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बसु और सुरजीत के हटने पर विचार | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के प्रमुख वामपंथी दल सीपीआई(एम) की पार्टी कांग्रेस बुधवार से दिल्ली में शुरू में हो रही है जिसमें पार्टी नेता हरकिशन सिंह और ज्योति बसु के पद छोड़ने के बारे में भी विचार होगा. हरकिशन सिंह सुरजीत पार्टी के महासचिव हैं और ज्योति बसु पोलित ब्यूरो के सदस्य हैं. वरिष्ट पार्टी नेता सीताराम येचुरी ने पार्टी कांग्रेस से पहले दिल्ली में पत्रकारों को बताया कि दोनों नेताओं से अपने पदों से हटने की इच्छा जताई है और पार्टी कांग्रेस इस बारे में अंतिम फ़ैसला लेगी. सीताराम येचुरी ने संवाददाता सम्मेलन में कहा,"दोनों नेता लंबे समय से कह रहे थे कि अपनी आयु और गिरते स्वास्थ्य के कारण अपने पद पर नहीं रहना चाहते हैं. वे अभी भी ऐसा ही कह रहे हैं". येचुरी ने बताया कि पार्टी कांग्रेस में पार्टी की नई केंद्रीय समिति का चुनाव होगा और ये समिति ही दोनों नेताओं के भावी योगदान के बारे में निर्णय करेगी. पार्टी कांग्रेस माकपा में पार्टी कांग्रेस निर्णय लेनेवाली सर्वोच्च ईकाई है जिसकी बैठक हर तीन साल बाद होती है. इस बार पार्टी कांग्रेस छह अप्रैल से 11 अप्रैल तक दिल्ली में हो रही है. वैसे अटकलें हैं कि सुरजीत के महासचिव पद छोड़ने की सूरत में ये ज़िम्मेदारी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पोलित ब्यूरो सद्स्य प्रकाश कारत को दी जा सकती है. मगर येचुरी ने इस संबंध में कहा,"जो भी सदस्य पोलित ब्यूरो में होंगे वे चुने जा सकते हैं. मगर पहले केंद्रीय समिति चुनी जाएगी और वह नए पोलित ब्यूरो का चयन करेगी". मार्च 2002 में हैदराबाद में हुई पार्टी की 17वीं कांग्रेस में केंद्रीय समिति के लिए 79 सदस्यों को चुना गया था जबकि दो जगह खाली थी. केंद्रीय समिति ने इसके बाद पोलित ब्यूरो के लिए 17 सदस्यों के अलावा हरकिशन सिंह सुरजीत को पार्टी का महासचिव चुना था. |
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