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सरकार चुनाव आयोग के साथ | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
वरिष्ठ आईएएस अधिकारी एलवी सप्तर्षि के पत्र को लेकर चल रहे विवादों के बीच केंद्र की यूपीए सरकार चुनाव आयोग के पक्ष में खड़ी दिख रही है. केंद्रीय क़ानून मंत्री हंसराज भारद्वाज ने अपना पल्ला झाड़ते हुए कहा है कि उनके पास ऐसा कोई पत्र नहीं है जैसा कि सप्तर्षि दावा कर रहे हैं. उन्होंने इस बात पर भी आपत्ति ज़ाहिर की है कि आईएएस अफ़सर होकर भी सप्तर्षि ने चुनाव आयोग जैसे संवैधानिक प्रतिष्ठान पर हमला किया. उल्लेखनीय है कि शनिवार को एलवी सप्तर्षि ने आरोप लगाया था कि भाजपा नेताओं के दबाव में छपरा चुनाव में दो चुनाव आयुक्तों बीबी टंडन और गोपालस्वामी ने पुनर्मतदान करवाया था. सप्तर्षि ने दावा किया था कि इसे लेकर उन्होंने क़ानून मंत्री हंसराज भारद्वाज को चिट्ठी भी लिखी थी. इसके बाद रेलमंत्री और छपरा से सांसद आरजेडी नेता लालू प्रसाद यादव ने दोनों चुनाव आयुक्तों के इस्तीफ़े की मांग की थी. लेकिन सोमवार को पहली बार इस पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए क़ानून मंत्री हंसराज भारद्वाज ने कहा, "मेरे पास ऐसा कोई पत्र नहीं है, हो सकता है कि जिस मंत्री के साथ वे काम कर रहे हैं उनके पास ऐसा कोई पत्र हो." पत्रकारों से बात करते हुए भारद्वाज ने कहा कि एक वरिष्ठ अधिकारी होने के नाते सप्तर्षि को चुनाव आयोग जैसे संवैधानिक संस्थान पर हमला नहीं करना चाहिए था. उन्होंने संकेत दिए कि हो सकता है कि सप्तर्षि ने सरकारी प्रावधानों का उल्लंघन भी किया हो. उन्होंने कहा कि सरकारी अधिकारियों के लिए अपने क़ायदे होते हैं और सभी अधिकारियों को इसका पालन करना चाहिए. उल्लेखनीय है कि एलवी सप्तर्षि इस समय ग्रामीण विकास मंत्रालय के तहत आने वाले कापार्ट में कार्यरत हैं और यह मंत्रालय आरजेडी नेता रघुवंश प्रसाद सिंह संभाल रहे हैं. सप्तर्षि को सेवानिवृत्त होने में अभी दो महीनों का समय शेष है. |
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