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एनडीए ने प्रधानमंत्री की अपील ठुकराई | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) ने संसद के दोनों सदनों का बहिष्कार करने का फ़ैसला किया है. एनडीए नेताओं की पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की अध्यक्षता में हुई बैठक में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के राज्यसभा में दिए बयान पर कड़ी आपत्ति प्रगट की गई. भाजपा नेता जसवंत सिंह ने पत्रकारों को बताया कि एनडीए नेताओं ने संसद का बहिष्कार जारी रखने का फ़ैसला किया गया. भाजपा नेता सुषमा स्वराज का कहना था कि प्रधानमंत्री का बयान दिखाता है कि सरकार नहीं चाहती है कि विपक्ष संसद में आए. इस बैठक में जॉर्ज फर्नांडिस और भाजपा अध्यक्ष लालकृष्ण आडवाणी ने सरकार के रवैये की आलोचना की. प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने गुरुवार को बड़े तल्ख लहजे में विपक्ष से सदन में वापस आने का अनुरोध किया था. इसके पहले लोक सभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी ने एनडीए नेताओं से बहिष्कार समाप्त करने की अपील की थी. दरार इधर एनडीए के सहयोगी दल तेलुगु देशम पार्टी ने संसद की कार्यवाही में भाग लेना शुरु कर दिया है. टीडीपी के इस फ़ैसले से एनडीए की रणनीति को झटका लगा है. संसद की कार्यवाही में शामिल होने की घोषणा करते हुए टीडीपी के नेता येरन नायडू ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में विपक्ष का होना आवश्यक है और इसलिए वे संसद में जा रहे हैं. इससे पहले भी ख़बरें आ रही थीं कि एनडीए के बहिष्कार के फ़ैसले से साथी दल सहमत नहीं हैं और उन्होंने पुनर्विचार का अनुरोध भी किया है. तेलुगु देशम ने हालांकि हमेशा ही कहा है कि वह एनडीए को मुद्दों के आधार पर समर्थन देती है. लेकिन एनडीए के किसी फ़ैसले के विरोध में इस तरह खुलकर वह पिछले सात सालों में कभी नहीं आई थी. |
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