टीएमसी सांसद जवाहर सरकार ने इस्तीफ़े की पेशकश की, ममता और आरजी कर अस्पताल को लेकर अपने पत्र में क्या लिखा

राज्यसभा में तृणमूल कांग्रेस के सांसद जवाहर सरकार ने ममता बनर्जी को एक पत्र लिखकर अपने इस्तीफ़े की पेशकश की है.

उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा, "मैं एक सांसद के तौर पर इस्तीफ़ा दे रहा हूं क्योंकि आरजी कर हॉस्पिटल रेप-मर्डर मामले के बाद जन आंदोलन को पश्चिम बंगाल सरकार ने ग़लत तरीके़ से संभाला."

इसके साथ ही जवाहर सरकार ने राजनीति छोड़ने का भी फ़ैसला लिया है.

उन्होंने कहा, "न्याय के लिए मैं लोगों के संघर्ष में उनके साथ हूं. मूल्यों के प्रति मेरी प्रतिबद्धता हमेशा होगी."

जवाहर सरकार के इस्तीफ़े के बाद टीएमसी नेता कुणाल घोष ने प्रतिक्रिया दी है.

उन्होंने जवाहर सरकार के इस्तीफ़े को निजी फ़ैसला बताया है.

कुणाल घोष ने कहा, "ये उनका निजी फ़ैसला है. इसको लेकर मैं कोई टिप्पणी नहीं कर सकता हूं."

वहीं इस पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा प्रवक्ता शहज़ाद पूनावाला ने ममता बनर्जी के इस्तीफ़े की मांग की.

उन्होंने कहा, "सबसे पहले अगर इस्तीफ़ा या त्यागपत्र किसी का आना चाहिए तो वो ममता बनर्जी का होना चाहिए. जवाहर सरकार ने जो पत्र लिखा है, अगर उस पत्र पर अमल करते हुए वह इस्तीफ़ा दे देती हैं तो दो-तीन बातें जो हम लगातार कह रहे हैं वह स्पष्ट हो जाती हैं."

जवाहर सरकार ने पत्र में क्या कहा?

जवाहर सरकार ने इस्तीफ़े की पेशकश वाले पत्र में ममता बनर्जी, पश्चिम बंगाल सरकार और टीएमसी को लेकर कई आरोप लगाए.

जवाहर सरकार ने ममता बनर्जी को पत्र लिखते हुए कहा, "मैं मोदी सरकार की तानाशाही, विभाजनकारी, भेदभावपूर्ण और संघीय विरोधी नीतियों के ख़िलाफ़ लड़ा. लेकिन 2022 में पूर्व शिक्षा मंत्री पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों के सबूत टीवी और प्रिंट मीडिया में देखकर हैरान था."

"मैंने एक सार्वजनिक बयान दिया कि पार्टी और सरकार को भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ क़दम उठाना चाहिए, लेकिन मुझे सीनियर लीडर ने टोका."

उन्होंने कहा, "मैंने उस समय इस्तीफ़ा नहीं दिया क्योंकि मुझे उम्मीद थी कि आप 'कट मनी' और भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ अपने अभियान को आगे चलाएंगी, जिसे आपने एक साल पहले शुरू किया था."

जवाहर सरकार ने आगे लिखा, "मैंने संसद में अपना काम जारी रखा, लेकिन कुछ समय बाद मेरा मोहभंग हो गया क्योंकि राज्य सरकार ने भ्रष्टाचार और नेताओं के एक वर्ग की बढ़ती सशक्त रणनीति को लेकर कोई क़दम नहीं उठाए."

उन्होंने कहा, "एक आईएएस के तौर पर 41 साल नौकरी करने के बाद मेरे पास ज़्यादा कुछ नहीं था. लेकिन मैं ये देखकर हैरान था कि कुछ निर्वाचित पंचायत और नगर निकाय नेताओं के पास महंगी गाड़ियां और बड़ी प्रॉपर्टीज़ थीं. इस सब चीज़ों ने न सिर्फ मुझे चोट पहुंचाई बल्कि बंगाल के लोगों को भी आहत किया."

आरजी कर रेप-मर्डर मामले को लेकर जवाहर सरकार ने कहा, "वर्तमान में जो जनता का गुस्सा निकल कर आया है वह भ्रष्टाचारी और कुछ लोगों का पक्ष लेने के रवैये के चलते निकला है. पिछले कुछ सालों में मैंने सरकार के ख़िलाफ़ ऐसा अविश्वास नहीं देखा."

"आरजी कर अस्पताल की घटना के मामले में मैं पिछले एक महीने से उम्मीद कर रहा था कि आप अपने (ममता बनर्जी) पुराने स्टाइल की तरह ही इस मामले में सीधा हस्तक्षेप करेंगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ और अब जो भी क़दम सरकार उठा रही है उसमें बहुत देरी हो चुकी है और वो पर्याप्त भी नहीं हैं."

उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि इस घटना के बाद जिन प्रशासनिक अधिकारियों ने ग़लत क़दम उठाए उनके ख़िलाफ़ कड़े क़दम उठाते हुए तुरंत सज़ा दी जाती तो हालात सामान्य होते."

"मुझे पता है कि राजनीतिक दल इस आंदोलन में अपना अवसर ढूंढ रहे हैं. लेकिन, जिन युवा और आम लोगों की भीड़ सड़कों पर उतरी है वो कोई राजनीति नहीं चाहते, वो न्याय और दोषियों की सज़ा चाहते हैं. हमें यह समझना होगा कि यह आंदोलन पीड़िता के लिए है और राज्य सरकार और पार्टी के ख़िलाफ़ है."

पार्टी के अंदर अपनी बात नहीं रख पाने को लेकर जवाहर सरकार ने ममता बनर्जी से कहा, "मुझे पिछले कुछ महीनों से इन सभी मुद्दों पर अकेले बात करने का अवसर नहीं मिल रहा था इसलिए मुझे लिखना पड़ा."

उन्होंने कहा, "मुझे पिछले तीन साल संसद में बंगाल के मुद्दे उठाने का मौक़ा मिला इसके लिए मैं आभार व्यक्त करता हूं, लेकिन अब आगे मैं सांसद के रूप में नहीं रहना चाहता हूं. मैं केंद्र और राज्य में भष्टाचार, सांप्रदायिकता और तानाशाही के ख़िलाफ़ लड़ता रहूंगा."

उन्होंने कहा, "मैं जल्द ही दिल्ली जाकर राज्यसभा के सभापति को अपना इस्तीफ़ा सौंपूंगा. राज्य को बचाने के लिए कृपया कुछ क़दम उठाएं."

तृणमूल कांग्रेस ने क्या कहा?

टीएमसी नेता कुणाल घोष ने जवाहर सरकार के इस्तीफ़े पर कहा, "वो बहुत ही सम्मानित और देश और बंगाल के सबसे बेहतरीन ब्यूरोक्रैट्स में से एक हैं. ये उनका निजी फ़ैसला है. उसके ऊपर मैं कोई टिप्पणी नहीं कर सकता. उनका ख़ुद के बारे में कोई फ़ैसला लेने का पूरा हक़ है."

वहीं ममता बनर्जी पर लगे आरोपों को लेकर उन्होंने कहा, "हम सिर्फ़ इतना कह सकते हैं कि जवाहर सरकार ने पत्र में जो लिखा है, जो चिंता और सवाल हैं, उसके एक बड़े हिस्से से हम भी सहमत हैं."

"हम लोग भी सिविक सोसाइटी की भावना के साथ हैं. लेकिन जवाहर सरकार ने जो स्टैंड लिया है वो उनका फ़ैसला है. और हम लोगों का ये स्टैंड है कि हम ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व में पार्टी के अंदर रहकर इसी भावना के साथ प्रशासनिक तौर पर सकारात्मक क़दम उठाएंगे."

कुणाल घोष ने कहा, "इसका मतलब यह नहीं है कि मैं जवाहर सरकार के निजी मूल्यों की आलोचना कर रहा हूं. उन्होंने पत्र में जो लिखा है कई जगहों पर हम भी सहमत हैं. लेकिन हम लोग का स्टैंड है, पार्टी के एक सोल्जर होने के नाते पार्टी में रहकर ज़रूरी रिफॉर्म्स करेंगे."

भाजपा ने क्या कहा?

जवाहर सरकार के इस्तीफ़े पर भाजपा प्रवक्ता शहज़ाद पूनावाला ने कहा, "टीएमसी का मतलब तृणमूल कांग्रेस नहीं, 'टू मच करप्शन' बन चुका है. जिस प्रकार से भ्रष्टाचार को बढ़ावा दिया गया और इसके पीछे ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस ज़िम्मेदार हैं."

"वो (जवाहर सरकार) बताते हैं कि भ्रष्टाचार के बारे में जब बोला गया या बताया गया तो उनको चुप करा दिया गया. मतलब टीएमसी का मतलब 'तानाशाही मानसिकता और कल्चर' भी है. मतलब भ्रष्टाचार भी करने देना है और भ्रष्टाचार के बारे में कुछ बोलना भी नहीं है."

उन्होंने कहा, "जिस प्रकार से आरजी कर केस में ममता बनर्जी ने जो क़दम उठाए वो बेटी को न्याय दिलाओ नहीं था बल्कि सबूत मिटाओ था, सत्य की आवाज़ दबाओ था, सच छिपाओ था और बलात्कारी बचाओ था. आज इस बात के भी संकेत मिले हैं."

"लेकिन ममता बनर्जी ने क्या किया? इस आंदोलन को प्रदर्शनकारियों को कभी अपमानित करना, धमकी दिलवाना, कभी उनको चुप करवाना और संदीप घोष जैसे करप्ट लोगों के साथ खड़े हो जाना, अपराधियों को बचाना."

पूनावाला ने कहा, "आज सवाल ये बनता है कि आप ही के सांसद कह रहे हैं कि इस सरकार के ख़िलाफ़ टोटल नो कॉन्फिडेंस है. जो आंदोलन हुआ वो कोई प्रायोजित आंदोलन नहीं था, ये जनता का आंदोलन था. ये डॉक्टरों का आंदोलन था."

"लेकिन टीएमसी के विधायकों ने क्या कहा, डॉक्टर कसाई हैं. किसी ने कहा उंगली तोड़ देंगे, किसी ने कहा ज़बान खींच लेंगे. किस प्रकार से टीएमसी के विधायकों और सांसदों ने धमकी भरी बातें कीं, लेकिन उन पर कोई कार्रवाई ममता बनर्जी की सरकार ने नहीं की. क्योंकि वो भी इस प्रकार का रवैया अपना रही थीं."

शहज़ाद पूनावाला ने ममता बनर्जी के इस्तीफ़े की मांग करते हुए कहा, "आज सवाल ये बनता है कि इन सारी चीज़ों के बाद क्या ममता बनर्जी, जो कि गृह मंत्री हैं, स्वास्थ्य मंत्री हैं, क्या उनको इस्तीफ़ा नहीं देना चाहिए?"

उन्होंने कहा, "अब तो माता-पिता का भी बयान सामने आ गया कि कैसे पुलिस ने इस पूरी जांच में दख़ल देते हुए उन्हें पैसे ऑफ़र किए थे. कैसे अस्पताल प्रशासन ने झूठ बोला था, कैसे आत्महत्या की थ्योरी फ्लोट की गई थी. किस प्रकार से संदीप घोष ने सबूत मिटाने के लिए वहां पर डिमोलिशन और कंस्ट्रक्शन का काम कराया था."

"इसके बाद ममता बनर्जी को अपने पद पर बने रहने का कोई अधिकार नहीं बचता. और जवाहर सरकार के अलावा उन्हें भी अपना त्यागपत्र देना चाहिए. लेकिन ये दुख की बात है कि ममता बनर्जी अपना त्यागपत्र नहीं दे पा रही हैं."

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित

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