|
| |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
काँग्रेस को समर्थन देने का फ़ैसला
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी यानी सीपीएम ने कहा है कि वे आगामी लोकसभा चुनाव के बाद सरकार बनाने की प्रक्रिया में काँग्रेस पार्टी का समर्थन करेंगे. हैदराबाद में पार्टी की केंद्रीय समिति की बैठक के बाद इस निर्णय की घोषणा की गई. पार्टी के शीर्ष नेताओं की चार घंटे तक चली बैठक के बाद तय किया गया कि सीपीएम देश की कुल 543 लोकसभा सीटों में से सिर्फ़ 70 सीटों पर ही चुनाव लड़ेगी. पार्टी के नेताओं ने घोषणा की कि वे आगामी लोकसभा चुनाव में कई राज्यों में वामपंथी और धर्मनिरपेक्ष पार्टियों से तालमेल करेंगे. पार्टी के महासचिव हरकिशन सिंह सुरजीत ने कहा कि "भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व में सांप्रदायिक शक्तियों को सत्ता में आने से रोकने के लिए सीपीएम काँग्रेस का समर्थन करेगी."
सीपीएम का मानना है कि काँग्रेस की उदारीकरण और निजीकरण की नीति मज़दूरों के हक़ में नहीं है. सीपीएम की पोलिट ब्यूरो के सदस्य प्रकाश कारत ने कहा कि पार्टी का असली मक़सद भाजपा को सत्ता में आने से रोकना और धर्मनिरपेक्ष ताक़तों को बढ़ावा देना है. कारत ने कहा कि जिन राज्यों में काँग्रेस और भाजपा के बीच सीधी टक्कर है वहाँ सीपीएम की भूमिका काफ़ी सीमित होगी. इससे पहले दूसरी प्रमुख कम्युनिस्ट पार्टी सीपीआई ने भी काँग्रेस को सरकार बनाने में समर्थन देने की घोषणा की थी. सीपीआई ने तय किया है कि वह सिर्फ़ 35 लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ेगी. पिछली लोकसभा में वामपंथी पार्टियों के कुल 42 सांसद थे और वे इस संख्या को बढ़ाने की कोशिश में जुट गए हैं. सीपीएम के नेतृत्व वाला वामपंथी मोर्चा भारत में दो राज्यों में सत्ता में है, पश्चिम बंगाल और त्रिपुरा, इसके अलावा केरल में कई बार वे सरकार चला चुके हैं. |
| |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||