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अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव: कमला हैरिस या डोनाल्ड ट्रंप? पहली डिबेट में कौन पड़ सकता है भारी
अमेरिका में राष्ट्रपति पद के चुनाव की दूसरी प्रेसिडेंसियल डिबेट मंगलवार यानी 10 सितंबर को होनी है.
इस डिबेट में पहली बार पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और मौजूदा उपराष्ट्रपति कमला हैरिस एक-दूसरे के सामने होंगे.
अमेरिका में राष्ट्रपति पद की बहस को बड़ी संख्या में लोग टीवी पर देखते हैं.
माना जाता है कि अमेरिका में वोटिंग पर इन डिबेट्स का बड़ा असर हो सकता है.
कमला हैरिस को एक कुशल डिबेटर कहा जाता है, लेकिन डोनाल्ड ट्रंप साल 2016 और साल 2020 में राष्ट्रपति पद की बहस में दिखा चुके हैं कि वो एक मज़बूत प्रतिद्वंद्वी हैं.
राष्ट्रपति पद की बहस और इसके नियम
दोनों नेताओं के बीच राष्ट्रपति पद की बहस 10 सितंबर को फिलाडेल्फिया में होगी. यह स्थानीय समयानुसार रात 9 बजे शुरू होगी.
यह साल 2024 के चुनावों की दूसरी प्रेसिडेंसियल डिबेट है. इसकी पहली डिबेट जून में डोनाल्ड ट्रंप और राष्ट्रपति जो बाइडन के बीच हुई थी. बाइडन बाद में इस दौड़ से बाहर हो गए थे.
यह बहस एबीसी चैनल पर प्रसारित की जाएगी. यह एबीसी न्यूज़ लाइव, डिज़्नी प्लस और हुलु पर भी स्ट्रीम की जाएगी.
इस बहस में समय सीमा का पालन काफ़ी सख़्ती से किया जाता है. इसमें हर उम्मीदवार के पास मॉडरेटर के सवालों का जवाब देने के लिए अधिकतम दो मिनट का समय होगा और खंडन करने के लिए भी दो मिनट का समय होगा.
बहस के दौरान जब दूसरा व्यक्ति कुछ बोल रहा हो तो उम्मीदवारों के माइक्रोफोन बंद कर दिए जाएंगे और बहस वाले कमरे में कोई दर्शक मौजूद नहीं होगा.
कमला हैरिस चाहती थीं कि माइक्रोफ़ोन पूरे समय सक्रिय रहें लेकिन पिछले दिनों वह इस नियम पर सहमत हो गईं.
यह नियम चार साल पहले बनाया गया था, जब ट्रंप और बाइडन के बीच पहली बहस रुकावटों और झगड़ों की वजह से ख़राब हो गई थी.
मंगलवार की बहस के दौरान दो मध्यस्थ डेविड मुइर और लिन्से डेविस मौजूद रहेंगे और बहस का संचालन करेंगे. दोनों ही एबीसी न्यूज़ पर समाचार कार्यक्रम प्रस्तुत करते हैं.
कमला हैरिस का मज़बूत पक्ष
कमला हैरिस ने साल 2003 से चुनावी बहसों में भाग लिया है, जब वो सैन फ्रांसिस्को के ज़िला अटॉर्नी की दौड़ जीती थी.
उन्होंने कैलिफ़ोर्निया के अटॉर्नी जनरल और कैलिफ़ोर्निया के लिए अमेरिकी सीनेटर चुने जाने के अपने सफल अभियानों के दौरान भी डिबेट में हिस्सा लिया था.
साल 2019 में डेमोक्रेटिक पार्टी के राष्ट्रपति पद के नामांकन के लिए उन्होंने जो बाइडन के साथ डिबेट की थी.
साल 2020 के उप राष्ट्रपति पद की बहस में उनका सामना माइक पेंस से हुआ था.
कमला हैरिस ने दिखाया है कि वह मंच पर नियंत्रण रख सकती हैं. माइक पेंस के साथ साल 2020 की बहस में उन्होंने बीच में बोलने के लिए पेंस को फटकार लगाते हुए कहा: "उपराष्ट्रपति महोदय, अभी मैं बोल रही हूँ."
कमला हैरिस को अमेरिकी सीनेट और उससे पहले कैलिफोर्निया की अदालतों में अभियोजक के रूप में बहस करने का बड़ा अनुभव है, जहाँ एक बड़ा हुनर विरोधियों के कमज़ोर पक्ष को सामने लाना होता है.
इस अनुभव से डिबेट के दौरान उन्हें डोनाल्ड ट्रंप के उठाए मुद्दों का खंडन करने में फायदा हो सकता है.
हालाँकि कमला हैरिस साल 2020 में डेमोक्रेटिक पार्टी की राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार बनने में नाकाम रही थीं. वो आयोवा में पहले कंटेस्ट से पहले ही बाहर हो गईं थीं. एक आलोचना यह थी कि उनके पास नीतियों को लेकर लगातार स्थिरता नहीं थी.
इस बार भी 10 सितंबर की बहस में मध्यस्थ हैरिस से उनकी नीतियों के बारे में कई कठिन सवाल पूछ सकते हैं.
कमला हैरिस अपने सार्वजनिक भाषण में भी काफ़ी ज़्यादा बोलने वाली नज़र आती हैं.
सीएनएन के साथ हाल के इंटरव्यू में उन्होंने कहा था, "यह एक ज़रूरी मामला है जिसके लिए हमें मेट्रिक्स लागू करना चाहिए जिसमें ख़ुद को समय सीमा के मुताबिक़ रखना शामिल है."
राष्ट्रपति पद के डिबेट में बोलने की समय सीमा काफ़ी गंभीरता से ली जाती है और चुनाव अभियान के संदेशों को मतदाताओं तक स्पष्ट रूप पहुँचाना होता है.
डोनाल्ड ट्रंप कहाँ पड़ सकते हैं भारी
राष्ट्रपति पद की दौड़ में शामिल होने के बाद डोनाल्ड ट्रंप के ख़िलाफ़ 10 सितंबर की बहस कमला हैरिस के लिए सबसे बड़ी चुनौती होगी.
ट्रंप ने साल 2016 और साल 2020 में राष्ट्रपति पद की बहस के दो सेटों में हिस्सा लिया है. वो एक बहुत ही जुझारू और परंपरा से अलग प्रतिद्वंद्वी साबित हुए हैं.
हिलेरी क्लिंटन के ख़िलाफ़ साल 2016 की बहस के दौरान वो मंच के चारों ओर घूम रहे थे और जब हिलेरी बोल रही थीं तो सीधा उनके पीछे खड़े हो गए. हिलेरी ने कहा था कि इससे वो असहज हो गई थीं.
साल 2020 में राष्ट्रपति पद की पहली बहस में उन्होंने लगातार जो बाइडन को टोका था, जिसकी वजह से बाइडन ने चिल्लाकर कहा था, "क्या आप ख़ामोश रहेगें?"
ऐसी हरकतों ने ट्रंप के विरोधियों को परेशान कर दिया और उन्हें ध्यान का केंद्र बनाए रखा.
हालाँकि डोनाल्ड ट्रंप अक्सर बहस में विषय से भटक जाते हैं और उन्होंने ऐसे दावे किए हैं जिन्हें 'फ़ैक्ट चेकर्स' ने ग़लत पाया है.
चुनाव में कौन चल रहा है आगे
बीती जुलाई में राष्ट्रपति के रूप में फिर से चुनाव के लिए खड़े होने से पहले जो बाइडन मतदाताओं के सर्वेक्षण में डोनाल्ड ट्रंप से पीछे चल रहे थे.
राजनीतिक मामलों का विश्लेषण करने वाले संगठन ‘रियल क्लियर पॉलिटिक्स’ ने राष्ट्रीय सर्वेक्षणों का औसत संकलित किया है. उसके मुताबिक़ उम्मीदवारी संभालने के बाद से कमला हैरिस को उनमें तीन अंक मिले हैं.
इसमें कहा गया है कि 3 सितंबर तक वह राष्ट्रीय स्तर पर ट्रंप से 1.9 अंक से आगे थीं.
हालाँकि साल 2016 में ऐसे ही मौक़े पर हिलेरी क्लिंटन को राष्ट्रीय चुनावों में पाँच अंकों की बढ़त मिली थी, लेकिन वह ट्रम्प से चुनाव हार गईं थीं.
अमेरिका में राज्यों के अंदर चुनावों को राष्ट्रीय चुनावों की तुलना में ज़्यादा महत्वपूर्ण माना जाता है.
अलग-अलग राज्यों के चुनावी नतीजे निर्वाचक मंडल में उम्मीदवार को मिलने वाले वोटों की संख्या निर्धारित करते हैं और निर्वाचक मंडल यह तय करता है कि कौन अमेरिका का राष्ट्रपति होगा.
एरिज़ोना, जॉर्जिया, मिशिगन, उत्तरी कैरोलिना और पेंसिल्वेनिया जैसे कुछ ‘स्विंग स्टेट’ हैं जो उम्मीदवारों की जीत के लिए काफ़ी अहम हैं और इन सभी में मुक़ाबला बहुत कड़ा है.
सितंबर की शुरुआत में, रियल क्लियर पॉलिटिक्स ने कहा है कि हैरिस मिशिगन और जॉर्जिया में चुनावों में ट्रंप से आगे निकलने में क़ामयाब रही थीं और पेंसिल्वेनिया में उनके साथ बराबरी पर थीं, लेकिन एरिज़ोना और उत्तरी कैरोलिना में वो अभी भी पीछे चल रही थीं.
राजनीतिक विश्लेषकों के बीच आम सहमति यह है कि दोनों उम्मीदवारों के बीच मुक़ाबला काफ़ी क़रीबी है.
राष्ट्रपति पद के चुनाव में जीत के लिए एक उम्मीदवार को 270 इलेक्टोरल कॉलेज वोटों की ज़रूरत होती है.
मौजूदा समय में सर्वेक्षणों से पता चलता है कि डेमोक्रेटिक पार्टी को 226 इलेक्टोरल कॉलेज वोटों का आश्वासन दिया गया है, जबकि रिपब्लिकन पार्टी को को 219 का आश्वासन दिया गया है, जबकि बाक़ी 93 वोट किसी भी तरफ जा सकते हैं.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित