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चुनाव आयोग का प्रतिक्रिया से इंकार | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
बिहार के छपरा चुनाव को लेकर लगाए गए लालू प्रसाद यादव के आरोपों को आधारहीन बताते हुए चुनाव आयोग ने इस पर प्रतिक्रिया व्यक्त करने से इंकार कर दिया है. एक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी एलवी सप्तर्षि ने केंद्रीय क़ानून मंत्री हंसराज भारद्वाज को पत्र लिखकर दो चुनाव आयुक्तों पर गंभीर आरोप लगाए थे. इन आरोपों पर चुनाव आयोग की एक बैठक हुई और इसके बाद आयोग ने कहा है कि इस आरोप पर टिप्पणी करना आयोग की गरिमा के अनुकूल नहीं है. आयोग ने अपने वक्तव्य में कहा है कि बिहार सहित देश भर में जिस तरह निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनाव हुए हैं उसका पूरे देश ने स्वागत किया है. अपने लिखित बयान में चुनाव आयोग ने कहा है कि जहाँ तक छपरा चुनाव का सवाल है तो आयोग ने सर्वसम्मति से आदेश जारी किए थे. आदेश की प्रति पत्रकारों को देते हुए आयोग ने कहा है कि यह आदेश अपने आपमें सब कुछ समझाने वाला है. 10 मई 2004 के इस आदेश में चुनाव आयोग ने छपरा में 26 अप्रैल 2004 को हुए चुनाव को रद्द करते हुए पूरे क्षेत्र में 31 मई को फिर मतदान करवाने के आदेश दिए थे. आयोग ने दो चुनाव आयुक्तों और आयोग के सलाहकार केजे राव पर लगाए गए व्यक्तिगत आरोपों की निंदा करते हुए कहा है कि यह आपत्तिजनक है. उल्लेखनीय है कि एलवी सप्तर्षि ने दो चुनाव आयुक्तों बीबी टंडन और एन गोपालस्वामी पर आरोप लगाया है कि उन्होंने पिछले साल छपरा लोकसभा चुनाव क्षेत्र का मतदान रद्द करवाने की जी-जान से कोशिश की थी. इसके बाद रेलमंत्री और छपरा के सांसद लालू प्रसाद यादव ने दोनों चुनाव आयुक्तों से इस्तीफ़ा देने की मांग की थी. इनमें से एक चुनाव आयुक्त बीबी टंडन जल्दी ही मुख्य चुनाव आयुक्त बनने वाले हैं. |
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