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संसद चौथे दिन भी नहीं चली | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
झारखंड में संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) नेता शिबू सोरेन को मुख्यमंत्री बनाए जाने के विरोध में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के सांसदों ने शुक्रवार को भी संसद की कार्यवाही नहीं चलने दी. लोक सभा की कार्यवाही जैसे ही शुरू हुई सदन में हो-हल्ला होने लगा. साथ ही एनडीए सांसद नारेबाज़ी करने लगे. पिछले तीन दिन से एनडीए झारखंड मुद्दे पर संसद को नहीं चलने दा रहा है. लोक सभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी ने सांसदों को समझाने की कोशिश की लेकिन सांसद सुनने को तैयार नहीं थे. इस पर उन्होंने सदन की कार्यवाही 9 मार्च तक स्थगित कर दी. सरकार पर सवाल विपक्ष के नेता लालकृष्ण आडवाणी ने लोक सभा में कहा कि झारखंड के 41 विधायक गुरुवार को राष्ट्रपति से मिले थे. उनका कहना था कि झारखंड में ऐसी सरकार बना दी गई है जिसको जनादेश प्राप्त नहीं है. आडवाणी ने झारखंड और गोवा के राज्यपालों को बर्ख़ास्त करने की माँग की. दूसरी ओर राज्यसभा में भी ऐसा ही दृश्य था. वहाँ भी एनडीए सांसद झारखंड प्रकरण को लेकर नाराज़ थे. सभापति भैरोंसिंह शेखावत ने दोनों पक्षों के कुछ लोगों को बोलने देने की अनुमति का प्रस्ताव रखा लेकिन विपक्षी सदस्य इस पर सहमत नहीं थे. शोरगुल के बीच राज्यसभा की कार्यवाही भी स्थगित कर दी गई. भाजपा नेताओं का आरोप है कि झारखंड में बिना बहुमत के शपथ दिला दी गई. इसके पहले गुरूवार को एनडीए नेताओं की बैठक हुई थी जिसमें झारखंड मुद्दे पर सदन की कार्यवाही नहीं चलने देने का फ़ैसला किया गया. |
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