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पंजाब ने नदी जल बँटवारे से पल्ला झाड़ा

अमरिंदर सिंह
पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने रखा समझौता रद्द करने संबंधी विधेयक
पंजाब और हरियाणा के बीच नदी जल बँटवारे को लेकर वर्षों पुराने विवाद ने एक नया अभूतपूर्व मोड़ ले लिया है.

सोमवार को पंजाब विधानसभा ने एक दिन के ख़ास अधिवेशन के दौरान नया विधेयक पारित कर 1981 में पड़ोसी राज्यों के साथ किए गए पानी के बँटवारे संबंधी समझौते और उससे पहले के सभी फ़ैसलों से अपना पल्ला झाड़ लिया.

समझा जाता है कि पंजाब सरकार ने ये कदम पिछले दिनों उच्चतम न्यायालय के उस फ़ैसले से बचने के लिए उठाया है जिसमें भारत सरकार को हिदायत दी गई थी कि वह पंजाब से हरियाणा पानी ले जाने वाली सतलज-यमुना लिंक नहर का फ़ौरी तौर पर निर्माण शुरू करवाए.

उच्चतम न्यायालय के इस निर्देश को पूरा करने से बचने के लिए पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने सोमवार दोपहर को राज्य विधानसभा में एक नया विधेयक रखा जिसमें पंजाब, हरियाणा और राजस्थान के बीच 1981 में नदी जल बँटवारे पर किए गए समझौते को रद्द करने की बात की गई थी.

पंजाब, टर्मिनेशन ऑफ़ एग्रीमेंट्स बिल 2004 नाम के नए विधेयक में जहाँ 1981 और संबंधित समझौतों को रद्द किया गया है वहीं स्पष्ट किया गया है कि रावी-व्यास-सतलज नदी प्रणाली के मौजूदा पानी में से जो हिस्सा राजस्थान और हरियाणा जा रहा है उसे बरक़रार रखा जाएगा.

विधेयक पर बहस के दौरान विपक्ष के नेता और शिरोमणि अकाली दल प्रमुख प्रकाश सिंह बादल ने सरकार के प्रस्ताव का समर्थन करते हुए कहा कि अमरिंदर सिंह सरकार को ये क़दम बहुत पहले उठाना चाहिए था.

बहस के दौरान सदस्यों ने इस तर्क को बार-बार दोहराया कि चूँकि रावी-व्यास और सतलज नदियाँ केवल पंजाब के क्षेत्र पर बहती हैं इनके पानी पर किसी अन्य राज्य का कोई अधिकार नहीं है.

ये भी कहा गया कि अगर सतलज यमुना लिंक नहर के ज़रिए हरियाणा के अतिरिक्त पानी दिया गया तो पंजाब की नौ लाख एकड़ ज़मीन सूखे की चपेट में आ जाएगी.

कुछ देर की बहस के बाद विधानसभा ने विधेयक को सर्वसम्मति से पारित कर दिया.

विधानसभा अधिवेशन के बाद विधानसभा ने विधेयक को सर्वसम्मति से पारित कर दिया. अधिवेशन के बाद मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने बताया कि नए विधेयक का मक़सद उच्चतम न्यायालय के सतलज-यमुना लिंक नहर संबंधी फ़ैसले के क़ानूनी आधार को समाप्त कर देने का है.

मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि नए विधेयक के बाद पंजाब के किसानों को उनका जायज़ हक़ दिलाया जा सकेगा.

विधानसभा अधिवेशन के बाद मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह और बादल सहित पंजाब के कई वरिष्ठ नेता राज्यपाल से मिलने गए जहाँ उन्होंने एक स्वर में विधेयक पर तुरंत अनुमति दिए जाने पर ज़ोर डाला.

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