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कथित घोटालों की जाँच के लिए समिति | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत में सत्ताधारी संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) सरकार ने पूर्व राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) सरकार के शासनकाल में हुए कथित घोटालों की जाँच करवाने की ठानी है. इस उद्देश्य से चार मंत्रियों की एक अनौपचारिक समिति का गठन किया गया है जिसकी अध्यक्षता प्रणव मुकर्जी करेंगे और जिसमें अर्जुन सिंह, शिवराज पाटिल और ग़ुलाम नबी आज़ाद होंगे. ये समिति उन कई ठेकों की जाँच करेगी जो पिछली एनडीए सरकार के समय दिए गए थे. चाहे औपचारिक तौर पर इस ख़बर की पुष्टि नहीं की गई है लेकिन काँग्रेस और भाजपा ने इस विषय में अपनी प्रतिक्रिया ज़ाहिर की है.
काँग्रेस की प्रवक्ता गिरिजा व्यास का कहना था, "ये सरकार का काम है. लेकिन भ्रष्टाचार कई जगह हुआ और उसके ख़िलाफ़ कार्रवाई होनी चाहिए. इसके बारे खुलकर सब कुछ सामने आना चाहिए." लेकिन भाजपा के सचिव मुख़्तार अब्बास नक्वी कहते हैं, "हमारे सरकार के शासनकाल के दौरान जो इलज़ाम लगे थे यदि उसके बारे में ये लोग कोई जाँच करवाना चाहते हैं तो उसका स्वागत है." उन्होंने कहा, "हमारा मानना है कि ऐसी कोई बात नहीं हुई. लेकिन ये सरकार बदले की भावना से काम करना चाहती है. तो काँग्रेस के ज़माने से और जहाँ-जहाँ काँग्रेस की सरकारे रही हैं और जो घोटाले सामने आए हैं सभी की जाँच होनी चाहिए."
हाल में वरिष्ठ काँग्रेस नेता और केंद्रीय मंत्री ग़ुलाम नबी आज़ाद ने कहा था कि एनडीए सरकार के शासनकाल के दौरान काँग्रेस ने जिन कथित घोटालों का संसद में ज़िक्र किया था उन्हें उठाया जाएगा. ग़ौरतलब है कि हाल में एनडीए सरकार के शासनकाल में ज़मीन आवंटन संघ परिवार से जुड़े संगठनों को किए जाने की ख़बरें अख़बारों में छपी थीं. काँग्रेस के गठबंधन ने संसदीय चुनावों के दौरान एनडीए के भ्रष्ट होने का आरोप लगाया था चाहे एनडीए ने इन आरोपों का खंडन किया था. लेकिन इस समय ऐसी समिति बनाने के कई मकसद हो सकते हैं जैसे कि सत्ताधारी गठबंधन को एकजुट रखना और केंद्रीय मंत्रिमंडल में उन मंत्रियों से ध्यान हटाना जिनपर अदालतों में मामले चल रहे हैं. जहाँ भाजपा में चुनाव हारने के बाद मायूसी है वहीं इस समिति के ज़रिए भाजपा पर दबाव बनाए रखने के प्रयास हो सकते हैं. |
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