व्यक्तित्व के वो कौन से पहलू हैं जो लुक्स से ज़्यादा होते हैं आकर्षक

अंग्रेज़ी में एक कहावत है ''फ़्रर्स्ट इंप्रेशन इज़ द लास्ट इंप्रेशन.''

इसका मतलब है कि किसी व्यक्ति से पहली मुलाक़ात में आपका उस पर जो इंप्रेशन या प्रभाव पड़ता है, वही उसे लंबे समय के लिए याद रह जाता है.

आप कैसे दिखते हैं, हो सकता है कि ये पहली मुलाक़ात में मायने रखता हो लेकिन इंसान के व्यक्तित्व के वो कौन से दूसरे पहलू हैं, जो लोगों के दिलों को छू जाते हैं.

आम धारणा है कि किसी भी रोमैंटिक रिश्ते की शुरुआत इससे होती है कि आप पहली नज़र में कैसे पेश आते हैं.

लेकिन फ़िज़िकल अट्रैक्शन या कहें शारीरिक आकर्षण इंसान की कई और ख़ूबियों की वजह से भी हो सकती है. क्या आप अप्रोचेबल हैं? आप बात कैसे करते हैं? आपका व्यवहार कैसा है?

अमेरिका में किए गए एक सर्वे में जोड़ों से पूछा गया कि उन्हें लोगों में लुक्स के अलावा और कौन से गुण भाते हैं.

सर्वे के सवालों के जवाब में लोगों ने कहा कि भौतिक सफलताएं जैसे कि वित्तीय सुरक्षा, एक अच्छा घर होना, आकर्षक गुणों में उनके लिए सबसे निचले पायदान पर आता है.

दूसरी ओर अपने पार्टनर की बातों से सहमति रखना, एक्सट्रोवर्ट या बहिर्मुखी होना, बुद्धिमत्ता जैसे गुणों को वो शारीरिक आकर्षण से कहीं ऊपर रखते हैं.

'लुक्स' कितने अहम?

इस सर्वे पर अमेरिका के फ़्लोरिडा विश्वविद्यालय में मनोविज्ञान के प्रोफ़ेसर ग्रैग वेबस्टर कहते हैं, ''इस तरह के सर्वे में लोग ऐसे जवाब देने की कोशिश करते हैं जो उन्हें दूसरों की नज़रों में अच्छा बनाए रखे. जिसका मतलब ये हो सकता है कि ऐसे सर्वे के आँकड़े पूरी तरह से साफ़ तस्वीर ना पेश कर पाएं.''

लेकिन सवाल ये है कि जब हम असल ज़िंदगी की बात करते हैं तब क्या लुक्स से ज़्यादा तवज्जो इंसान के व्यक्तित्व को मिल पाती है?

इस सवाल पर बीबीसी संवाददाता पायल भुयन से बात करते हुए मनोवैज्ञानिक डॉक्टर पूजा शिवम जेटली कहती हैं, ''शुरुआती आकर्षण शुरुआत में लुक्स पर आधारित होता है. लेकिन ये इंसान- इंसन पर भी निर्भर करता है."

"आप कैसे दिखते हैं वो अहम है और कहीं न कहीं वो एक स्टार्ट पॉइंट भी होता है. लेकिन लंबे समय किसी की सुंदरता या लुक्स नहीं लुभा सकती है."

डॉक्टर पूजा शिवम जेटली कहती हैं कि अगर आप लंबे समय तक रिश्ते को चलाने की बात पूछें तो आपका व्यक्तित्व, आपकी ज़रूरतें और आप दुनिया को किस नज़रिए से देखते हैं ये सब भी लोगों को आकर्षित करता है.

उनके अनुसार, "ज़्यादातर रिश्तों में जब इन पहलुओं पर बात नहीं होती तो आगे चल कर मतभेद भी हो सकते हैं. अपने पार्टनर की बात सुनना और आपस में सहमति बनाए रखाना किसी भी रिश्ते के लिए बहुत ज़रूरी है.''

वो कहती हैं, ''क्या कोई ऐसे व्यक्ति पर भरोसा कर सकता है, जो उनकी बातों को अहमियत नहीं देता हो.''

किसी भी इंसान के व्यक्तित्व को मापना मुश्किल काम होता है. दशकों से साइकोमेट्रिक टेस्ट में लोगों से कई सारे सवाल पूछे जाते हैं ताकि उनके व्यक्तित्व के बारें में और जानकारी मिल सके.

कैसे आंका जाए किसी का व्यक्तित्व?

लेकिन आम जीवन में किसी इंसान के व्यक्तित्व को कैसे आंका जा सकता है?

इस सवाल पर बीबीसी संवाददाता पायल भुयन से बात करते हुए बिहेवियर एक्सपर्ट और लाइफ़ कोच आस्था दीवान कहती हैं, "एक इंसान का व्यक्तित्व कई चीज़ों से बनता है. क्या आप से आसानी से बात की जा सकती है ये बहुत मायने रखता है."

"क्या बात करते समय आप दूसरों को बोलने का मौक़ा देते हैं. आपकी पसंद क्या है. विचार कैसे हैं. जीवन मूल्य क्या हैं, आत्मविश्वास कैसा है. ये तमाम चीज़ें पर्सनैलिटी का एक अहम हिस्सा है."

वहीं आपने ये भी सुना होगा कि 'ऑपोज़िट्स अट्रैक्ट्स' मतलब दो लोग जो एक दूसरे से एकदम जुदा होते हैं और एक दूसरे के प्रति आकर्षित होते हैं क्योंकि व्यक्तित्व में अंतर भी लोगों को आकर्षित करता है.

बीबीसी फ़्यूचर के लेख में अमेरिका के रॉचेस्टर यूनिवर्सिटी के हैरी रीड और मिनसोटा यूनिवर्सिटी के ऐल्लन बर्शार्ड बताते हैं कि इंसान ऐसे हमसफ़र की तलाश करता है जिसे वो पहले से जानता पहचानता हो, जिसका व्यक्तित्व, उसका रहन सहन, सोशल ग्रुप मेल खाता हो. यही आकर्षण का बुनियादी सिद्धांत है.

इस पर डॉक्टर आस्था दीवान कहती हैं, ''कई बार लोग आपस में समानता तलाशते हैं, कई बार अपने से अलग इंसान को भी चुनते हैं. ये इंसानी प्रवृत्ति है कि वो समानता की तलाश करता है."

"ये चीज़ बहुत सुरक्षित महसूस कराती है. जब आपके विचारों में, गुणों में पसंद में समानता हो तो एक तुरंत स्पार्क आता है, एक इंस्टेंट बॉन्डिंग आती है.’’

वे कहती हैं, "किसी भी रिश्ते को लंबे समय तक बनाए रखने के लिए ये ज़रूरी है कि आपके पास साथ रह कर भी जीवन में अलग अलग आगे बढ़ने की गुंजाइश हो."

"ऐसा नहीं है कि लोग हर बार समानता ही तलाशते हैं बल्कि कई बार आपसे एकदम जुदा लोग भी पसंद आ सकते हैं, बशर्ते दोनों एक दूसरे की बुनियादी ज़रूरते पूरी कर रहे हों."

डॉक्टर आस्था दीवान के अनुसार, दोस्ती से ज़्यादा का जो अट्रैक्शन है वो ज़्यादातर अपोज़िट लोगों के साथ ही होता है. दो एकदम जुदा लोगों में दोस्ती भी जल्दी होती है.

वो कहती हैं, "कई बार इंसान के खुद में जो कमी होती है वो अपने साथी में तलाशता है और वो दोनों मिल कर एक दूसरे को पूरा करते हैं.''

बीबीसी फ़्यूचर से बातचीत में ग्रेग वेबस्टर कहते हैं, ''रिश्तों में दूसरे आकर्षक गुणों के साथ-साथ सहमति बनाए रखना, रिश्ते में दोनों के व्यक्तित्व के बेहतरीन पहलू को और उभार सकता है.

ग्रेग वेबस्टर ने समाजिक मनोवैज्ञानिक एंगेला ब्रायन और अमैंन्डा महाफ़्फ़ी के साथ मिल कर किसी इंसान के व्यक्तित्व के तीन गुणों पर शोध किया.

ये ती गुण थे व्यक्ति का शारीरिक रूप से आकर्षक होना, आर्थिक तौर पर प्रभावशाली होना और दूसरों से सहमति बनाए रखने की स्वाभाविक प्रकृति होना.

इस स्टडी में पाया गया कि ये तीनों ही गुण लोगों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं.

क्योंकि हर गुण किसी न किसी प्रकार से सुरक्षा और बुनियादी ज़रूरतें जैसे खाना और रहने के लिए घर की ज़रूरतों को पूरा करते हैं.

लेकिन प्रभुत्व (डॉमिनेंन्स) अच्छा और बुरा भी हो सकता है.

वेबस्टर कहते हैं, ''प्रभुत्व की जब बात हो तो ये ख़्याल ज़रूर आ सकता है कि वो रिश्ते में है या फिर रिश्ते के बाहर क्योंकि लोग ये ज़रूर चाहते हैं कि उनका पार्टनर सामाजिक, शारीरिक या आर्थिक रूप से प्रभावशाली हो लेकिन ज़्यादातर लोग ये पसंद नहीं करते कि यही प्रभुत्व उनके रिश्ते पर भी पड़े.''

"एक शख़्स में अगर प्रभुत्व स्थापित करने के साथ-साथ आपसी सहमति बनाने के भी गुण हो तो वो व्यक्ति और आकर्षक लगने लगता है.''

आख़िर में वेबस्टर कहते हैं कि सबके साथ सहमति बनाए रखने का हमारा गुण हमारे व्यक्तित्व के अन्य गुणों की तुलना में बहुत आगे है.

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