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चीन में बाँधों की बहुतायत पर चिंता | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
प्रकृति के संरक्षण के लिए काम करनेवाली अंतरराष्ट्रीय संस्था डब्ल्यूडब्ल्यूएफ़ ने दुनिया में सबसे अधिक बाँधों के निर्माण के लिए चीन की आलोचना की है. वर्ल्डवाइड फंड फ़ॉर नेचर की रिपोर्ट में कहा गया है कि लगातार बाँधों के निर्माण के कारण चीन की यांग्त्ज़ी नदी पर सबसे अधिक ख़तरा बन गया है. हाल के वर्षों में चीन की सत्ता के शीर्ष पदों पर बैठे अधिकारी इंजीनियर रहे हैं और इस कारण देश में बिजली की कमी दूर करने के उद्देश्य से चीन में कई बाँध बनाए जाने लगे. आज की तारीख़ में चीन में 88 बाँध बन रहे हैं और कम-से-कम 36 और बाँधों के निर्माण की तैयारी चल रही है. निर्माणाधीन और विचाराधीन बाँधों में से 46 बाँध अकेले यांग्त्ज़ी नदी पर बन रहे हैं. इनमें एक बाँध है थ्री गौर्जेज़ बाँध जो दुनिया का सबसे बड़ा बाँध है. ख़तरा
डब्ल्यूडब्ल्यूएफ़ की रिपोर्ट में कहा गया है कि बाँधों की बहुतायत के कारण यांग्त्ज़ी नदी में वास करनेवाले लुप्तप्राय जीवों के अस्तित्व पर ख़तरा पैदा हो गया है. इनमें डॉल्फ़िन मछलियाँ भी शामिल हैं जिनकी संख्या अब कम होकर कुछ दर्जन भर रह गई है. रिपोर्ट में ये भी चेतावनी दी गई है कि नदियों में पानी कम हो जाने की सूरत में तलहटी में रहनेवाले लोगों को कठिनाई का सामना करना पड़ सकता है. इन्हीं सब कारणों से कई लोगों ने सालवीन नदी पर बननेवाली 16 बाँधों की योजना के बारे में पुनर्विचार करने की अपील की है. सालवीन नदी बर्मा और थाईलैंड में भी बहती है. संस्था ने चीन सरकार से ये कहते हुए इन योजनाओं पर दोबारा विचार करने का आग्रह किया है कि इनके कारण पर्यावरण को नुक़सान हो सकता है. |
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