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गुरुवार, 28 अप्रैल, 2005 को 04:55 GMT तक के समाचार
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राष्ट्रपति से हस्तक्षेप का अनुरोध
एनडीए नेता
एनडीए ने संसद के बहिष्कार का फ़ैसला वापस लेने से इंकार कर दिया है
लालू प्रसाद यादव के इस्तीफ़े की मांग को लेकर संसद का बहिष्कार कर रहे एनडीए नेता गुरुवार को राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम से मिले और उनसे अनुरोध किया कि वे इस मामले में हस्तक्षेप करें.

राष्ट्रपति से मिलने के बाद एनडीए नेताओं ने कहा कि संसद की कार्यवाहियों में भाग लेने का प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का अनुरोध उन्होंने नामंज़ूर कर दिया है.

उल्लेखनीय है कि सरकार पर विपक्ष की उपेक्षा का आरोप लगाते हुए प्रमुख विपक्षी गठबंधन एनडीए ने बुधवार से तीन दिनों तक संसद की कार्यवाही के बहिष्कार की घोषणा कर रखी है.

बुधवार के बाद गुरुवार को भी एनडीए के सदस्य संसद के दोनों सदनों में नहीं गए. इस बीच वे संसदीय समिति की बैठकों में भी नहीं भाग ले रहे हैं.

एनडीए की मांग

एनडीए नेता राष्ट्रपति से मिलकर कहा है कि चारा घोटाले में आरोप पत्र दाखिल होने के बाद लालू प्रसाद यादव को मंत्री पद से हटा दिया जाना चाहिए.

इस मुलाक़ात के बाद राष्ट्रपति भवन के प्रांगण में पत्रकारों से बात करते हुए भाजपा अध्यक्ष लालकृष्ण आडवाणी ने कहा कि एनडीए ने कहा है कि यूँ तो राष्ट्रपति इस मामले में कोई सीधी कार्रवाई नहीं कर सकते लेकिन यदि वे इस मामले पर टिप्पणी करते हैं तो यह भी बड़ा हस्तक्षप होगा.

आडवाणी ने कहा कि एनडीए ने राष्ट्रपति से ऐसे ही हस्तक्षेप का अनुरोध किया है.

राष्ट्रपति से मिलने पहुँचे एनडीए के प्रतिनिधि मंडल में आडवाणी के अलावा पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी, एनडीए के संयोजक जॉर्ज फ़र्नांडिस, जसवंत सिंह, येरन नायडू, सुषमा स्वराज, पीसी थॉमस और वीके मल्होत्रा शामिल थे.

अनुरोध ठुकराया

लालकृष्ण आडवाणी ने बताया कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने उन्हें और जसवंत सिंह को फ़ोन किया था कि संसद के बहिष्कार के निर्णय पर पुनर्विचार करें.

उन्होंने बताया कि लोकसभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी ने उन्हें पत्र भी लिखा है.

सदन में विपक्ष के नेता आडवाणी ने कहा कि एनडीए की बैठक में इन दोनों ही अनुरोध पर विस्तृत चर्चा के बाद फ़ैसला किया गया कि संसद का बहिष्कार जारी रहेगा.

लालू प्रसाद यादव इस सिलसिले में यूपीए की चेयरपर्सन और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी से भी मिले थे.

कांग्रेस महासचिव अंबिका सोनी ने कहा है कि यदि आरोप पत्र के आधार पर ही बर्खास्तगी की बात होनी है तो मुरली मनोहर जोशी, लालकृष्ण आडवाणी और उमा भारती से बात शुरु होनी चाहिए.

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