बिहार में अंतरजातीय प्रेम 'विवाह' और तीन लोगों की हत्या का मामला गहराया- प्रेस रिव्यू

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बिहार में एक कथित प्रेम 'विवाह' जानलेवा बन गया. अपनी बेटी और दो बेटों की हत्या के बाद द्रौपदी देवी चाहती हैं कि लड़के को फांसी की सज़ा मिले.
पुलिस का कहना है कि जिस लड़के ने द्रौपदी देवी की बेटी और दो बेटों को गोली मारी उसका नाम आशीष चौधरी है और उम्र 25 साल है. पुलिस ने बताया कि लड़का दलित है. यह मामला अंतरजातीय प्रेम विवाह का है और इसका अंत ख़ून से हुआ.
अंग्रेज़ी अख़बार द हिन्दू ने इस मामले पर विस्तार से एक रिपोर्ट छापी है. आज की प्रेस रिव्यू में पहली ख़बर के रूप में इसी रिपोर्ट को पढ़िए.
पुलिस का कहना है कि बिहार के लखीसराय ज़िले में छठ के दिन 25 साल के दलित युवक आशीष चौधरी ने अपनी कथित प्रेमिका और उसके दो भाइयों की गोली मारकर हत्या कर दी
'द हिंदू' ने पुलिस के हवाले से लिखा है कि आशीष चौधरी ने छठ पूजा के आख़िरी दिन सुबह अर्ध्य देकर आ रहे शशि झा के परिवार के लोगों पर नौ मिमी. की पिस्तौल से गोली चला दी. चौधरी के दोनों हाथों में पिस्तौल थी.
दलित युवक और ब्राह्मण लड़की की शादी का मामला

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पुलिस ने बताया कि आशीष चौधरी शशि भूषण झा की बेटी से प्रेम करते थे और उससे शादी कर चुके थे. वो थोड़े दिनों तक पटना में रहे थे.
पुलिस ने बताया, परिवार वालों ने लड़की को घर बुला लिया था. पुलिस का कहना है, ''चौधरी इस बात से नाराज थे कि उनकी 'पत्नी' का किसी और प्रेम संबंध चल रहा है. ये बात उन्हें खटक रही थी. इसी ग़ुस्से में उन्होंने युवती की हत्या कर दी.''
हालांकि युवती की मां द्रौपदी देवी का कहना है कि उनकी बेटी की चौधरी से शादी नहीं हुई थी. युवती की किसी और से भी शादी नहीं हुई थी. पुलिस झूठ बोल रही है.
द्रौपदी देवी ने 'द हिंदू' से कहा, ''आशीष चौधरी दरअसल हमारे और अपने घर के बीच की एक कट्ठा ज़मीन हथियाना चाहते थे.''
द्रौपदी देवी का परिवार लखीसराय के पंजाबी मोहल्ला में रहता है. यहां ज्यादातर अनुसूचित जाति और मुस्लिम समुदाय के लोग रहते हैं.
युवती के पिता शशिभूषण झा ( 60) और उनकी दो बहुएं भी गोली लगने से बुरी तरह घायल हो गए हैं और अब भी उनका इलाज पटना मेडिकल कॉलेज के आईसीयू में हो रहा है. झा के दोनों के दोनों बेटे राजनंदन झा और चंदन झा की गोली लगने से मौत हो गई.
अभियुक्त आशीष चौधरी प्रॉपर्टी डीलर हैं. शशिभूषण झा और उनके परिवार की आय का स्रोत सिर्फ एक मकान है,जिसके कई कमरों में किरायेदार रहते हैं.
चौधरी के पड़ोसी का कहना है कि शशिभूषण झा की बेटी और दलित युवक आशीष चौधरी के कथित प्रेम प्रसंग को लेकर ब्राह्मण समुदाय ख़ुश नहीं था.
उन्होंने द हिंदू से कहा,'' इस बात की बड़ी चर्चा थी कि दोनों ने अपने-अपने परिवारों को बताए बगैर शादी कर ली है.''
पुलिस का बयान और 15 पेज की चिट्ठी

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मुंगेर रेंज के डीआईजी संजय कुमार ( लखीसराय इसी रेंज के तहत आता है) ने 'द हिंदू' से कहा,''दोनों ने चार साल पहले पटना के एक मंदिर में शादी कर ली थी और वो नाला रोड में साथ रहते थे.''
संजय कुमार ने कहा, ''हमारे पास इस बात के सुबूत हैं कि दोनों ने शादी की थी. हमने अभियुक्त के घर से पति-पत्नी के तौर पर खिंची गई उनकी सैकड़ों तस्वीरें बरामद की हैं. कई तस्वीरों में दोनों काफ़ी ख़ुश दिख रहे हैं. युवती ने सिंदूर लगा रखा है. और उसके गले में मंगलसूत्र भी है. एक तस्वीर में युवती और चौधरी की मां भी हैं.''
अभियुक्त आशीष चौधरी ने अपने कथित फ़ेसबुक पेज पर भी ख़ुद को शादी-शुदा बताया है. इसमें उन्होंने ख़ुद को आशीष राज बताया है. इसमें जनवरी 2022 की एक तस्वीर है,जिसमें वो सिंदूर और मंगल सूत्र पहने एक महिला के साथ दिख रहे हैं.
अब तक इस मामले में उमेश साव और समीर राज को गिरफ़्तार किया गया है. बताया जा रहा है कि प्रॉपर्टी डीलर उमेश साव ने ही आशीष चौधरी को पिस्तौल मुहैया कराई थी. जबकि दूसरे शख्स समीर राज ने छठ घाट से आते झा परिवार का लाइव लोकेशन मुहैया कराया था.
पुलिस ने हत्याकांड को अंजाम दिए जाने के एक दिन पहले चौधरी का 15 पेज का लिखा नोट भी बरामद किया है. इसमें उसने लिखा है कि इस घटना के लिए उसे ही ज़िम्मेदार माना जाए. उनके परिवार के किसी और सदस्य को इसके लिए दोषी न ठहराया जाए.
चिट्ठी के पेज नंबर चार में लिखा है कि झा का परिवार उन्हें घर बुला रहा था ताकि समाज के लोगों के सामने उनकी शादी की जा सके. युवती के पिता को लग रहा था कि इससे उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा बहाल हो जाएगी.
इस नोट के मुताबिक़ शशि झा चाह रहे थे कि जब तक उनके समाज के लोगों के बीच शादी नहीं हो जाती तब तक बच्चे न पैदा करें. इससे उनकी प्रतिष्ठा को धक्का लगेगा.
पुलिस के मुताबिक़ पेज नंबर सात पर लिखा है कि एक दिन उन्हें एक अनजान मोबाइल नंबर से कुछ तस्वीरें मिलीं. ये तस्वीरें उनकी 'पत्नी' की थीं, जिनमें वो किसी और पुरुष के साथ दिख रही थीं.
जब उन्होंने उस नंबर पर फोन किया तो किसी सुमित कुमार ने उठाया, जो ये दावा कर रहे थे कि आशीष चौधरी की 'पत्नी' का उनसे तीन साल से प्रेम प्रसंग चल रहा है. जबकि वहां से 100 किलोमीटर दूर सुमित भागलपुर में रहने वाले कुमार का कहना है कि उनका चौधरी की पत्नी से कोई प्रेम प्रसंग नहीं है. वो सिर्फ अच्छे दोस्त हैं.
चौधरी ने लिखा है कि एक दिन उनकी 'पत्नी' घर आईं और जातिसूचक गालियां देने लगीं. इन दो घटनाओं से उनका ग़ुस्सा भड़क गया और उन्होंने शशि झा के परिवार पर हमला करने का फ़ैसला कर लिया.
बिहार में अंतरजातीय विवाह को प्रोत्साहन

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बिहार सरकार ने अंतरजातीय शादी को बढ़ावा देने के लिए एक स्कीम लॉन्च की है.
सरकार बिहार अंतरजातीय विवाह प्रोत्साहन योजना के तहत शादी करने वाले नवविवाहित जोड़े को ज़रूरी दस्तावेज जमा करने ढाई लाख रुपये की मदद देती है.
बहरहाल, लखीसराय के इस हत्याकांड के बाद स्थानीय बीजेपी नेताओं ने थाने के बाहर धरना देकर चौधरी को गिरफ़्तार करने की मांग की थी. इसके बाद चौधरी के ख़िलाफ़ एफआईआर दर्ज की गई.
बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता विजय कुमार सिन्हा ने लखीसराय जाकर युवती की मां द्रौपदी देवी से मुलाकात और फिर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस भी की.
उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार की सरकार में बिहार में अपराधी खुलेआम घूम रहे हैं.
बीजेपी विधायक श्रेयसी सिंह ने कहा कि चौधरी और युवती की निजी तस्वीरों को मीडिया को नहीं दिखाना चाहिए था. राष्ट्रीय महिला आयोग को इस मामले का संज्ञान लेना चाहिए था.
डीप फेक पर लगाम के लिए क़ानून की तैयारी

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केंद्र सरकार डीप फेक और कथित सिंथेटिक वीडियो पर लगाम लगाने के लिए जल्द ही नए नियम ला सकती है.
गुरुवार को आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने सोशल मीडिया, टेक्नोलॉजी कंपनियों, इंडस्ट्री संगठन और एकेडेमिशियनों के साथ एक बैठक में इसकी जानकारी दी.
'हिंदुस्तान टाइम्स' की ख़बर के मुताबिक़ नियम कैसे होंगे ये अभी तय नहीं हुए हैं लेकिन इसे कानून का रूप भी दिया जा सकता है.
वैष्णव ने बताया कि डीप फेक को रोकने के लिए मौजूदा आईटी नियमों में ही संशोधन किए जाएंगे या फिर नया कानून बनाया जाएगा.
'हिंदुस्तान टाइम्स' ने वैष्णव के हवाले से लिखा है कि नए नियमों का ड्राफ्ट गुरुवार से तैयार होना शुरू हो गया है. जल्द ही डीपफेक के खिलाफ नए नियम बना लिए जाएंगे.
वैष्णव ने डीप फेक को लोकतंत्र के लिए नया ख़तरा करार दिया और कहा कि कहा इससे समाज इसकी संस्थाओं में लोगों का विश्वास कम हो जाता है.
सोशल मीडिया का इस्तेमाल डीप फेक को फैलाने में काफी बड़ी भूमिका बनाता है. बगैर किसी चेकिंग के ऐसे वीडियो अपलोड होने के कुछ ही मिनटों के भीतर इंटरनेट पर वायरल हो जाते हैं.
सरकार ने डीप फेक के ख़िलाफ़ नए नियम बनाने की पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से डीप फेक पर चिंता जताने के कुछ ही दिन बाद किया है.
नए नियम के चार हिस्से होंगे. इनमें डीप फेक का पता लगाना, उसकी रिपोर्टिंग और इस बारे में जानकारी देने और इसे रोकने जुड़े नियम शामिल होंगे. ऐसे नियम बनाए जाएंगे जिससे डीप फेक वायरल न किए जा सकें.
सरकार ने सोशल मीडिया कंपनियों को डीपफेक रोकने की योजना जमा करने को कहा है. डीप फेक को रोकने से जुड़ी इस बैठक में गूगल, यूट्यूब, एक्स (पहले ट्विटर), माइक्रोसॉफ्ट, अमेजन वेब सर्विसेज, स्नैप, शेयरचैट, कु, टेलीग्राम और इंडस्ट्री संगठन नैसकॉम के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया.
राजस्थान ने छोटी पार्टियों को लुभाने में लगे कांग्रेस और बीजेपी

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राजस्थान चुनाव में बीजेपी और कांग्रेस को अब छोटी पार्टियों ने लुभाने की कोशिश तेज कर दी.
या तो ये इन उम्मीदवारों को अपने दल में शामिल करने की कोशिश में लगी हैं और फिर अपने उम्मीदवार के समर्थन में इन्हें बिठाने की कोशिश कर रही हैं.
'टाइम्स ऑफ इंडिया' की एक रिपोर्ट के मुताबिक़ जयपुर के हवा महल और आदर्शनगर में दो उम्मीदवारों की कांग्रेस ने घर वापसी में कामयाबी हासिल कर ली है.
कांग्रेस से बगावत कर पप्पू कुरैशी ने आम आदमी पार्टी का दामन थाम लिया था और उसके टिकट पर हवा महल से चुनाव लड़ रहे थे. वहीं आदर्श नगर से उमर दराज चुनाव लड़ रहे थे.
वो भी कांग्रेस से आम आदमी पार्टी में चले गए थे. लेकिन दोनों को समझा-बुझा कर दोबारा कांग्रेस में ले आया गया. आदर्शनगर के बीएसपी उम्मीदवार हसन रज़ा ने भी कांग्रेस को समर्थन दे दिया है.
बीजेपी ने भी विद्याधर नगर में स्थानीय परिवर्तन पार्टी के उम्मीदवार को बिठाने में सफलता हासिल की है. यहां बीजेपी की उम्मीदवार दीया कुमारी चुनाव लड़ रही हैं. यहां परिवर्तन पार्टी के उम्मीदवार राजपाल शक्तावत ने अपनी उम्मीदवारी वापस ले कर दीया कुमारी का समर्थन कर दिया है.
जयपुर की हवा महल सीट पर बीएसपी की तरुणा पराशर अपनी उम्मीदवारी वापस लेकर बीजेपी में शामिल हो गई हैं.
यहां बीजेपी के बालमुकुंदाचार्य का मुकाबला कांग्रेस के आरआर तिवारी से है. बीएसपी के सिविल लाइंस कैंडिडेट अरुण चतुर्वेदी कांग्रेस उम्मीदवार और कैबिनेट मंत्री प्रताप सिंह खचरियावास के समर्थन में बैठ गए हैं.
मैथ्स स्ट्रीम के स्टूडेंट भी अब दे सकेंगे मेडिकल एंट्रेस

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'दैनिक भास्कर' ने एमबीबीसी के लिए बायोलॉजी पढ़ने को अनिवार्य न बनाने से जुड़ी ख़बर छापी है. अख़बार ने लिखा है कि
डॉक्टर बनने के लिए अब 12वीं में बायोलॉजी की पढ़ाई जरूरी नहीं होगी. मैथ्स स्ट्रीम के स्टूडेंट्स भी नीट यूजी की परीक्षा दे सकेंगे.
हालांकि, फिजिक्स, केमिस्ट्री, मैथ्स से 12वीं करने वाले स्टूडेंट्स को अतिरिक्त विषय के तौर पर बायोटेक्नोलॉजी की परीक्षा देनी जरूरी होगी. इसके लिए नेशनल मेडिकल काउंसिल (NMC) ने नई गाइडलाइंस जारी की है.
नया नियम अगले एकेडमिक सेशन से लागू होगा. इससे पहले, एमबीबीसी या बीडीएस में एडमिशन के लिए 11वीं और 12वीं कक्षा में अंग्रेजी के फिजिक्स, केमेस्ट्री, बायोलॉजी की दो साल की रेगुलर स्टडी अनिवार्य थी.
एनएमसी के नए फैसले से स्टूडेंट्स के लिए पहले से और ज्यादा करियर ऑप्शंस के दरवाजे खुलेंगे.
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