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'चुनाव आयुक्तों पर जातिवाद का आरोप' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
दो चुनाव आयुक्तों पर गंभीर आरोप लगाने वाले प्रशासनिक अधिकारी एलवी सप्तर्षि ने रविवार को कहा कि दोनों आयुक्त जातिगत आधार पर काम करते हैं. वैसे तो उनका आरोप दोनों अधिकारियों पर था लेकिन उनका मुख्य निशाना भावी मुख्य चुनाव आयुक्त बीबी टंडन थे. एलवी सप्तर्षि द्वारा इससे पहले केंद्रीय क़ानून मंत्री को लिखे पत्र में गंभीर आरोप लगाने के बाद रेलमंत्री और छपरा के सांसद लालू प्रसाद यादव ने दोनों आयुक्तों से इस्तीफ़े की मांग की थी. हालाँकि चुनाव आयोग ने इन आरोपों को आधारहीन बताते हुए इस पर प्रतिक्रिया व्यक्त करने से इंकार कर दिया था. उसके बाद एलवी सप्तर्षि ने रविवार को इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में एक और पत्रकार वार्ता की और कहा कि दोनों अधिकारी जातिगत आधार पर निर्णय लेते हैं और उनका चुनाव आयोग में रहना घातक होगा. उन्होंने इस समय बोलने के अपने फ़ैसले की सफाई देते हुए कहा कि हर अधिकारी के जीवन में एक वक्त ऐसा आता है जब वह कुछ बोलना चाहता है. उन्होंने कहा कि जब उन्हें पता चला कि बीबी टंडन मुख्य चुनाव आयुक्त बनने जा रहे हैं और इसके बाद गोपालस्वामी मुख्य चुनाव आयुक्त हो जाएँगे तो उनसे नहीं रहा गया. उन्होंने फिर बताया कि छपरा चुनाव की जाँच रिपोर्ट पढ़ने से पहले ही दोनों अधिकारी तय कर चुके थे कि छपरा का चुनाव रद्द करना है क्योंकि वे लालू प्रसाद यादव को सबक सिखाना चाहते थे. उन्होंने बताया, "बीबी टंडन ने छपरा के पुलिस अधीक्षक के बारे में पूछा और जब उन्हें पता चला कि कोई यादव वहाँ एसपी हैं तो उनका जवाब था, सभी यादव ऐसे ही होते हैं." एलवी सप्तर्षि ने रविवार को उस गोपनीय पत्र की प्रतियाँ भी पत्रकारों को उपलब्ध करवाईं जिसमें क़ानून मंत्री के रुप में अरूण जेटली ने एलवी सप्तर्षि की जमकर तारीफ़ की थी. इसके अलावा उन्होंने चुनाव आयोग के पत्र की भी प्रतियाँ दीं जिसमें उनके काम की तारीफ़ की गई थी. |
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