|
झारखंड में राजनीतिक स्थिति उलझी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
झारखंड में चुनाव रुझानों के कारण स्थिति उलझती नज़र आ रही है. वहाँ 81 सदस्यीय विधानसभा में सत्तारूढ़ भाजपा गठबंधन ने 25 सीटें जीत ली हैं और 11 सीटों पर आगे हैं यानी उसकी कुल बढ़त 36 सीटों पर है. जबकि काँग्रेस और झारखंड मुक्ति मोर्चा गठबंधन ने 19 सीटें जीत ली हैं और 7 सीटों पर आगे हैं यानी उन्हें 26 सीटों पर बढ़त हासिल है. लालू यादव की आरजेडी ने वामपंथी दलों के साथ मिलकर झारखंड में चुनाव लड़ा था और आरजेडी ने पांच सीटें जीती हैं और वह तीन सीट पर आगे है यानी उसकी कुल बढ़त है 8 सीटों पर. काँग्रेस और झामुमो ने आपस में सीटों का बंटवारा कर लिया था और आरजेडी-वामपंथी दलों के साथ तालमेल करने से इनकार कर दिया था. लेकिन मतगणना से जो तस्वीर उभर रही है, उसके अनुसार बिना आरजेडी के सहयोग के झामुमो- कांग्रेस की सरकार बनने की संभावना नज़र नहीं आ रही है. सबसे चौंकानेवाली बात यह रही कि झामुमो नेता शिबू सोरेन के बेटे दुर्गा सोरेन हार गए हैं और दूसरे बेटा हेमंत सोरेन बाग़ी नेता स्टेफन मरांडी से पीछे चल रहे हैं. पिछले चुनावों में कांग्रेस, झारखंड मुक्ति मोर्चा(झामुमो), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने एक साथ चुनाव लड़ा था. इस बार वामपंथी दलों को छोड़कर बाकी सभी दलों में बागी और असंतुष्ट उम्मीदवार हैं. नक्सली संगठनों ने चुनाव बहिष्कार की घोषणाएँ थीं लेकिन उनका प्रभाव क्षेत्र सीमित रहा. |
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||