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पोलित ब्यूरो छोड़ना चाहते हैं बसु | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के नेता ज्योति बसु ने ख़राब स्वास्थ्य के कारण पार्टी पोलित ब्यूरो को छोड़ने की इच्छा जताई है. पश्चिम बंगाल के पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि वो 6 अप्रैल से दिल्ली में शुरू होने वाली पार्टी कांग्रेस में अपने ये विचार रखेंगे. ज्योति बसु ने 2001 में स्वास्थ्य कारणों से पश्चिम बंगाल का मुख्यमंत्री पद छोड़ दिया था. उनका कहना है कि उनका मौजूदा स्वास्थ्य उन्हें पोलित ब्यूरो के सदस्य के रूप में सक्रिय रहने की इज़ाजत नहीं देता है. लेकिन ज्योति बसु की इच्छा सिरे चढ़ते नज़र नहीं आ रही है. सीपीएम के पश्चिम बंगाल इकाई के सचिव और पोलित ब्यूरो सदस्य अनिल बिस्वास ने संकेत दिए हैं कि ज्योति बसु की बात पार्टी कांग्रेस में नहीं स्वीकार की जाएगी. उनका कहना है कि मौजूदा राजनीतिक स्थिति में उनकी सेवाओं की ज़रूरत पड़ेगी. भूमिका सन् 1996 में जब काँग्रेस की हार हुई तो तीसरे मोर्चे की सरकार बनवाने में वामपंथी दलों की बहुत महत्वपूर्ण भूमिका रही थी. एक समय तो ज्योति बसु को प्रधानमंत्री बनाए जाने पर लगभग सहमति बन गई थी. लेकिन पार्टी ने उन्हें ये पेशकश स्वीकार करने की अनुमति नहीं दी. बाद में स्वयं ज्योति बसु ने इसे एक ‘ऐतिहासिक भूल’ बताया था. सीपीआई ने ज़रूर तीसरे मोर्चे की सरकार में शिरकत की थी और इंद्रजीत गुप्त भारत के गृह मंत्री बने थे. लेकिन पश्चिम बंगाल में लगातार छह बार विधानसभा चुनाव जीतने में ज्योति बसु का भारी योगदान रहा है. पश्चिम बंगाल में लगभग तीन तीन दशकों से सीपीएम की अगुआई शासन चल रहा है. |
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