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मंगलवार, 26 अप्रैल, 2005 को 16:09 GMT तक के समाचार
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इंग्लैंड की परीक्षा कॉपियाँ भारत में
भारत में आउटसोर्सिंग सेंटर
भारत में आउटसोर्सिंग केंद्रों की संख्या बढ़ रही है
यह वाक़ई दिलचस्प बात है कि इंग्लैंड में होने वाली परीक्षाओं की कॉपियाँ अब भारत में जाँची जाएंगी.

दसवीं परीक्षाओं की जाँच की प्रक्रिया के सिलसिले में हज़ारों कॉपियाँ इस साल के अंत में इंग्लैंड से भारत भेजी जाएंगी और यह आउटसोर्सिंग का ही एक तरीक़ा होगा.

आलोचकों का कहना है कि यह आउटसोर्सिंग के ज़रिए ब्रिटेन में नौकरियों को कम करने का ही एक तरीक़ा और इससे परीक्षाओं की जाँच में त्रुटियाँ होंगी और नतीजे आने में देर लगेगी.

जीसीएससी (दसवीं) परीक्षाओं का आयोजन करने वाले बोर्ड एसेसमेंट एंड क्वालिफ़िकेशंस (एक्यूए) का कहना है कि नई व्यवस्था के तहत भारत में कोई नंबर नहीं दिए जाएंगे और उससे परीक्षाओं की जाँच प्रक्रिया और तेज़ हो जाएगी.

यह काम तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई में सुप्रीम नाम की कंपनी को दिया जा रहा है लेकिन उसकी तरफ़ से इस बारे में अभी कोई टिप्पणी नहीं मिली है.

एक शब्द का उत्तर

एक्यूए का कहना है कि नई प्रणाली के तहत इंग्लैंड में जीसीएससी परीक्षाओं की कॉपियों को स्कैन करके कंप्यूटर फ़ाइलें बनाई जाएंगी.

फिर छात्रों की उत्तर कॉपियों को दो वर्गों में बाँटा जाएगा. एक तो लंबे उत्तर वाले सवाल और दूसरे एक शब्द के उत्तर वाले सवाल. ऐसा आमतौर पर फ्रेंच और गणित के परीक्षा-पत्रों में होता है.

भारत में आउटसोर्सिंग सेंटर
ब्रिटेन की बहुत सी कंपनियों के लिए भारत से आउटसोर्सिंग होती है

एक शब्द के उत्तर वाले हिस्से को स्कैन करके ई-मेल के ज़रिए चेन्नई भेजा जाएगा जहाँ भारतीय आउटसोर्सिंग कंपनी में लोग उन शब्दों को टाइप करके वापस इंग्लैंड भेज देंगे और इंग्लैंड में कंप्यूटर के ज़रिए उनकी जाँच करके नंबर दिए जाएंगे.

एक्यूए के एक प्रवक्ता क्लेयर एलिस का कहना था, "भारत में परीक्षा कॉपियों को कोई जाँच नंबर नहीं दिए जाएंगे, वहाँ सिर्फ़ उत्तरों को टाइप करके फ़ाइलें तैयार की जाएंगी. नई प्रणाली न सिर्फ़ क़िफ़ायती है बल्कि समय बचाने वाली और सटीक भी है."

परीक्षा बोर्ड का कहना है कि ग़लतियों को कम से कम करने की कोशिश की जाएगी क्योंकि एक शब्द वाले हर उत्तर को दो अलग-अलग लोग टाइप करेंगे और उनमें अगर कोई भिन्नता होगी तो कंप्यूटर उसका पता लगा लेगा.

लेकिन इंग्लैंड में कैम्पेन फॉर रियल एजूकेशन नाम के एक संगठन के प्रवक्ता निक सीटन का कहना है कि परीक्षाओं की कॉपियों को किसी भी रूप में किसी और देश में भेजना एक ग़लती होगी.

"हाल के वर्षों में इंग्लैंड में परीक्षाओं की जाँच प्रक्रिया में ग़लतियाँ हुई हैं और नतीजे आने में बहुत देरी भी होती रही है. नई प्रणाली से समस्याएँ सुलझने के बजाय और जटिल होंगी."

प्रवक्ता का कहना था, "हमें इंग्लैंड में रहने वाले भारतीय जाँच कर्ताओं से कोई आपत्ति नहीं है, इंग्लैंड में रहने वाले बहुत से भारतीय तो अंग्रेज़ों से भी अच्छी अंग्रेज़ी बोलते हैं लेकिन परीक्षा जाँच की पूरी प्रक्रिया इतनी जटिल है कि इसमें बड़ी ग़लतियाँ हो सकती हैं."

लेकिन एक्यूए की प्रवक्ता क्लेयर एलिस का कहना था कि जनवरी में फ्रेंच भाषा का एक पर्चा विदेशों से इसी तरह से तैयार कराकर मंगाया गया था और उसकी जाँच प्रक्रिया पूरी तरह से सही थी और समय से पहले नतीजे भी मिल गए थे.

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