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'यह विपक्ष की हिसाब बराबरी की कोशिश है' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
संसद में हंगामा दरअसल गठबंधन को तोड़ने की कोशिश है और हंगामे के ज़रिए सरकार से हिसाब बराबर करने की कोशिश की जा रही है. मूल मुद्दा रेल दुर्घटना है जिसमें अनेक लोग मारे गए थे लेकिन उस पर विपक्ष बहस करने के बजाय हंगामा कर रहा है. इसके पहले भी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के कार्यकाल के दौरान दुर्घटनाएँ हुई थीं लेकिन इस पर संवेदना व्यक्त करने के बजाय उस पर राजनीति हो रही है. रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव दुर्घटनास्थल पर गए तो वहाँ उन पर हमला हुआ. गुजरात में उनसे हिसाब बराबर करने की कोशिश की गई. एनडीए की पूरी कोशिश है कि सरकार को किसी तरह गिरा दिया जाए अथवा लालू यादव पर इतना दबाव बना दिया जाए कि वो इस्तीफ़ा दे दें. लेकिन उनके ख़िलाफ़ आरोप पुख़्ता नहीं है. एनडीए नेता भी ऐसी परिस्थितियों से गुज़रे थे पर उन्होंने इस्तीफ़ा नहीं दिया था. ऐसा नज़र आ रहा है कि संसद में असहिष्णुता बढ़ती जा रही है. पार्टियाँ एक दूसरे का आदर करती नज़र नहीं आ रही है. मैं ऐसा नहीं कह रहा है कि राजनीति एक तरफ़ से हो रही है, यह दोनों ओर से हो रही है. मेरा मानना है कि मुद्दों को उठाया जाए और हिसाब बराबर करने की कोशिश न की जाए. |
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