, यूपीए नेता सोनिया गाँधी के अलावा रक्षा मंत्री प्रणव मुखर्जी, सीपीएम नेता प्रकाश कारत, सीपीआई नेता एबी बर्धन, डी राजा और आरएसपी नेता अबनि रॉय मौजूद थे. |
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