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शिबू सोरेन बने झारखंड के मुख्यमंत्री | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
झारखंड मुक्ति मोर्चा शिबू सोरेन ने बुधवार को झारखंड के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली. बुधवार को प्रदेश के राज्यपाल सैयद सिब्ते रज़ी ने सोरेन समेत छह अन्य मंत्रियों को शपथ दिलवाई. दुमका से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़कर जीतने वाले जेएमएम नेता स्टीफ़न मरांडी को उप मुख्यमंत्री बनाया गया है. दिलचस्प बात ये है कि मरांडी ने मुख्यमंत्री शिबू सोरेन के बेटे को जेएमएम का टिकट दिए जाने के विरोध में निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में उनके ख़िलाफ़ चुनाव लड़ा और विजयी रहे. राज्यपाल ने शिबू सोरेन को विधानसभा में बहुमत साबित करने के लिए 21 मार्च तक का समय दिया है. संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) की सरकार तमाम राजनीतिक उलझावों के बीच बनी. राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन ने भी सरकार बनाने का दावा पेश किया था और राज्यपाल के फ़ैसले से नाराज़ एनडीए सदस्यों ने न केवल झारखंड बल्कि दिल्ली में संसद में भी जमकर हंगामा किया. हंगामे के कारण बुधवार को संसद के दोनों ही सदनों में काम नहीं हो सका. आमंत्रण बुधवार को राजभवन से जारी एक विज्ञप्ति में कहा गया कि राज्यपाल सैयद सिब्ते रज़ी ने यूपीए के नेता शिबू सोरेन को बुधवार को सरकार बनाने का न्यौता दिया है. राजभवन से जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया, "राज्यपाल ने संविधान के अनुच्छेद 164 (1) के तहत शिबू सोरेन को मुख्यमंत्री नियुक्त किया है. उन्हें विधान सभा में अपना बहुमत साबित करने के लिए 21 मार्च तक का समय दिया गया है." इससे पहले शिबू सोरेन ने पत्रकारों को बताया कि उन्होंने अपने दावे के समर्थन में 42 विधायकों की सूची राज्यपाल को सौंपी थी. झारखंड मुक्ति मोर्चा केंद्र में भी यूपीए का घटक है और शिबू सोरेन केंद्र में भी मंत्री हैं. इससे पहले राज्यपाल एनडीए के सरकार बनाने के दावे से संतुष्ट नहीं थे और उन्होंने बुधवार को सभी 12 निर्दलीय विधायकों को बातचीत के लिए बुलाया था. राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन यानी एनडीए ने भी सरकार बनाने का दावा पेश किया था और शिबू सोरेन को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किए जाने पर एनडीए ख़ासा नाराज़ है.
केंद्र में भी एनडीए ने इस मुद्दे पर संसद की कार्यवाही में बाधा पहुँचाई जिसकी वजह से कार्यवाही को पूरे दिन के लिए स्थगित करना पड़ा. राज्यपाल ने कहा था कि वे किसी भी गठबंधन को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करने का फ़ैसला सभी निर्दलीय विधायकों से मुलाक़ात के बाद ही करेंगे. उनका कहना था,' 'मेरी ज़िम्मेदारी है कि हक़ीकत का पता लगाऊँ और पूरी तरह संतुष्ट होने के बाद ही उस पार्टी को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करूँ जो सदन में बहुमत साबित कर सके.'' दूसरी ओर, सरकार बनाने के लिए आमंत्रित न किए जाने के विरोध में एनडीए नेता राजभवन के बाहर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं. भाजपा के झारखंड के प्रभारी राजनाथ सिंह ने पत्रकारों से कहा कि यह धरना तब तक जारी रहेगा जब तक राज्यपाल एनडीए नेता अर्जुन मुंडा को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित नहीं करते. एनडीए का दावा एनडीए नेताओं ने मंगलवार को राँची में राज्यपाल सैयद सिब्ते रज़ी को 41 विधायकों के समर्थन की सूची सौंपी थी. एनडीए के घटक जनता दल यूनाइटेड के प्रदेश अध्यक्ष इंदर सिंह नामधारी ने बताया कि इनमें से 36 विधायक एनडीए के हैं जबकि पाँच नाम निर्दलीय विधायकों के हैं. राज्यपाल से मिलने के बाद उन्होंने पत्रकारों से कहा, "81 सीटों वाली विधानसभा में बहुमत के लिए 41 विधायकों के समर्थन की आवश्यकता थी और हमने महामहिम राज्यपाल को ये सूची सौंप दी है." |
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