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पंजाब-हरियाणा जल विवाद में नया मोड़ | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत में पंजाब और हरियाणा राज्यों के बीच सतलुज-यमुना नहर के ज़रिए जल वितरण पर चल रहे विवाद ने एक नया मोड़ लिया है. समाचार एजेंसियों के अनुसार हरियाणा विधानसभा में काँग्रेस के सभी 19 विधायकों ने अपने इस्तीफ़े हरियाणा काँग्रेस अध्यक्ष भजन लाल को सौंप दिए हैं. इससे पहले पंजाब विधानसभा ने सर्वसम्मति से एक विधेयक पारित किया था जिसके तहत वह 1981 में पड़ोसी राज्यों के साथ किए गए पानी के बँटवारे के समझौते से पीछे हट गया था. विधेयक पारित होने के बाद संसद में ये मामला उठा और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि पंजाब हरियाणा और राजस्थान के मुख्यमंत्रियों से मिलकर वे इस समस्या का हल निकाल लेंगे. समाचार एजेंसियों के अनुसार हरियाणा प्रदेश काँग्रेस समिति के अध्यक्ष भजन लाल ने कहा, "पंजाब की काँग्रेस सरकार के कदम से हरियाणा में काँग्रेस पार्टी पर असर नहीं पड़ेगा. उन्होंने इस मामले पर हरियाणा काँग्रेस की एक ग्यारह सदस्यों की समिति गठित करने की घोषणा भी की है. पंजाब-हरियाणा मामलों के विशेषज्ञ डॉक्टर प्रमोद कुमार ने बीबीसी को बताया, "हरियाणा काँग्रेस पंजाब में काँग्रेस की सरकार से दूरी बनाना चाहती है और स्पष्ट कर देना चाहती है कि उसका पंजाब की काँग्रेस सरकार की कार्रवाई से कोई लेना-देना नहीं है." उधर हरियाणा के मुख्यमंत्री और इंडियन नेशनल लोकदल के अध्यक्ष ओमप्रकाश चौटाला ने केंद्र सरकार पर पंजाब सरकार से मिलीभगत का आरोप लगाया है. उन्होंने माँग की कि 'असंवैधानिक कदम उठाने पर' पंजाब सरकार को बर्खास्त किया जाना चाहिए. |
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