दिल्ली विधानसभा चुनाव : जानिए दल-बदल करने वाले किन नेताओं को मिली जीत, किनकी हुई हार

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- Author, आनंद मणि त्रिपाठी
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
दिल्ली विधानसभा चुनाव से पहले हुई दल-बदल में कई नेताओं ने अपनी पुरानी पार्टी को छोड़कर नई पार्टी का दामन थामा था. इनमें से 24 नेताओं को अलग-अलग दलों ने चुनाव में अपना उम्मीदवार बनाया था, जिनमें से नौ ने जीत हासिल की है.
यानी इस बार के चुनावों में दल-बदल कर टिकट पाने वाले 37.5 फीसदी प्रत्याशियों को जीत मिली है.
इनमें बीजेपी ने कांग्रेस और आम आदमी पार्टी से आए सबसे ज़्यादा 10 नेताओं को टिकट दिया था, और छह प्रत्याशियों ने जीत दर्ज की है.
वहीं आम आदमी पार्टी ने नौ दल-बदल करने वालों को विधानसभा चुनाव में टिकट दिया था और ऐसे केवल तीन उम्मीदवारों को ही जीत हासिल हुई है.

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जिन्होंने थामा बीजेपी का दामन

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आइए जानते हैं उन नेताओं का क्या हुआ जिन्होंने अपने पुराने दल से नाता तोड़ा और दूसरी पार्टी में जाकर विधानसभा चुनाव का टिकट हासिल किया. इस सिलसिले में सबसे पहले बात उन नेताओं की जिन्होंने चुनाव से पहले बीजेपी का दामन थामा.
कैलाश गहलोत
आम आदमी पार्टी से इस्तीफा देकर बीजेपी में शामिल हुए पूर्व परिवहन मंत्री ने कैलाश गहलोत ने बिजवासन से 11 हजार 276 वोट से जीत दर्ज की है.
उन्होंने आम आदमी पार्टी के सुरेंद्र भारद्वाज को हराया है.
इसके पहले दिल्ली के पूर्व परिवहन मंत्री कैलाश गहलोत नजफ़गढ़ से विधायक थे. वो परिवहन विभाग के अलावा राजस्व, क़ानून, न्याय एवं विधायी मामले, सूचना और प्रौद्योगिकी, प्रशासनिक सुधार विभाग के भी मंत्री थे.
कैलाश गहलोत ने फरवरी 2015 में दिल्ली विधानसभा का पहला चुनाव जीता था. पेशे से कैलाश गहलोत एक वकील रहे हैं. उन्होंने सुप्रीम कोर्ट और दिल्ली हाई कोर्ट में 16 साल तक वकालत की है.
कैलाश गहलोत ने 17 नवंबर 2024 को आप की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था. उन्होंने पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल पर 'जनता से किए वादे पूरे न करने' का आरोप लगाया था.
कैलाश गहलोत ने ही 15 अगस्त 2024 को दिल्ली के छत्रसाल स्टेडियम में झंडा फहराकर कहा था कि 'लोकतंत्र विरोधी ताक़तों' ने केजरीवाल को जेल भेजकर उन्हें रोकने की साज़िश की है.
करतार सिंह तंवर
आम आदमी पार्टी से इस्तीफा देकर बीजेपी में शामिल हुए करतार सिंह तंवर ने छतरपुर से चुनाव जीत लिया है. उन्होंने अपनी पुरानी पार्टी यानी 'आप' के ब्रह्म सिंह तंवर को हरा दिया है. इससे पहले करतार सिंह ने आप के टिकट पर साल 2015 और 2020 में जीत हासिल की थी.

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तरविंदर सिंह मारवाह
कांग्रेस पार्टी से इस्तीफा देकर बीजेपी में आए तरविंदर सिंह मारवाह ने आम आदमी पार्टी में दूसरे नंबर के नेता माने जाने वाले पूर्व उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को 675 वोटों से हरा दिया है.
तरविंदर सिंह मारवाह इसी सीट पर तीन बार कांग्रेस विधायक रह चुके हैं. उन्होंने साल 1998 से लगातार 2008 तक कांग्रेस के टिकट पर जीत दर्ज की थी.
कांग्रेस को छोड़ जुलाई 2022 में ही मारवाह ने बीजेपी का दामन थाम लिया था.
राजकुमार चौहान
कांग्रेस से इस्तीफा देकर बीजेपी का दामन थामने वाले राजकुमार चौहान ने चुनाव जीत लिया है. राजकुमार चौहान ने मंगोलपुरी सीट पर आप प्रत्याशी राकेश जाटव को 6 हजार 255 वोटों से हरा दिया है.
राजकुमार चौहान की गिनती कांग्रेस के दिग्गज नेताओं में होती थी. वो शीला दीक्षित की सरकार में मंत्री रहे थे और साल 1993 से इस सीट पर चार बार वह विधायक रहे थे.
साल 2013 से इस सीट पर आम आदमी पार्टी का कब्जा था.
अरविंदर सिंह लवली
कांग्रेस पार्टी से इस्तीफा देकर बीजेपी में आए अरविंदर सिंह लवली ने गांधी नगर सीट से जीत दर्ज की है. उन्होंने आप के नवीन चौधरी को 12 हज़ार 748 वोटों से हराया है.
अरविंदर सिंह लवली साल 1998 में गांधीनगर सीट से पहली बार विधानसभा पहुंचे थे. वो उस समय सबसे कम उम्र के विधायक थे. वो शीला दीक्षित की सरकार में शहरी विकास, राजस्व, शिक्षा और परिवहन मंत्री भी रहे थे.
साल 2017 में वो थोड़े समय के लिए बीजेपी में चले गए थे लेकिन विचारधारा के सवाल पर मतभेद का हवाला देकर वो कांग्रेस में लौट आए थे.
साल 2019 में पूर्वी दिल्ली सीट पर अरविंदर सिंह लवली कांग्रेस के लोकसभा उम्मीदवार थे, लेकिन उन्हें बीजेपी के गौतम गंभीर से हार का सामना करना पड़ा था. अगस्त 2023 में उन्हें दिल्ली कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया गया था.
इसके बाद 28 अप्रैल 2024 को अरविंदर सिंह लवली ने लोकसभा चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस पार्टी से इस्तीफा दे दिया था.
उन्होंने राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को भेजे अपने इस्तीफे में कहा था कि जिस आम आदमी पार्टी के कई मंत्री भ्रष्टाचार के आरोप में जेल में है, कांग्रेस ने उसी के साथ गठबंधन कर लिया है.

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नीरज बसोया
कांग्रेस पार्टी से इस्तीफा देकर आए नीरज बोसाया ने बीजेपी के टिकट पर कस्तूरबा नगर से जीत दर्ज की है. उन्होंने कांग्रेस के अभिषेक दत्त को 11 हजार 48 वोटों से हराया है. पिछले दो बार से इस सीट पर आम आदमी पार्टी चुनाव जीत रही थी.
नीरज ने साल 2015 के चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर इस सीट से चुनाव लड़ा था और तीसरे स्थान पर थे. नीरज साल 2008 में इसी सीट से विधायक थे.
नारायण दत्त शर्मा
बदरपुर विधानसभा में आम आदमी पार्टी के राम सिंह नेताजी ने क़रीब 26 हज़ार वोटों से बीजेपी के नारायण दत्त शर्मा को हरा दिया है.
नारायण दत्त शर्मा ने चुनाव से पहले आम आदमी पार्टी से इस्तीफा दे दिया था. इससे पहले वो बहुजन समाज पार्टी में भी रह चुके हैं.
इस सीट पर साल 2020 में बीजेपी के रामवीर सिंह बिधूड़ी ने जीत दर्ज की थी. 2024 के लोकसभा चुनाव में उनके सांसद चुने जाने के बाद छह महीने से यह सीट खाली थी.
साल 2015 आम आदमी पार्टी के नारायण दत्त शर्मा ने यहां से जीत दर्ज की थी. उन्होंने रामवीर सिंह बिधूड़ी को क़रीब 50 हज़ार वोट से हराया था.
कुमारी रिंकू
आम आदमी पार्टी के वीर सिंह धिंगान ने सीमापुरी विधानसभा सीट पर कुमारी रिंकू को 10 हज़ार से ज़्यादा वोटों से हरा दिया है. कुमारी रिंकू हाल ही में आम आदमी पार्टी को छोड़कर बीजेपी में शामिल हुई थीं.
राजकुमार आनंद
आप से इस्तीफा देकर बीजेपी में शामिल हुए राजकुमार आनंद दिल्ली के पटेल नगर सीट से चुनाव हार गए हैं. उन्हें बीजेपी से आम आदमी पार्टी में आए प्रवेश रत्न ने 4 हजार से ज़्यादा वोटों से हरा दिया.
इस सीट पर साल 2020 में आप के टिकट पर राजकुमार आनंद ने जीत दर्ज की थी. उस समय प्रवेश रत्न बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़े थे. साल 2013 से ही इस सीट पर आप का दबदबा बरकरार है.
प्रियंका गौतम
आप से इस्तीफा देकर बीजेपी में शामिल हुई प्रियंका गौतम कोंडली विधानसभा से चुनाव हार गई हैं. उन्हें आप के कुलदीप कुमार ने 6 हज़ार से ज़्यादा वोटों से हरा दिया है.
आप ने साल 2020, 2015 और 2013 में भी इस सीट पर जीत दर्ज की थी. प्रियंका ने दिसंबर 2024 में आप छोड़कर बीजेपी का दामन थाम लिया था. इस समय वो कोंडली से निगम पार्षद भी हैं.
आप में शामिल होने वालों का क्या हुआ?

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वीर सिंह धिंगान
वहीं वीर सिंह धिंगान कांग्रेस छोड़कर आप में शामिल हुए थे और उन्होंने सीमापुरी सीट पर बीजेपी की कुमारी रिंकू को हरा दिया है.
साल 2015 और 2020 में वीर सिंह धिंगान तीसरे स्थान पर रहे थे. पिछले तीन विधानसभा चुनाव से इस सीट पर आम आदमी पार्टी का कब्जा था.
अनिल झा
बीजेपी के पूर्व विधायक अनिल झा 17 नवंबर 2024 को आम आदमी पार्टी में शामिल हुए थे. उन्होंने बीजेपी के बजरंग शुक्ला को किराड़ी विधानसभा सीट पर क़रीब 22 हज़ार वोटों से हरा दिया है.
किराड़ी विधानसभा सीट पर साल 2015 और 2020 में भी आम आदमी पार्टी का वर्चस्व था. इस सीट पर दोनों ही चुनाव में ऋतुराज गोविंद ने बीजेपी के प्रत्याशी रहे अनिल झा को हराया था.
प्रवेश रत्न
बीजेपी से आप में आए प्रवेश रत्न पटेल नगर सीट से चुनाव जीत गए हैं. उन्हें आप से इस्तीफा देकर बीजेपी में शामिल हुए राजकुमार आनंद को हराया है.
सुरेंद्र पाल सिंह
बीजेपी छोड़कर आप में शामिल हुए सुरेंद्र पाल सिंह तिमारपुर विधानसभा सीट से चुनाव हार गए हैं. वो 6 दिसंबर 2024 को बीजेपी छोड़कर आम आदमी पार्टी में शामिल हुए थे. उन्हें बीजेपी के सूर्य प्रकाश खत्री ने एक हज़ार 168 वोटों से हराया है.
कांग्रेस से दो बार विधायक रहे सुरेंद्र पाल सिंह साल 2017 में आप में शामिल हुए थे. साल 2020 में वो बीजेपी में शामिल हो गए थे. उन्हें साल 2020 के चुनाव में आप के दिलीप पांडे से हार का सामना करना पड़ा था.
सुमेश शौकीन
मटियाला विधानसभा सीट से बीजेपी के संदीप सहरावत ने जीत दर्ज की है. उन्होंने कांग्रेस छोड़कर आप में शामिल हुए सुमेश शौक़ीन को 28 हजार से ज़्यादा वोटों से हरा दिया है.
इससे पहले 2013 में भी बीजेपी ने यह सीट जीती थी. जबकि साल 2015 और 2020 में आम आदमी पार्टी ने इस सीट पर जीत दर्ज की थी.

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जितेंद्र सिंह शंटी
पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित और बीजेपी के पूर्व विधायक जितेंद्र सिंह शंटी शाहदरा से चुनाव हार गए हैं. वह दिसंबर में ही बीजेपी छोड़कर आप में शामिल हुए थे.
इन्हें बीजेपी के संजय गोयल ने क़रीब 5 हजार वोटों से हरा दिया है. शंटी साल 2013 में बीजेपी के टिकट पर क़रीब 15 हजार वोटों से जीते थे.
उन्हें कोविड-19 महामारी के दौरान 'एंबुलेंस मैन' की पहचान मिली थी. उनका दावा है कि उन्होंने क़रीब 70 हजार लावारिश शवों का सम्मानपूर्वक अंतिम संस्कार किया है.
शंटी 100 से अधिक बार रक्तदान कर चुके हैं. इन्हीं सेवाओं के लिए उन्हें 'पद्मश्री' से सम्मानित किया गया.
बीबी त्यागी
बीजेपी से आप में शामिल हुए बीबी त्यागी लक्ष्मीनगर सीट से चुनाव हार गए हैं. यहां बीजेपी के अभय वर्मा ने 11 हज़ार से ज़्यादा वोटों से जीत हासिल की है.
साल 2015 में बीजेपी से बीबी त्यागी ने चुनाव लड़ा था और वह क़रीब पांच हजार वोटों से चुनाव हार गए थे. तब आम आदमी पार्टी के नितिन त्यागी ने जीत दर्ज की थी.
मुकेश गोयल
कांग्रेस से आम आदमी पार्टी में शामिल होने वाले मुकेश गोयल चुनाव हार गए हैं. उन्हें बीजेपी के राजकुमार भटिया ने क़रीब साढ़े 11 हजार वोटों से हरा दिया है.
मुकेश गोयल इससे पहले कांग्रेस के टिकट पर साल 2015 और 2020 में चुनाव लड़ चुके हैं और उन्हें दोनों ही बार तीसरे स्थान पर संतोष करना पड़ा था.
ब्रह्म सिंह तंवर
छतरपुर सीट से चुनाव लड़ ने वाले ब्रह्म सिंह तंवर बीजेपी से इस्तीफा देकर आप में शामिल हुए थे. वो साल 2013 में इस सीट से विधायक रहे चुके थे. चुनाव से ठीक पहले तंवर ने बीजेपी से इस्तीफा दे दिया था.
उन्हें आप से इस्तीफा देकर बीजेपी में शामिल हुए करतार सिंह तंवर ने मात दी है.
कांग्रेस में शामिल हुए पूर्व विधायकों का हाल

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कांग्रेस को इन चुनावों में एक बार फिर किसी सीट पर जीत हासिल नहीं हुई है. दिल्ली में यह लगातार तीसरा विधानसभा चुनाव है, जिसमें कांग्रेस खाता नहीं खोल पाई है.
ज़ाहिर है ऐसे में जिन नेताओं ने कांग्रेस का दामना थामा उन सभी को हार का सामना करना पड़ा है.
इनमें आम आदमी पार्टी से कांग्रेस में आए आसिम अहमद खान मटिया महल सीट से चुनाव हार गए. उन्होंने साल 2015 में 26 हजार 96 वोटों से जीत दर्ज की थी.
आप से कांग्रेस में शामिल हुए देवेंदर सहरावत बिजवासन सीट पर चुनाव हार गए हैं. वो साल 2015 में क़रीब 20 हज़ार वोट से आप के टिकट पर चुनाव जीते थे.
आम आदमी पार्टी से कांग्रेस में शामिल हुए अब्दुल रहमान सीलमपुर सीट से चुनाव हार गए हैं. उन्होंने साल 2020 में क़रीब 37 हज़ार वोट से चुनाव जीता था.
वहीं बाबरपुर सीट से मोहम्मद इशराक़ चुनाव हार गए हैं. वो आम आदमी पार्टी से कांग्रेस में शामिल हुए थे. उन्होंने साल 2015 में इन्होंने सीलमपुर सीट से क़रीब 28 हजार वोटों से जीत दर्ज की थी.
इसी सिलसिले में द्वारका से कांग्रेस के आदर्श शास्त्री चुनाव हार गए हैं. वो आम आदमी पार्टी से कांग्रेस में शामिल हुए थे. उन्होंने साल 2015 में क़रीब 40 हज़ार वोटों से जीत दर्ज की थी.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित
















