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सुप्रीम कोर्ट जज का रहस्योद्घाटन | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
सर्वोच्च न्यायालय ने एक न्यायाधीश ने रहस्योद्घाटन किया है कि पटना उच्च न्यायालय में अरबों रुपए के चारा घोटाले की सुनवाई कर रहे न्यायाधीश को बदलने की संभावना को लेकर उनसे संपर्क किया गया था. सर्वोच्च न्यायालय के तीन सदस्यीय पीठ की अध्यक्षता कर रहे न्यायमूर्ति एसएन वरियावा ने आज यह रहस्योद्धाटन किया. यह पीठ जनता दल यू के सांसद राजीव रंजन सिंह और भाजपा सांसद सुशील कुमार मोदी की याचिका पर सुनवाई कर रहा है. इस पीठ में न्यायमूर्ति वरियावा के अलावा न्यायमूर्ति एआर लक्ष्मण और न्यायमूर्ति एसएच कपाड़िया हैं. न्यायमूर्ति वरियावा ने कहा, "सोमवार को किसी ने मुझसे संपर्क किया और यह जानने की कोशिश की कि पटना हाईकोर्ट में चारा घोटाले की सुनवाई कर रहे न्यायाधीश का तबादला हो सकता है." याचिकाकर्ता दोनों नेताओं के वकील मुकुल रोहतगी ने कहा है कि उनको आशंका थी कि केंद्र सरकार की योजना हाईकोर्ट के न्यायाधीश को तरक्की देकर अन्यत्र भेजने की है और न्यायमूर्ति के रहस्योद्धाटन से इस आशंका की पुष्टि होती है. लेकिन सॉलिसीटर जनरल ग़ुलाम वाहनवती ने इस पर आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा कि न्यायाधीश को बदले जाने का सवाल ही नहीं है. पीठ ने भी आशा व्यक्त की है कि ऐसा नहीं होगा. दोनों नेताओं ने रेलमंत्री लालू प्रसाद यादव और उनकी पत्नी तथा बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के ख़िलाफ़ चारा घोटाला और आय से अधिक संपत्ति के मामले में न्यायिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप करते हुए यह याचिका दायर कर रखी है. इनका आरोप है कि आयकर विवाद की सुनवाई कर रहे आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण के एक सदस्य आरके त्यागी को दो सप्ताह के लिए प्रतिनियुक्ति के लिए भेज दिया गया और इसके बाद न्यायाधिकरण में नियुक्त पी मोहन राजन और एमके सरकार ने लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी के पक्ष में फ़ैसला दे दिया. उनका आरोप है कि आयकर विभाग इस फ़ैसले को चुनौती भी नहीं दे रहा है. |
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