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'यूपीए सरकार का लेखा-जोखा जारी होगा' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
वामपंथी दलों और संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) की समन्वय समिति की बुधवार को लंबी चली बैठक में यूपीए सरकार की उपलब्धियों का ब्यौरा तैयार करने का फ़ैसला लिया गया. सीपीएम नेता सीताराम येचुरी ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि यूपीए-वामपंथी दलों की समन्वय समिति की बैठक में सरकार की उपलब्धियों को छह हिस्सों में बाँटने का फ़ैसला हुआ. बैठक में तय हुआ कि हर हिस्से पर सहयोगियों से बातचीत की जाएगी. येचुरी ने बताया कि बैठक में न्यूनतम साझा कार्यक्रम के वादों पर चर्चा हुई. उसमें से कितने वादे पूरे हुए हैं, उनकी समीक्षा की गई. लालू यादव से कुछ वामपंथी दलों के इस्तीफ़ा मांगने पर सीताराम येचुरी ने कहा कि एनडीए सरकार ने एक परंपरा कायम की थी कि जब तक कोई शख्स सज़ा न पा जाए, तब तक वह निर्दोष है. यह परंपरा अब भी कायम है. वामपंथी दल सरकार की आर्थिक नीतियों को लेकर नाखुश हैं. वामपंथी दलों को बैंकिंग क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को लेकर भी गंभीर आपत्ति रही है. वामपंथी काम के बदले अनाज कार्यक्रम के क्रियान्वयन को लेकर भी ज़्यादा खुश नहीं हैं. इस बैठक में वित्त मंत्री पी चिदंबरम, गृह मंत्री शिवराज पाटिल और रक्षा मंत्री प्रणव मुखर्जी मौजूद थे. आलोचना इसके पहले वामपंथी नेताओं ने एक साल पूरा होने पर होनेवाले सरकारी आयोजनों में शामिल न होने का फ़ैसला किया था. 22 मई को यूपीए सरकार का एक साल पूरा हो रहा है. सीपीएम पोलित ब्यूरो की बैठक में वामपंथी नेताओं ने सरकार को कई मुद्दों को लेकर आड़े हाथों लिया था. पोलित ब्यूरो के सदस्य एमके पंधे ने पत्रकारों से बातचीत में कहा था कि सरकार ने अनेक विधेयक पेश किए लेकिन उसने आदिवासियों के ज़मीन के अधिकार, रोज़गार गारंटी और महिला आरक्षण जैसे विधेयक पेश नहीं किए. सीपीएम नेता इसको लेकर ख़फा हैं. उनका कहना कि सरकार ने नेपाल को हथियारों की आपूर्ति शुरू कर दी इसको लेकर भी हम सहमत नहीं है. सीपीएम पोलित ब्यूरो ने सरकार के कुछ क़दमों की सराहना भी की. इसमें चीन और पाकिस्तान के साथ संबंधों में सुधारने के प्रयास शामिल हैं. |
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