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निकी हेली बनाम डोनाल्ड ट्रंप: रिपब्लिकन पार्टी की उम्मीदवारी में अब सामने-सामने की टक्कर
- Author, एंथनी ज़र्चर
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
अमेरिका में रिपब्लिकन पार्टी के राष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी के लिए भारतीय मूल की निकी हेली और डोनाल्ड ट्रंप में अब सीधी टक्कर हो रही है.
रिपब्लिकन पार्टी की ओर से अमेरिकी राष्ट्रपति की रेस में शामिल होने के लिए अब मैदान में सिर्फ़ दो उम्मीदवार बचे हैं.
पहला नाम तो पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का है. दूसरा नाम है भारतीय मूल की निकी हेली का.
निकी हेली पहले ही कह चुकी हैं कि वो इसी अवसर के इंतज़ार में थी, जब उनकी सीधी टक्कर डोनाल्ड ट्रंप से होगी.
अपने समर्थकों को लिखी एक ईमेल में निकी हेली लिखती हैं, "रिपब्लिकन पार्टी की उम्मीदवारी हासिल करने की रेस में 14 लोग थे. लेकिन आज ये आधिकारिक तौर पर दो लोगों के बीच रेस बन चुकी है.”
हेली और ट्रंप के बीच अब ये जंग कई अमेरिकी राज्यों में लड़ी जाएगी. ये लड़ाई शायद वैसी न हो जैसी कि हेली को लग रही है. क्योंकि इस रेस में 14 लोग थे जो एक-एक करके पीछे हटते गए हैं और इन सबने अपना समर्थन डोनाल्ड ट्रंप को ही दिया है.
आयोवा में ट्रंप को तो जीत मिली ही लेकिन दूसरे स्थान पर डिसेंटिस रहे और निकी हेली तीसरे स्थान पर रहीं. अब मंगलवार को न्यू हैंपशर में मतदान होगा.
डिसेंटिस के समर्थक किसके साथ?
ट्रंप को आयोवा में मिली जीत के बाद विवेक रामास्वामी ने भी खुद को इस रेस अलग कर लिया था.
उन्होंने भी ट्रंप को समर्थन की घोषणा की थी. अब डिसेंटिस ने भी दौड़ से अलग होना स्वीकार कर लिया है. और रामास्वामी की ही तरह डिसेंटिस ने भी ट्रंप को समर्थन देने का एलान किया है.
फ़्लोरिडा के गवर्नर डिसेंटिस ने अपनी अधिकतर ऊर्जा निकी हेली की आलोचना के लिए बचाकर रखी थी.
डिसेंटिस ने संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका की पूर्व राजदूत निकी हेली को ‘पुरानी रिपब्लिकन पार्टी का नुमाइंदा बताते हुए कॉर्पोरेट वर्ल्ड का एक रूप बताया.
ये हमला निकी हेली की उस इमेज़ पर था जिसमें उन्हें अभिजात्य वर्ग को पसंद करने वाला बताया जाता रहा है.
आयोवा के बाद डिसेंटिस और उनकी टीम को रेस से अलग होने का फ़ैसला करने में छह दिन लगे.
लेकिन जिस वक़्त और जिस हिसाब से उन्होंने रेस से हटने का निर्णय लिया है उसने लगभग ट्रंप की जीत को पक्का कर दिया है.
डिसेंटिस के समर्थकों के बीच हुए सर्वेक्षणों में दूसरी पसंद के तौर पर ट्रंप को रखा गया है.
इसके बाद से ही सोचा जा रहा है कि अगर डिसेंटिस हटे तो इसका सबसे अधिक फ़ायदा ट्रंप को ही होगा.
इस रविवार को सीएनएन/यूनिवर्सिटी ऑफ़ हैंपशर के सर्वे में डिसेंटिस के 62% समर्थकों ने ट्रंप को अपनी दूसरी पसंद बताया. निकी हेली को दूसरी पसंद बताने वाले महज़ 30% ही थे.
साउथ कैरोलिना की गर्वनर रही निकी हेली के लिए ये अच्छी ख़बर नहीं है. हेली कई महीनों से न्यू हैंपशर जीतने पर अपनी ऊर्जा ख़र्च कर रही हैं.
उन्हें लगता है कि यहां अगर वो जीतती हैं तो ट्रंप के ख़िलाफ़ उनके अभियान में एक गति आएगी.
सिंद्धात के स्तर पर उनकी रणनीति मज़बूत दिख रही है. न्यू हैंपशर में उदारवादी मतदाता ट्रंप के बजाय उनका साथ दे सकते है. इनमें विशेषकर वो लोग हैं जो ट्रंप के लोकलुभावन वादों को सही मानते हैं.
इस राज्य में 37% स्नातक हैं और ये लोग हेली के समर्थक माने जाते हैं.
हेली के समर्थकों में बीते कुछ महीनों में बढ़त देखी जा रही है. वे ट्रंप के विरोधियों के बीच ख़ासी लोकप्रिय होती जा रही हैं.
ट्रंप के विरोधी बंटे
इस बात में कोई संदेह नहीं है कि डेसेंटिस की तुलना में निकी हेली में अधिक स्किल्ड हैं और हेली ने रेस में यहाँ तक पहुँचने के लिए जो रास्ता चुना है वो ट्रंप के विरोध का ही है.
हेली के भाषणों और नीतियों के आधार पर निकी हेली के कैंपेन को ट्रंप के दौर से पहले वाली रिपब्लिकन पार्टी से जोड़कर देखा जा रहा है.
उनके संदेशों में अब हालात से समझौता करने की बातें नहीं होती हैं. और वे यूक्रेन युद्ध में अमेरिकी भागेदारी बढ़ाने का भी समर्थन करती हैं.
अगर वो न्यू हैंपशर में ट्रंप को न हरा पाईं तो ये समझना मुश्किल है कि वे कहां बढ़त बनाएंगी.
अपने राज्य साउथ कैरोलिना में भी वो कमज़ोर दिख रही हैं क्योंकि वहां डोनाल्ड ट्रंप ख़ासे लोकप्रिय हैं.
वहां ट्रंप को आधे से कहीं अधिक रिपब्लिकन पार्टी के पदाधिकारियों का समर्थन हासिल है.
रिपब्लिकन पार्टी के ट्रंप विरोधियों का हमेशा से ये कहना रहा है कि पार्टी के भीतर अधिकतर लोग उन्हें दोबारा चुनना नहीं चाहते. लेकिन ट्रंप को चुनौती देने वाले स्वयं बंटे हुए थे.
जानकार कहते हैं कि अगर वो ट्रंप के ख़िलाफ़ एक उम्मीदवार का साथ दे पाते तो जीत उनके हाथ में होती.
मंगलवार को न्यू हैंपशर में इस सिंद्धात का इम्तिहान होगा.
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