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सतलुज-यमुना नहर: पंजाब को झटका | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पंजाब सरकार को सतलुज-यमुना नहर के मुद्दे पर तब झटका लगा जब सर्वोच्च न्यायालय ने इस विषय में राज्य सरकार की याचिका ख़ारिज कर दी. सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार को चार जून को आदेश दिया था कि वह सतलुज-यमुना नहर बनाए और पंजाब सरकार ने इस आदेश पर पुनर्विचार के लिए अपील की थी. पंजाब सरकार की याचिका ख़ारिज करते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार से फिर नहर बनाने के लिए कहा. लेकिन सतलुज-यमुना नहर का मामला न्यायालय में अभी ख़त्म नहीं हुआ. पंजाब के अपने पड़ोसी राज्यों के साथ जल वितरण संबंधित समझौते रद्द करने पर सर्वोच्च न्यायालय ने केंद सरकार और छह राज्यों को नोटिस दिया हुआ है. ये नोटिस राष्ट्रपति के इस बारे में सर्वोच्च न्यायालय से राय माँगने पर अगस्त की शुरुआत में दिया गया था और इन राज्यों और केंद्र सरकार को मध्य सितंबर तक जवाब देने है. जिन राज्य सरकारों को नेटिस दिया जा चुका है वे हैं - पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, दिल्ली और जम्मू-कश्मीर. सर्वोच्च न्यायालय ने इस विषय से संबंधित सभी तथ्यों और अपना-अपना पक्ष उसके सामने रखे जावने का आदेश दिया हुआ है. |
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