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लालू की बर्खास्तगी की मांग पर हंगामा | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
केंद्रीय रेलमंत्री लालू प्रसाद यादव को लेकर सोमवार को संसद के दोनों सदनों में विपक्ष ने जमकर हंगामा किया और दोनों सदनों की बैठक स्थगित करनी पड़ी. प्रमुख विपक्षी गठबंधन एनडीए के नेता लालू प्रसाद यादव को बर्खास्त करने की मांग कर रहे थे. लालू प्रसाद यादव के ख़िलाफ़ दो मुद्दे थे. एक तो राँची में सीबीआई की विशेष अदालत में चारा घोटाले पर उनके ख़िलाफ़ आरोप तय किए गए. और दूसरे विपक्ष का आरोप था कि लालू प्रसाद यादव पर गुजरात में वैसा कोई हमला नहीं हुआ जैसा कि उन्होंने आरोप लगाया था. सदन की कार्रवाई शुरु होने से पहले ही एनडीए की बैठक में यह तय किया गया था कि वे लालू प्रसाद यादव से इस्तीफ़े की माँग करेंगे. बैठक शुरु होते ही विपक्ष ने जब इस्तीफ़े की मांग की तो जवाब में लालू प्रसाद यादव की पार्टी आरजेडी के सांसदों ने जवाब में गुजरात की मोदी सरकार को बर्खास्त करने की मांग की. लोकसभा की कार्रवाई भोजनावकाश से पहले स्थगित हुई तो राज्यसभा की बैठक समय पूर्व स्थगित करनी पड़ी. बयान रेलमंत्री होने के नाते लालू प्रसाद यादव ने समालया में हुई रेल दुर्घटना पर अपना बयान दिया. लालू प्रसाद यादव ने अपने लिखित बयान में दुर्घटना का विवरण देने के बाद कहा कि जब वे घायलों से मिलने अस्पताल पहुँचे तो गुजरात सरकार के कुछ मंत्रियों की उपस्थिति में बजरंग दल, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ एवं विश्व हिंदू परिषद के कार्यकर्ताओं ने असभ्य और अराजक व्यवहार किया. उन्होंने अपने बयान में कहा है कि बजरंग दल, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और विश्व हिंदू परिषद कार्यकर्ताओं ने उनकी गाड़ी पर हमला किया और उनकी गाड़ी का शीशा तोड़ दिया. लालू प्रसाद यादव का कहना है कि उनके निजी अतिरिक्त सचिव ने कुछ व्यक्तियों को पेट्रोल से भरी जेरीकेन और माचिस लेकर उनकी गाड़ी की ओर बढ़ते देखा था लेकिन वे कुछ करने में सफल नहीं हो सके. उन्होंने आरोप लगाया कि ज़िलाप्रशासन ने पर्याप्त व्यवस्था नहीं की थी. हालांकि लिखित बयान में इसका ज़िक्र नहीं है लेकिन बयान पढ़ते वक्त लालू प्रसाद यादव ने नरेंद्र मोदी पर हमला करवाने का आरोप भी लगाया. लोकसभा में शाम को जब लालू प्रसाद यादव अपना बयान पढ़ रहे थे तो विपक्ष ने जमकर शोर शराबा किया और बयान ख़त्म होने के बाद भी जब शोर ख़त्म नहीं हुआ तो लोकसभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी बेहद नाराज़ हो गए. वे बेहद भावुक हो गए थे और एकबारगी लगा कि उनका गला रुँध गया है. उन्होंने कहा कि यदि सांसद ठीक व्यवहार नहीं करेंगे तो वे कार्यवाही में बाधा डालने वालों के ख़िलाफ़ सख़्त कार्रवाई करेंगे. इसके बाद बजट की अनुदान मांगों पर चर्चा चलती रही. |
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