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शुक्रवार, 01 अप्रैल, 2005 को 05:39 GMT तक के समाचार
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वाममोर्चा अध्यक्ष को तीन दिन की जेल

बिमान बोस
बिमान बोस मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के एक प्रभावशाली नेता हैं
कलकत्ता हाईकोर्ट ने माकपा के पोलित ब्यूरो सदस्य और पश्चिम बंगाल में सत्तारुढ़ वाममोर्चा के अध्यक्ष विमान बोस को न्यायपालिका के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियों के लिए तीन दिन की कैद और 10 हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई है.

न्यायमूर्ति अशोक गांगुली व न्यायमूर्ति एसपी तालुकदार की खंडपीठ ने बोस को अदालत की अवमानना का दोषी ठहराते हुए अपने फैसले में कहा कि जुर्माना नहीं भरने की सूरत में उनको और एक दिन जेल में गुजारना होगा.

खंडपीठ ने बोस के वकील विकास भट्टाचार्य की अपील पर अपने फैसले पर अमल पर चार सप्ताह के लिए रोक लगा दी है.

दूसरी ओर, माकपा ने इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील करने का फैसला किया है.

 बोस राज्य की एक प्रमुख राजनीतिक हस्ती हैं और उनको ऐसी टिप्पणियां नहीं करनी चाहिए थी. उनका बयान किसी जज के खिलाफ नहीं बल्कि पूरी न्यायपालिका के खिलाफ निजी हमला था. बोस ने पत्रकार सम्मेलन में न्यायमूर्ति लाला के खिलाफ नारे लगाते हुए यह भी कहा था कि उनके आदेश का पालन नहीं किया जाएगा.
अदालत का फ़ैसला

29 सितंबर,2003 को कलकत्ता हाईकोर्ट के न्यायधीश अमिताभ लाला ने कोलकाता में कामकाज के दिनों में सुबह आठ से रात आठ बजे के बीच जुलूस और रैलियों पर रोक लगा दी थी.तब इस फैसले पर काफी कड़ी प्रतिक्रिया हुई थी.

उसी समय बोस ने भी इस फैसले पर प्रतिकूल टिप्पणी की थी. उसी के बाद कल्लोल गुहा ठाकुरता नामक एक वकील की ओर दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई के बाद अदालत ने यह फैसला सुनाया.

खंडपीठ ने अपने फैसले में कहा कि ‘बोस राज्य की एक प्रमुख राजनीतिक हस्ती हैं और उनको ऐसी टिप्पणियां नहीं करनी चाहिए थी. उनका बयान किसी जज के खिलाफ नहीं बल्कि पूरी न्यायपालिका के खिलाफ निजी हमला था. बोस ने पत्रकार सम्मेलन में न्यायमूर्ति लाला के खिलाफ नारे लगाते हुए यह भी कहा था कि उनके आदेश का पालन नहीं किया जाएगा.’

अदालत की ओर से सम्मन मिलने के बाद बोस ने सात नवंबर,2003 को अदालत में हाजिर होकर एक शफथपत्र के जरिए अपनी सफाई दी थी.

अदालत ने विभिन्न अखबारों की कतरनें व प्रेस कांफ्रेंस की वीडियो फुटेज देखने के बाद इस नतीजे पर पहुंची कि बोस की टिप्पणी अपमानजनक थी. खंडपीठ ने कहा है कि ‘अभिव्यक्ति की आजादी का मतलब यह नहीं है कि कोई भी कुछ भी बोल सकता है. खासकर तब जबकि बोस एक जिम्मेवार पद पर हैं और राज्य की एक महत्वपूर्ण राजनीतिक हस्ती हैं.’

उधर, माकपा के प्रदेश सचिव अनिल विश्वास ने पत्रकारों से कहा कि ‘पार्टी हाईकोर्ट के इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील करेगी.’ उन्होंने कहा कि कानूनी विशेषज्ञों से सलाह-मशविरे के बाद इसका फैसला किया जाएगा.

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