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प्रधानमंत्री ने राज्यों की बैठक बुलाई | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह ने कहा है कि पंजाब जल संकट का जल्दी ही कोई ठोस हल निकाला जाएगा और इसके लिए संबद्ध राज्यों - पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्रियों की बैठक बुलाई जा रही है. मनमोहन सिंह ने लोकसभा में मंगलवार को पंजाब जल संकट के बारे में पूछे गए सवालों का जवाब देते हुए कहा कि इस विवाद के ताज़ा हालात पर सरकार चिंतित है और इसका ऐसा हल निकालने की कोशिश की जा रही है जो सभी संबद्ध राज्यों को मान्य हो. प्रधानमंत्री ने कहा, "मैंने पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और राजस्थान के मुख्यमंत्रियों की बैठक बुलाई है ताकि कोई सर्वमान्य हल निकाला जा सके." मनमोहन सिंह ने बताया कि लोकसभा और राज्यसभा में विपक्ष के नेता लालकृष्ण आडवाणी और जसवंत सिंह ने भी उनसे मुलाक़ात कर इस विवाद को सुलझाने में सहयोग का आश्वासन दिया है. जसवंत सिंह ने इस संकट को एक ऐसा विवाद बताया जिसको लेकर संबद्ध राज्य बहुत संवेदनशील हैं. नया मोड़ पंजाब और हरियाणा के बीच नदी जल बँटवारे को लेकर वर्षों पुराने विवाद ने सोमवार को तब एक नया मोड़ ले लिया जब पंजाब विधानसभा ने एक दिन के ख़ास अधिवेशन के दौरान नया विधेयक पारित करके 1981 के जल बँटवारे संबंधी समझौते और उससे पहले के सभी फ़ैसलों से अपना पल्ला झाड़ लिया. समझा जाता है कि पंजाब सरकार ने ये क़दम पिछले दिनों उच्चतम न्यायालय के उस फ़ैसले से बचने के लिए उठाया है जिसमें भारत सरकार को हिदायत दी गई थी कि वह पंजाब से हरियाणा पानी ले जाने वाली सतलज-यमुना लिंक नहर का तुरंत निर्माण शुरू करवाए. उच्चतम न्यायालय के इस निर्देश को पूरा करने से बचने के लिए पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने सोमवार को राज्य विधानसभा में एक नया विधेयक रखा जिसमें पंजाब, हरियाणा और राजस्थान के बीच 1981 में नदी जल बँटवारे पर किए गए समझौते को रद्द करने की बात की गई थी. |
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