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दिलचस्प मुक़ाबला है नरवाणा में | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
जींद ज़िले के नरवाणा की सीट को दिलचस्प बनाने के लिए सिर्फ़ यह नहीं है कि यहाँ से मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला चुनाव लड़ रहे हैं. रुचिकर यह भी है कि चौधरी देवीलाल के बेटे चौटाला को इस चुनाव में चुनौती का सामना करना पड़ रहा है. उनको चुनौती दे रहे हैं युवा कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष रणदीप सिंह सुरजेवाला. ऐसा नहीं है कि दोनों पहली बार आमने सामने हैं. वे एक दूसरे के ख़िलाफ़ पहले भी तीन बार चुनाव लड़ चुके हैं. दो बार ओमप्रकाश चौटाला की जीत हुई है तो एक बार रणदीप सिंह सुरजेवाला भी जीत चुके हैं. अलग लड़ाई लेकिन इस बार की लड़ाई का मामला ही अलग है. इसका एक कारण तो यह है कि ओमप्रकाश चौटाला ग़ैर कांग्रेसी मुख्यमंत्री के रुप में पाँच साल का कार्यकाल पूरा करने वाले पहले मुख्यमंत्री हैं. इस कार्यकाल के बाद यह उनका पहला चुनाव है. दूसरा यह तथ्य भी है कि पिछली बार जब पूरे हरियाणा में इंडियन नेशनल लोकदल की हवा चल रही थी जब भी ओमप्रकाश चौटाला की जीत का अंतर लगभग दो हज़ार वोट ही था. इस बार आमतौर पर लोग मान रहे हैं कि चौटाला को सत्ता में होने वाले दलों को जो नकारात्मक प्रतिक्रिया मिलती है वह इस बार चौटाला सरकार को मिल सकती है. उधर रणदीप सिंह सुरजेवाला भी कोई नए खिलाड़ी नहीं हैं. वे हरियाणा सरकार में प्रभावशाली मंत्री रह चुके सुरजेवाला के बेटे हैं, मध्यप्रदेश के राज्यपाल बलराम जाखड़ के रिश्तेदार हैं और युवक कांग्रेस में सबसे ऊँचे पद पर काम का अनुभव भी उन्हें है. फिर वे इस समय वे हरियाणा प्रदेश कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष भी हैं. इसके बाद वे सोनिया गाँधी और उनके परिवार के लिए भी परिचित ही हैं. नरवाणा चुनाव क्षेत्र के जो लोग सुरजेवाला का समर्थन करते हैं वे मानते हैं कि रणदीप सिंह सुरजेवाला मुख्यमंत्री भी बन सकते हैं. हालांकि ऐसा तो कांग्रेस के आधा दर्जन नेताओं के बारे में कहा जा रहा है. मुद्दे ओमप्रकाश चौटाला के चुनाव प्रचार का ज़्यादातर काम उनके बेटों और पोते ने संभाल रखा है. लोग बताते हैं कि पिछले पाँच सालों में प्रदेश की बेरोज़गारी की समस्या का हल भले ही न निकला हो मुख्यमंत्री चौटाला ने अपने विधानसभा क्षेत्र की जनता की बहुत चिंता की है. इसका उनके पक्ष में इस्तेमाल भी किया जा रहा है. लोग मानते थे कि मुख्यमंत्री की सीट होने के कारण नरवाणा और जींद ज़िले को लाभ होगा लेकिन वैसा हुआ नहीं. लोग उदाहरण देकर पूछते हैं कि पूर्व मुख्यमंत्रियों भजनलाल और बंसीलाल के चुनाव क्षेत्रों की तुलना में तो नरवाणा का कोई विकास ही नहीं हुआ. उधर रणदीप सिंह सुरजेवाला मानते हैं कि ओमप्रकाश चौटाला तो नरवाणा के लिए एक बाहरी व्यक्ति हैं. वे दावा करते हैं कि ओमप्रकाश चौटाला को शहर में किसी जगह अकेले छोड़ दिया जाए तो वे बिना किसी से पूछे किसी स्थान पर नहीं जा सकते. रणदीप सिंह सुरजेवाला ने चुनावों में ओमप्रकाश चौटाला के भ्रष्टाचार के मुद्दों को बेहद उछाला है. वे दावा करते हैं कि उनके पास भ्रष्टाचार के सारे प्रमाण हैं. हालांकि चौटाला का प्रचार कार्य संभाल रहे भारत भूषण इन आरोपों को झूठा ठहराते हैं. इस समय मतदाता दोनों प्रत्याशियों के आरोपों प्रत्यारोपों को ध्यान से सुन रहे हैं. नतीजे क्या होंगे यह तो 27 फ़रवरी को ही पता चलेगा. ओमप्रकाश चौटाला यदि हारे तो उन्होंने अपने लिए रोड़ी में वैकल्पिक सीट तलाश रहे हैं और वहां से भी चुनाव लड़ रहे हैं. यदि रणदीप सिंह सुरजेवाला हारे तो भी उनके पास राजनीति के दूसरे विकल्प हैं. |
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