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बगलिहार बाँध के बारे में ज़रूरी जानकारी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
बगलिहार बाँध परियोजना क्या है? बगलिहार बाँध जम्मू क्षेत्र के डोडा ज़िले में बनाया जा रहा है. यह जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर है और जम्मू से क़रीब 150 किलोमीटर दूर बटौत शहर के पास है. नींव से इसकी ऊँचाई 144 मीटर और लंबाई 317 मीटर होगी. बगलिहार बाँध से पानी थामने की क्षमता एक करोड़ पचास लाख घन मीटर होगी. साढ़े चार सौ मेगावाट बिजली का उत्पादन करने वाली यह परियोजना अगले साल पूरी करने का लक्ष्य है. बगलिहार बाँध से जो बिजली बनेगी उसे उत्तरी ग्रिड को दिया जाएगा. कुछ बिजली जम्मू- कश्मीर को भी दी जाएगी. बगलिहार बाँध परियोजना पर भारत और पाकिस्तान के बीच आख़िर विवाद क्या है? इसके लिए कुछ दशक पीछे जाना होगा. दरअसल जब बँटवारा हुआ था तो भारत से निकलने वाली रावी और सतलज नदियों के पानी पर विवाद खड़ा हो गया था. चूँकि ये नदियाँ पाकिस्तान में भी बहती हैं इसलिए इनके पानी की कितनी मात्रा पाकिस्तान को मिले इस पर दोनों देशों मतभेद हो गया. मामला विश्व बैंक तक पहुँचा और उसकी मध्यस्थता से भारत और पाकिस्तान के बीच 1960 में सिंधु जल संधि हुई थी. सिंधु जल संधि में किसको क्या मिला? सिंधु जल संधि में सतलुज, ब्यास, रावी, सिंधु, झेलम और चेनाब नदियों के पानी का बँटवारे के लिए व्यवस्था की गई. इस व्यवस्था में सतलज, ब्यास और रावी का अधिकतर पानी भारत के हिस्से में रखा गया जबकि सिंधु, झेलम और चेनाब का अधिकतर पानी पाकिस्तान के हिस्से में गया. यानी सिंधु, झेलम और चेनाब के पानी के बहाव पर भारत का नियंत्रण सीमित कर दिया गया. अब पाकिस्तान का कहना है कि बगलिहार बाँध परियोजना सिंधु जल संधि का उल्लंघन है क्योंकि इस परियोजना से उसे मिलने वाला पानी बहुत कम हो जाएगा. पाकिस्तान की शिकायत क्या है? बगलिहार बाँध चेनाब पर बनाया जा रहा है और चेनाब का ज़्यादातर पानी सिंधु जल संधि के अनुसार पाकिस्तान को मिलना है. इसलिए पाकिस्तान का आरोप है कि बगलिहार बाँध से चेनाब के पानी का बहाव कम होगा जिससे पाकिस्तान को कम पानी मिलेगा. जबकि भारत का कहना है कि बगलिहार बाँध परियोजना का तकनीकी आकार सिंधु जल संधि के प्रावधानों के अनुसार ही बनाया जा रहा है.
बगलिहार बाँध का मुआयना करने के लिए पिछले साल पाकिस्तान के अधिकारियों ने वहाँ का दौरा भी किया था जिसके बाद धमकी दी गई थी कि मतभेदों को सुलझाने के लिए पाकिस्तान विश्व बैंक जैसे किसी मध्यस्थ का दरवाज़ा भी खटखटाया जा सकता है. लेकिन भारत बगलिहार बाँध परियोजना पर तमाम मतभेदों को आपस में ही दूर करने की हिमायत करता रहा है. पानी के बहाव के बारे में भारत की क्या ज़िम्मेदारी है? सिंधु जल संधि के तहत भारत की यह ज़िम्मेदारी है कि वह सिंधु, झेलम और चेनाब नदियों पर बनाई जाने वाली किसी भी बिजली परियोजना के बारे में पूरी जानकारी पाकिस्तान को दे. इसके अलावा सिंधु, झेलम और चेनाब नदियों से हर महीने कितना पानी पाकिस्तान की तरफ़ बहता है, उसके बारे में भी जानकारी दी जाती है. दोनों देशों ने एक सिंधु जल आयोग बनाया हुआ है जिसकी हर साल बैठक होती है जिसमें सिंधु जल संधि के बारे में दोनों देशों के बीच सूचनाओं का आदान-प्रदान होता है और आपसी शिकायतें दूर करने की कोशिश की जाती है. |
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