| चौटाला फिर बरसे चुनाव आयोग पर | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
इंडियन नेशनल लोकदल के नेता और हरियाणा के मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला मतगणना पहले करवाने के निर्णय को लेकर चुनाव आयोग पर एक बार फिर बरसे. इससे पहले वे चुनाव आयोग से इस बात को लेकर नाराज़ थे कि आयोग ने हरियाणा में पहले चरण में ही चुनाव करवा दिया जिससे राज्य में विकास के कार्य रोक देने पड़े और लोगों को नौकरी पर नहीं रखा जा सका. उन्होंने कहा है कि चुनाव आयोग जो कुछ कर रहा है वह जनप्रतिनिधित्व क़ानून का उल्लंघन है और वे इसके ख़िलाफ़ अदालत भी जा सकते हैं. उन्होंने चुनाव आयोग पर कांग्रेस के इशारे पर काम करने के आरोप भी लगाए थे. चुनाव आयोग ने हरियाणा में मतगणना निर्धारित समय से चार दिन पहले यानी 23 फ़रवरी को करवाने का निर्णय लिया है. पहले मतगणना बिहार और झारखंड की मतगणना के साथ ही 27 फ़रवरी को होनी थी. क़ानून का हवाला दिल्ली में पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग ने मतगणना की तिथि बदलने का जो निर्णय लिया है उससे उन मतों की गिनती नहीं हो सकेगी जो डाक से पहुँचने वाले हैं. हालांकि चुनाव आयोग ने कहा है कि चुनाव परिणामों की घोषणा तभी की जाएगी जब डाक से आने वाले मतपत्रों की गिनती कर ली जाएगी.
लेकिन मुख्यमंत्री चौटाला का कहना है कि चुनाव आयोग का कहना है कि यदि जीत का अंतर डाक से मिलने वाले मतों की संख्या से अधिक होगी तो चुनाव परिणाम घोषित कर दिए जाएँगे और यह जनप्रतिनिधित्व क़ानून का उल्लंघन है. उनका कहना है कि क़ानून के अनुसार डाक से मिलने वाले मतों की गिनती पहले की जानी चाहिए. सत्ताधारी इंडियन नेशनल लोकदल के नेता ओमप्रकाश चौटाला ने कहा कि राज्य के लगभग पौने दो लाख सैनिकों से कहा गया है कि वे 27 फ़रवरी तक अपने वोट डाक से भेज दें. लेकिन चुनाव आयोग ने इस आरोप को ग़लत ठहराते हुए कहा है कि यह कहना ठीक नहीं है कि आयोग डाक से मिलने वाले मतों की अनदेखी कर रहा है. आयोग ने कहा है कि यदि चुनाव क्षेत्र में डाक से मिलने वाले मतों की संख्या से जीत का अंतर बहुत अधिक नहीं होगा तो चुनाव परिणाम घोषित नहीं किए जाएँगे. फिर भाजपा की ओर उधर ओमप्रकाश चौटाला ने संकेत दिए हैं कि वे एक बार फिर भारतीय जनता पार्टी के साथ गठबंधन के लिए तैयार हैं. चौटाला की इंडियन नेशनल लोकदल ने लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा से अपने संबंध तोड़ लिए थे. अब वे तर्क दे रहे हैं कि कांग्रेस को सत्ता से बाहर रखने के लिए वे फिर भाजपा से हाथ मिला सकते हैं. और भाजपा ने भी संकेत दिए हैं कि यदि दोनों दलों की सीटों की संख्या ऐसी होती है कि वे सरकार बना सकें तो भाजपा इंडियन नेशनल लोकदल के साथ चुनाव बाद गठबंधन पर विचार कर सकती है. |
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