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वामपंथी नेता विदेश नीति से संतुष्ट | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और यूपीए की प्रमुख सोनिया गाँधी ने शुक्रवार को वामपंथी नेताओं के साथ नाश्ते पर मुलाक़ात की. इस बैठक में वामपंथियों ने सरकार की विदेश नीति पर संतोष व्यक्त किया. विदेश मंत्री नटवर सिंह ने वामपंथी नेताओं को पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ और चीन के प्रधानमंत्री वेन जियाबाओ की आगामी भारत यात्रा के बारे जानकारी दी. इस बैठक में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, सोनिया गाँधी, विदेश मंत्री नटवर सिंह के अलावा रक्षा मंत्री प्रणव मुखर्जी, सीपीएम नेता हरकिशन सिंह सुरजीत, सीताराम येचुरी, सीपीआई नेता एबी बर्धन, डी राजा, आरएसपी नेता अबनि राय और फॉरवर्ड ब्लाक के नेता देवव्रत विश्वास मौजूद थे. बाद में सीपीएम नेता सीताराम येचुरी ने पत्रकारों को बताया कि वामपंथी नेता सरकार की विदेश नीति से संतुष्ट हैं. उनका कहना था कि सरकार न्यूनतम साझा कार्यक्रम के अनुसार विदेश नीति पर चल रही है. बस के लिए बधाई सीताराम येचुरी का कहना था कि सरकार एकदम सही रास्ते पर है और चीन के साथ भी सीमा विवाद बातचीत के ज़रिए सुलझाया जा सकता है. सीपीआई नेता डी राजा ने बताया कि वामपंथी दलों ने सरकार को श्रीनगर - मुज़्ज़फ़्फ़राबाद बस सेवा को सफलतापूर्वक चलाने के लिए बधाई दी. उनका कहना था कि यह आपसी भरोसा बढ़ाने की दिशा में अच्छा क़दम है और इससे भारत और पाकिस्तान के बीच शांति लाने में मदद मिलेगी. येचुरी ने कहा कि चीन के प्रधानमंत्री की यात्रा के बाद दोनों देशों के बीच आपसी समझ बेहतर होगी. विदेश मंत्री नटवर सिंह ने पत्रकारों को बताया कि बैठक में वामपंथी नेताओं को चीन और पाकिस्तान के नेताओं की यात्रा के बारे में जानकारी दी गई. नटवर सिंह का कहना था कि विपक्षी नेताओं के साथ भी ऐसी ही बैठक आयोजित की जाएगी और उन्हें भी इसे बारे में जानकारी दी जाएगी. पर्यवेक्षकों का मानना है कि विदेश नीति को लेकर समस्याएँ नहीं हैं लेकिन वाम दलों और कांग्रेस के बीच आर्थिक नीतियों पर बढ़ रहे मतभेद केंद सरकार के लिए मुश्किलें पैदा कर सकते हैं. |
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