एशियन चैंपियंस ट्रॉफी हॉकी में भारत से हारकर भी पाकिस्तान की इन बातों के लिए हो रही तारीफ़

इमेज स्रोत, Getty Images
- Author, मनोज चतुर्वेदी
- पदनाम, वरिष्ठ खेल पत्रकार, बीबीसी हिंदी के लिए
भारत ने एशियाई चैंपियंस ट्रॉफी हॉकी में अपने दबदबे को बनाए रखकर लीग चरण में टॉप पर रहकर सेमीफ़ाइनल में स्थान बना लिया.
भारत ने पाकिस्तान को 4-0 से हराकर लीग में ख़ुद को अजेय बनाया रखा.
भारत और पाकिस्तान के मुक़ाबलों के बारे में कहा जाता है कि यह भावनाओं में बहकर खेला जाता है. मुक़ाबले में सम्मान सबसे अहम होता है, इसलिए अनुभव का अंतर कोई मायने नहीं रखता है.
पाकिस्तान ने शानदार शुरुआत करके इस बात को सही साबित कर दिया. लेकिन पाकिस्तान इस हार से सेमीफ़ाइनल दौड़ से बाहर हो गया.
भारत के अलावा मलेशिया, जापान और दक्षिण कोरिया ने सेमीफ़ाइनल में स्थान बनाया है.
सेमीफ़ाइनल में अब भारत का जापान से और मलेशिया का दक्षिण कोरिया से मुक़ाबला होगा.
भारत लीग चरण में जापान से ड्रॉ खेला था, इसलिए उसे सतर्क रहना होगा.

इमेज स्रोत, Getty Images
अनुभव के अंतर के कोई मायने नहीं
भारतीय गोलकीपर पीआर श्रीजेश ने मैच से एक दिन पहले कहा था कि पाकिस्तान की टीम कम अनुभव के साथ आई है पर जब टीमें राष्ट्र के सम्मान के लिए खेलती हैं, तो उनके बीच अनुभव के अंतर का कोई मायने नहीं रह जाता है.
यहां तक अनुभव की बात है तो पाकिस्तान की टीम तीन ऐसे खिलाड़ियों के साथ आई, जिनके अंतरराष्ट्रीय करियर की शुरुआत इस चैंपियनशिप से हुई है.
ये खिलाड़ी हैं- अब्दुल रहमान, जकारिया हयात और मुहम्मद अम्माद. वहीं भारतीय टीम के सबसे कम अनुभवी कार्ति सेलवम हैं, जो इस चैंपियनशिप में आने से पहले 16 अंतरराष्ट्रीय मैच खेल चुके थे.
पर पाकिस्तान ने जिस तेज़ी से खेल की शुरुआत की, उसे हर पाकिस्तानी हॉकी प्रेमी हमेशा याद रखेगा. पाकिस्तान के खिलाड़ियों ने तेज़ रफ्तार खेल से पहले क्वॉर्टर में भारतीय टीम को ज्यादातर समय जमने का मौक़ा ही नहीं दिया. इस दौरान लग रहा था कि पाकिस्तान टीम में भारत से खेलने के नाम पर ऊर्जा भर दी है.
पाकिस्तान के कोच मुहम्मद सकलेन ने मैच से पहले कहा भी था कि हॉकी धड़कनों को काबू रखने वाला गेम है.
उन्होंने कहा था, ''यह मुक़ाबला हमारे लिए करो या मरो वाला है, इसलिए हम अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करेंगे. भारत भले ही दुनिया की चौथी रैंकिंग की टीम है पर उसके खेल में भी दरारें हैं और हम इनका उपयोग करेंगे.''
सही मायनों में पाकिस्तान टीम इसका फ़ायदा उठाती भी नज़र आई.'

इमेज स्रोत, Getty Images
तनाव में कमी
लगभग एक दशक पहले तक जब भारत और पाकिस्तान की टीमें खेलने उतरतीं थीं, तो दोनों देशों के हॉकी प्रेमियों के साथ ही दोनों टीमों के खिलाड़ियों पर भी जबर्दस्त तनाव देखने को मिलता था. इस कारण कई बार खेल रफ भी हो जाता था.
पर इस मुक़ाबले में खिलाड़ियों के बीच इस तरह का तनाव देखने को नहीं मिला. पहले हाफ की सीटी बजने के बाद भारत के पूर्व कप्तान मनप्रीत सिंह पाकिस्तान के अब्दुल राना की पीठ थप थपाकर अच्छा खेलने के लिए बधाई देते दिखे. एक दशक पहले इस तरह का मैच में सीन दिखने की कल्पना तक नहीं की जा सकती थी.

इमेज स्रोत, Getty Images
पेनल्टी कॉर्नर बने प्रमुख अंतर
पाकिस्तान ने वैसे तो भारतीय टीम का हमलों के मामले में बराबरी से टक्कर देने का प्रयास किया पर पेनल्टी कॉर्नर में भारतीय बेहतरी का वह मुकाबला करने में सफल नहीं हो सकी.
हरमनप्रीत सिंह ने पहले दो क्वॉर्टर में एक-एक पेनल्टी कॉर्नर को गोल में बदलकर भारत की बढ़त को 2-0 कर दिया. इन दो गोलों से हरमनप्रीत इस चैंपियनशिप के लीग चरण में सात गोल जमाकर नंबर एक पर बने हुए हैं.
हरमनप्रीत चौथे क्वॉर्टर में गोल जमाकर हैट्रिक बनाते दिखे. लेकिन पाकिस्तान टीम ने खतरनाक ढंग से गेंद उछलने की वजह से गोल नकारने के लिए रेफरल लिया और गोल नकार दिया गया और हरमनप्रीत सिंह हैट्रिक से वंचित हो गए.
तीसरे क्वॉर्टर में हरमनप्रीत सिंह की अनुपस्थिति में जुगराज सिंह ने नपे-तुले ड्रेग फ्लिक से गोल करके भारत को 3-0 से आगे कर दिया.
जुगराज के इस गोल से यही साबित हुआ कि भारत एक से ज्यादा ड्रेग फ्लिकर तैयार करने में सफल रहा है. इससे हरमनप्रीत के मैदान में रहने या नहीं रहने का फर्क नहीं पड़ता है.

इमेज स्रोत, Getty Images
फिटनेस के मामले में पाकिस्तान पिछड़ा
युवा खिलाड़ियों वाली पाकिस्तान टीम ने भारत पर दवाब बनाने के लिए पहले दो क्वॉर्टरों में पूरी जान लगा दी. इसका नतीजा यह हुआ कि वह आख़िरी दो क्वॉर्टरों में पहले दो क्वॉर्टरों जैसी तेजी नहीं बना सकी.
इसके परिणाम स्वरूप उनके हमलों में कमी भी आने लगी और हमलों में पैनेपन की कमी भी दिखने लगी.
इसके अलावा पहले दो क्वॉर्टरों में हरमप्रीत के दो गोल पड़ जाने से भी टीम के खेल में थोड़ा बिखराव दिखने लगा.
भारत ने दूसरे क्वॉर्टर से खेल पर दबदबा बनाने के बाद तालमेल बनते ही भारतीय फारवर्ड लगातर हमले बनाकर सामने वाली टीम पर दवाब बनाने में सफल रहे.
भारतीय उपमहाद्वीप की टीमों में यह कमी रही है कि वह जब पिछड़ जाती हैं तो उसके खिलाड़ी अकेले ही गेंद ले जाकर गोल जमाने का प्रयास करते हैं और पाकिस्तान भी आख़िरी क्वॉर्टर में किसी तरह एक गोल जमाने के लिए इस तरह का ही प्रयास करती नज़र आया.

इमेज स्रोत, Getty Images
भारत ने बदली स्टाइल
भारत की बात करें तो क्रेग फुलटोन के मुख्य कोच बनने के बाद से भारतीय टीम के खेलने की स्टाइल में बदलाव आया है.
ग्राहम रीड के कोच रहते भारतीय टीम आक्रामक अंदाज़ में खेलने के लिए जानी जाती थी. पर फुलटोन ने यूरोपीय टीमों की तरह पहले डिफेंस करने और फिर एकाएक हमले बनाने पर ज़ोर दिया. इस कारण भारतीय टीम के डिफेंस में मज़बूती भी दिखने लगी.
इसके लिए मनप्रीत को डिफेंसिव मिडफील्डर के तौर पर खिलाया जाने लगा. इसका फ़ायदा भारत को इस मैच में भी मिला और पाकिस्तान एक भी गोल नहीं जमा सकी.
पाकिस्तान के ख़िलाफ़ भारत ने हमलावर रुख़ अपनाकर खेल पर अपना दबदबा बनाया. यह रणनीति इस मैच में किसी हद तक सही भी थी. भारत यदि पहले डिफेंस पर ज़ोर देता तो पाकिस्तान ने जिस हमलावर अंदाज़ में खेल की शुरुआत की थी, भारत पिछड़कर दवाब में भी आ सकता था.
भारत की मैच में दबदबे की तस्वीर विजयी स्कोर से नहीं मिलती है. भारत ने मिले मौक़ों में से आधों का भी फ़ायदा उठाया लिया होता तो आधा दर्जन गोलों से जीत मिलती.
ये भी पढ़ें-
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)












