क्या पुराने गिले शिकवे छोड़कर मालदीव और भारत फिर से क़रीब आ रहे हैं?

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भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर की मालदीव की तीन दिनों की यात्रा समाप्त हो गई है.
मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज़्ज़ू की चीन से नज़दीकी ज़ाहिर होने के बाद यह भारत के किसी बड़े मंत्री की पहली मालदीव यात्रा थी.
भारत और मालदीव के बीच इसी साल की शुरुआत में मालदीव और लक्षद्वीप की तुलना के नाम पर बड़ा विवाद भी हुआ था. यह विवाद पीएम मोदी की एक तस्वीर पर मालदीव के मंत्रियों की टिप्पणी के बाद शुरू हुआ था.
एस जयशंकर ने अपनी इस यात्रा में मालदीव में यूपीआई से पेमेंट की सुविधा शुरू करने के लिए समझौते पर हस्ताक्षर किया है.
इसके अलावा दोनों देशों के बीच आपसी संबंध को मज़बूत करने के लिए कई मुद्दों पर बातचीत हुई है.

राष्ट्रपति मुइज़्ज़ू ने क्या कहा
विदेश मंत्री एस जयशंकर से मुलाक़ात के बाद मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज़्ज़ू ने एक्स पर पोस्ट किया है.
मुइज़्ज़ू ने लिखा है कि मालदीव के 28 द्वीपों में पानी और नाले से जुड़ी परियोजनाओं को आधिकारिक तौर पर सौंपे जाने के मौक़े पर डॉक्टर एस जयशंकर से मिलकर ख़ुशी हुई.
उन्होंने लिखा है, "हमेशा मालदीव की मदद करने के लिए मैं भारत सरकार और ख़ासतौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का धन्यवाद करता हूं."
उन्होंने कहा है कि हमारी साझेदारी से दोनों देशों के बीच सुरक्षा, विकास और सांस्कृतिक संबंध और मज़बूत होंगे. हम इस क्षेत्र में ज़्यादा समृद्ध भविष्य का निर्माण करेंगे.
मोहम्मद मुइज़्ज़ू ने अपने सोशल मीडिया पर एस जयशंकर के साथ मुलाक़ात की कुछ तस्वीरें भी पोस्ट की हैं.
ख़बरों के मुताबिक़ मोहम्मद मुइज़्ज़ू ने भारत को अपने सबसे क़रीबी सहयोगियों में से एक बताया है.
वहीं भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भी मालदीव के साथ संबंधों को ख़ास बताया है.

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एस जयशंकर की इस यात्रा पर काफ़ी लोगों की नज़र थी.
चीन के सरकारी अख़बार ग्लोबल टाइम्स ने लिखा है, "चीनी विशेषज्ञों ने रविवार को कहा है कि चीन मालदीव के साथ बहुत ख़ास संबंध या सहयोग की इच्छा नहीं रखता है, जबकि भारत इस इलाक़े में अपने प्रभुत्व के लिए चीन को एक डर के तौर पर पेश करता है."
एस जयशंकर की इस यात्रा पर मीडिया संस्थान ‘सन’ ने लिखा है कि एस जयशंकर की यात्रा के बाद दोनों देशों के बीच आपसी संबंध बेहतर हुए हैं.
सन के मुताबिक़, “एस जयशंकर ने कहा है कि भारत ‘नेबरहुड फ़र्स्ट’ नीति के तहत द्वीपों से बने मालदीव की प्रगति को प्राथमिकता देगा.”
एस जयशंकर की इस यात्रा पर पीएसएम न्यूज़ ने भारतीय विदेश मंत्री के बयान को छापा है. अख़बार के मुताबिक़ एस जयशंकर ने कहा है, “भारत मालदीव में मानव संसाधन और बुनियादी ढांचे के विकास को उच्च प्राथमिकता में रखता है.”
वहीं एक अन्य मीडिया 'एडिशन' के मुताबिक़ जयशंकर ने अपनी इस यात्रा में सरकारी अधिकारियों के अलावा विपक्षी दल एमडीपी के अध्यक्ष और मालदीव के पूर्व विदेश मंत्री अब्दुल्ला शाहिद से मुलाक़ात की.
अंग्रेज़ी अख़बार हिन्दुस्तान टाइम्स के मुताबिक़ अब्दुल्ला शाहिद ने भारत और मालदीव के बीच बीते समय में हुई घटना को लेकर खेद जताया है और भारत को लेकर मालदीव की मुइज़्ज़ू की नीति में आए बदलाव का स्वागत किया है.

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विवाद कैसे शुरू हुआ था
इसी साल 4 जनवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लक्षद्वीप की तस्वीरें शेयर कर लोगों ने वहाँ सैर सपाटे के लिए पहुँचने की अपील की थी.
इस अपील के बाद मालदीव के कुछ मंत्रियों की मोदी और भारत विरोधी टिप्पणी की थी. इससे दोनों देशों के बीच एक नया विवाद पैदा खड़ा हो गया था.
हालांकि मालदीव सरकार ने मामले को ठंडा करने के लिए आपत्तिजनक टिप्पणी करने वाले मंत्रियों को निलंबित कर दिया और कहा कि इस तरह के बयानों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.
भारतीय विदेश मंत्रालय ने भारत में मालदीव के हाई कमिश्नर इब्राहिम शाहिब को बुला कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर सोशल मीडिया में आपत्तिजनक टिप्पणी पर गंभीर चिंता जताई थी.
मोहम्मद मुइज़्ज़ू पिछले साल नवंबर में मालदीव के राष्ट्रपति बने थे, उन्हें चीन के साथ घनिष्ठ संबंधों के लिए जाना जाता रहा है.
मुइज़्ज़ू ने अपने चुनावी अभियान में उस समय की मालदीव सरकार पर आरोप लगाया था कि देश के नीतिगत फ़ैसलों में भारत के दख़ल से 'मालदीव की संप्रभुता और आज़ादी' कमज़ोर पड़ी है.
मोहम्मद मुइज़्ज़ू ने अपने चुनाव अभियान में ‘इंडिया आउट’ यानी भारत को देश से बाहर करने का नारा दिया था. मुइज़्ज़ू चीन के साथ बेहतर रिश्तों के पक्षधर हैं.

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मोहम्मद मुइज़्ज़ू राष्ट्रपति बनने के बाद सबसे पहले 27 नवंबर को तुर्की के दौरे पर गए थे. फिर वो अपनी पत्नी के साथ चीन के दौरे पर भी गए थे.
एक हज़ार से अधिक द्वीपों वाले मालदीव की आबादी सिर्फ़ 5 लाख 57 हज़ार के आसपास है. लेकिन यह देश भारत और चीन दोनों के लिहाज़ से अहम है.
मालदीव और भारत के बीच रिश्ते काफ़ी अच्छे रहे हैं और कई मौक़ों पर भारत ने मालदीव की मदद भी की है. मालदीव के नए राष्ट्रपति अक्सर अपना पहला विदेश दौरा भारत का करते थे.
मुइज्ज़ू के राष्ट्रपति बनने और फिर भारत के साथ विवाद शुरू होने के बाद दोनों देशों के आपसी संबंध को लेकर सवाल भी खड़े हो गए थे. लेकिन भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर की ताज़ा यात्रा दोनों देशों के आपसी संबंधों के लिहाज़ से अहम हो सकता है.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित

















