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चारा घोटाले में लालू पर आरोप तय | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
केंद्रीय जाँच ब्यूरो की एक विशेष अदालत ने चारा घोटाले के मामले में मंगलवार को लालू प्रसाद यादव के ख़िलाफ़ आरोप तय कर दिए हैं. जब अदालत में आरोप पढ़ कर सुनाए जा रहे थे, उस समय लालू प्रसाद यादव वहाँ मौजूद थे. सीबीआई की विशेष अदालत के जज संजय प्रसाद ने लालू यादव के ख़िलाफ़ दिसंबर, 1995 और जनवरी,1996 के बीच दुमका कोषागार से 3.13 करोड़ रुपए फर्ज़ी तरीके से निकालने का आरोप लगाया. अदालत ने बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्र और 37 अन्य लोगों के ख़िलाफ़ भी आरोप तय किए. इस मामले में 49 लोगों पर आरोप लगे थे लेकिन इनमें से छह की मौत हो चुकी है और तीन सरकारी गवाह बन गए हैं. इसके पहले 25 अप्रैल को सीबीआई की एक अन्य अदालत ने लालू यादव, जगन्नाथ मिश्र और 68 अन्य लोगों के ख़िलाफ़ चाईबासा कोषागार से 37 करोड़ रुपए ग़ैरक़ानूनी तरीके से निकालने का आरोप निर्धारित किया था. आरोपपत्र सीबीआई ने 60 मामलों में आरोपपत्र दायर किए हैं जिनमें से 53 के ख़िलाफ़ रांची और सात के ख़िलाफ़ पटना की अदालत में मामले चल रहे हैं. इस मामले को लेकर संसद में विपक्ष ने ज़ोरदार हंगामा किया था और रेलमंत्री लालू प्रसाद यादव को बर्खास्त करने की मांग की. अदालत के समक्ष अभियुक्तों की ओर से एक याचिका दायर की गई थी कि उन पर लगाए गए आरोप राजनीति से प्रेरित हैं लेकिन अदालत ने इसे ख़ारिज कर दिया. इन लोगों पर आरोप है कि इन्होंने फ़र्जी बिलों के आधार पर सरकारी खजाने से गबन कर लिया था. पशुपालन विभाग के खाते में हुई इस गड़बड़ी को चारा घोटाले का नाम दिया गया था. जब यह घोटाला हुआ तब लालू प्रसाद यादव बिहारी के मुख्यमंत्री थे और जगन्नाथ मिश्रा विपक्ष के नेता थे. इस घोटाले में शामिल होने के आरोपों के बाद लालू प्रसाद यादव को मुख्यमंत्री का पद छोड़ना पड़ा था. उन्हें इसी मामले में एक से अधिक बार गिरफ़्तार भी किया जा चुका है. चारा घोटाले में बिहार से झारखंड राज्य अलग हो जाने के बाद कुछ मामले वहाँ स्थानांतरित कर दिए गए हैं. सन् 1996 में बिहार में 950 करोड़ रुपए का चारा घोटाला सामने आया था. |
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