|
चारा घोटाला मामले में दबाव से इनकार | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
रेल मंत्री लालू यादव चारा घोटाले के मामले में न्यायाधीश बदलने की बात से शुरू हुआ विवाद जस्टिस एसएन वरियावा के स्पष्टीकरण के बाद थोड़ा शांत हुआ है. जस्टिस एसएन वरियावा ने स्पष्ट किया कि उनसे करोड़ों रुपए के चारा घोटाले की सुनवाई कर रहे न्यायाधीश को बदलने के संबंध में कोई संपर्क नहीं किया गया था. सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय पीठ की अध्यक्षता कर रहे न्यायमूर्ति एसएन वरियावा ने पिछले सप्ताह यह बयान देकर विवाद खड़ा कर दिया था. जस्टिस वरियावा ने गुरुवार को स्पष्टीकरण दिया कि उन पर इस मामले को लेकर कोई दबाव नहीं डाला गया था और उनके बयान को गलत संदर्भ में लिया गया. जस्टिस वरियावा उस खंडपीठ में है जो जनता दल- यू के सांसद राजीव रंजन सिंह और भाजपा सांसद सुशील कुमार मोदी की चारा घोटाले से संबंधित याचिका पर सुनवाई कर रही है. विवाद इसके पहले जस्टिस वरियावा ने कहा था, "किसी ने मुझसे संपर्क किया और यह जानने की कोशिश की थी कि पटना हाईकोर्ट में चारा घोटाले की सुनवाई कर रहे न्यायाधीश का तबादला हो सकता है." एनडीए नेताओं ने रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव और उनकी पत्नी और बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के ख़िलाफ़ चारा घोटाले और आय से अधिक संपत्ति के मामले को प्रभावित करने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर रखी है. उनका आरोप है कि आयकर विवाद की सुनवाई कर रहे आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण के एक सदस्य को दो सप्ताह के लिए प्रतिनियुक्ति के लिए भेज दिया गया. इसके बाद न्यायाधिकरण में नियुक्त दो अन्य सदस्यों ने लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी के पक्ष में फ़ैसला दे दिया. उनका आरोप है कि आयकर विभाग इस फ़ैसले को चुनौती भी नहीं दे रहा है. |
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||