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चुनाव आयुक्तों पर आरोप, इस्तीफ़े की मांग | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पिछले साल छपरा में लोकसभा चुनाव के दौरान दो चुनाव आयुक्तों की भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं. एक तत्कालीन चुनाव पर्यवेक्षक ने इन दोनों आयुक्तों पर गंभीर आरोप लगाए हैं. एक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी एलवी सप्तर्षि ने दोनों चुनाव आयुक्तों बीबी टंडन और एन गोपालस्वामी पर आरोप लगाया है कि उन्होंने पिछले साल छपरा लोकसभा चुनाव क्षेत्र का मतदान रद्द करवाने की जी-जान से कोशिश की थी. रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव ने चुनाव आयुक्तों बीबी टंडन और एन गोपालस्वामी के इस्तीफ़े की मांग की है. एलवी सप्तर्षि पिछले साल लोकसभा चुनाव के दौरान बिहार में विशेष पर्यवेक्षक थे. पश्चिम बंगाल कैडर के आईएएस अधिकारी सप्तर्षि इस समय लोक कार्यक्रम और ग्रामीण तकनीक विकास परिषद (कापार्ट) के महानिदेशक हैं. सप्तर्षि ने ये आरोप क़ानून मंत्री हंसराज भारद्वाज को लिखे पत्र में लगाए हैं. ग़ौरतलब है कि बीबी टंडन इसी महीने मुख्य चुनाव आयुक्त बनने वाले हैं. मांग पटना में जल्दबाज़ी में बुलाए गए एक संवाददाता सम्मेलन में रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव ने कहा, "चुनाव आयोग का पुनर्गठन होना चाहिए और इन दोनों आयुक्तों को तुरंत इस्तीफ़ा दे देना चाहिए."
दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी ने एलवी सप्तर्षि की मंशा पर सवाल उठाए हैं. बीजेपी का कहना है कि सप्तर्षि एक साल बाद ये मामला क्यों उठा रहे हैं. बीजेपी उपाध्यक्ष सुशील कुमार मोदी ने इस पर भी सवाल उठाए कि कैसे यह पत्र लीक हो गया और रेल मंत्री लालू प्रसाद तक पहुँच गया. मोदी ने कहा, "चुनाव एक साल पहले हुआ था और सप्तर्षि ये मामला आज उठा रहे हैं. उन्हें उसी समय ये मामला उठाना चाहिए था. वे एक साल तक शांत क्यों रहे." पटना में हुए संवाददाता सम्मेलन में लालू प्रसाद ने एलवी सप्तर्षि द्वारा लगाए गए आरोपों की चिट्ठी भी बँटवाई. रेल मंत्री ने कहा कि दोनों चुनाव आयुक्तों के ख़िलाफ़ लगे गंभीर आरोपों के कारण उन्हें तुरंत इस्तीफ़ा दे देना चाहिए. उन्होंने कहा कि इन चुनाव आयुक्तों ने उनके ख़िलाफ़ साज़िश रची थी ताकि वे संसद में न पहुँच पाएँ. उन्होंने कहा कि वे यह मामला संसद में उठाएँगे. पत्र क़ानून मंत्री हंसराज भारद्वाज को लिखे पत्र में सप्तर्षि ने कहा है, "मेरी अंतरात्मा मुझे चुप रहने की अनुमति नहीं देगी. इसलिए मैं आपको ये पत्र लिख रहा हूँ. मैं आपको सूचित करना चाहता हूँ कि मुख्य चुनाव आयुक्त के पद पर बीबी टंडन की नियुक्ति और गोपालस्वामी को चुनाव आयुक्त बनाए रखने से आने वाले चुनावों में निष्पक्षता नहीं रह पाएगी और न ही ये लोकतंत्र के हित में ही होगा." अभी तक चुनाव आयोग की ओर से इस बारे में कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है. शुक्रवार को भेजे अपने पत्र में सप्तर्षि ने कहा है कि हालाँकि छपरा में कुछ असामान्य नहीं घटित हुआ था लेकिन टंडन और गोपालस्वामी ने उस समय के गृह मंत्री लालकृष्ण आडवाणी और छपरा से बीजेपी उम्मीदवार राजीव प्रताप रूड़ी की मांग सुनने के बाद मतदान रद्द करने की हरसंभव कोशिश की थी. मौजूदा चुनाव आयुक्त टीएस कृष्णमूर्ति को निष्पक्ष बताते हुए और उनकी जम कर प्रशंसा करते हुए सप्तर्षि ने पत्र में लिखा है कि टंडन और गोपालस्वामी ने कृष्णमूर्ति को उनकी रिपोर्ट स्वीकार नहीं करने दिया. पत्र में सप्तर्षि ने लिखा है कि छपरा में दोबारा मतदान कराने के फ़ैसले के लिए कृष्णमूर्ति पर दबाव डाला गया. पत्र में सप्तर्षि ने आरोप लगाया है कि जब वे मतदान के बाद दिल्ली पहुँचे तो दोनों चुनाव आयुक्तों ने उनसे कहा कि वे लालू यादव और सभी यादवों को पाठ पढ़ाना चाहते हैं क्योंकि किसी भी यादव पर भरोसा नहीं किया जा सकता. पत्र में सप्तर्षि ने चुनाव आयोग के सलाहकार केजे राव के कामकाज के तरीक़े पर भी सवाल उठाए गए हैं. केजे राव को छपरा चुनाव में हुई अनियमितता की जाँच के आदेश दिए गए थे. |
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