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लिपोसक्शन: शरीर को आकार देने की ये प्रक्रिया सवालों में क्यों?
निकिता और रिद्दिमा (बदला हुआ नाम) ने बीते हफ़्ते ही अपने शरीर को आकर्षक और सुड़ौल बनाने लिए एक ऑपरेशन कराया है.
इनकी उम्र 40 से 45 के बीच है और ऑपरेशन के लिए ये दोनों अस्पताल में तीन दिन रहीं.
ये दोनों ही अपने शरीर में आए बदलाव के बाद बेहद खुश हैं.
इन्होंने 360 डिग्री लिपोसक्शन करवाया था. आम बोल चाल की भाषा में कहें तो उन्होंने अपने शरीर के भीतर सभी तरफ से कुछ चर्बी निकलवाई थी. जिससे उनके शरीर को एक आकर्षक आकार मिल सके.
दिल्ली-एनसीआर से आने वालीं निकिता और रिद्दिमा जैसी देश विदेश में सैंकड़ो महिलाएं मिल जाएंगी जो सुंदर और आकर्षक दिखने के लिए ऐसी सर्जरी करा रही हैं.
लेकिन इसका असर का एकतरफ़ा होता है यानी इसके बाद शरीर पर कोई साइडइफेक्ट या कुप्रभाव नहीं होते?
बीते साल कन्नड़ टेलीविज़न अभिनेत्री चेतना राज की बेंगलुरु के एक प्राइवेट अस्पताल में मृत्यु होने की ख़बर सामने आई थी.
वे कन्नड़ के लोकप्रिय टेलीविज़न धारावाहिकों 'गीता' और 'दोरस्वामी' में काम कर चुकी हैं.
ऐसी ख़बरे सामने आई थी कि चेतना राज ने वज़न कम करने के लिए एक सर्जरी करवाई थी जिसके बाद से ही उनकी स्थिति बिगड़ गई थी.
बीबीसी ने अपनी एक रिपोर्ट में यह जानकारी भी दी थी कि वजन कम करने के लिए की जाने वाली सर्जरी के बाद सात ब्रिटिश नागरिकों की मौत हो गई थी.
तो इस मामले में सबसे अधिक चर्चा मेलिसा केर की मौत को लेकर हुई.
तुर्की के सबसे बड़े शहर इस्तांबुल में 31 साल की मेलिसा केर की 2019 में एक निजी अस्पताल में नितंब को बढ़ाने की सर्जरी (बट-लिफ़्ट सर्जरी) के दौरान मौत हो गई.
वहीं 2020 में तीन बच्चों की एक मां ने भी तुर्की जाकर लिपोसक्शन करवाया लेकिन बाद में उनकी मौत हो गई.
क्या तुर्की में ज़्यादा होती हैं सर्जरी?
आख़िर लिपोसक्शन के लिए तुर्की का चयन क्यों करती हैं महिलाएं?
तुर्की के स्वास्थ्य मंत्रालय ने 2019 में यूएसएचएएस नाम से हेल्थकेयर कंपनी गठन किया था. उसके अनुसार तुर्की हाल के वर्षों में चिकित्सा पर्यटन का एक हॉटस्पॉट बन गया है.
इसका दावा है कि स्वास्थ्य संबंधी सुविधाओं, योग्य चिकित्सकों और सस्ती कीमतों की वजह से तुर्की आज सर्वोच्च स्वास्थ्य पर्यटन स्थल बन गया है.
इसके अनुसार साल 2022 के पहली छमाही में तुर्की में क़रीब छह लाख लोग स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ उठाने पहुंचे.
इंटरनेशनल सोसाइटी ऑफ़ एस्थेटिक प्लास्टिक सर्जरी ने तुर्की को स्तन वृद्धि, आंख के पलक की सर्जरी, पेट कम करने की प्रक्रिया, लिपोसक्शन और नाक के आकार में बदलाव की सर्जरी के मामले में दस शीर्ष देशों में जगह दी है. इनमें सबसे अधिक संख्या महिलाओं की थी.
बीबीसी की रिपोर्ट में बताया गया कि तुर्की में इस तरह की सर्जरी करवाने के लिए व्हाट्सएप्प पर मैसेज के ज़रिए भी कुछ ही मिनटों में सर्जरी बुक की जा सकती है.
जिस सर्जरी को करवाने में ब्रिटेन में क़रीब 10 लाख रुपये तक का खर्च आता है वो तुर्की में क़रीब दो लाख रुपये में हो जाता है.
तुर्की से इस पर बात क्यों करना चाहता है ब्रिटेन?
बीबीसी पर छपे लेख में कहा गया है मेलिसा केर की मौत पर एक स्वास्थ्य अधिकारी ने चिंता ज़ाहिर करते हुए कहा कि "मेलिसा या ऐसे अन्य लोगों को सर्जरी के लिए विदेश जाने से पहले समुचित जानकारी नहीं दी जाती है."
वहीं ब्रिटिश स्वास्थ्य मंत्री मारिया कॉलफ़ील्ड ने कहा कि सरकार इस मसले को गंभीरता से ले रही है.
भविष्य में होने वाली ऐसी मौतौं को रोकने पर नॉरफ़ॉक की वरिष्ठ स्वास्थ्य अधिकारी जैकलिन लेक की लिखी की रिपोर्ट पर अपनी प्रतिक्रिया में कॉफ़ील्ड ने कहा कि हेल्थ और सोशल केयर विभाग के अधिकारी जल्द ही तुर्की का दौरा कर वहां अपने समकक्षों से मुलाक़ात करेंगे.
ब्रिटेन सरकार का कहना है कि कई मौतौं के बाद वो तुर्की के अधिकारियों से मुलाक़ात कर मेडिकल और कॉस्मेटिक टूरिज़्म से संबंधित निर्धारित नियमों पर चर्चा करेगी.
ब्राज़ीलियाई बट लिफ़्ट सर्जरी के दौरान मेलिसा केर को (ख़ून का) थक्का जमने की शिकायत आई थी जो उनके हृदय (हार्ट) तक पहुंच गया था.
ब्रिटेन की स्वास्थ्य मंत्री मारिया कॉलफ़ील्ड ने कहा, "जो लोग ब्राज़ीलियाई बट-लिफ़्ट (बीबीएल) करवाने की सोच रहे हैं उन्हें इसके जोखिमों के बारे में पूरी तरह बताया जाए और सर्जरी से पहले उन्हें इस पर पूरा विचार करने का समय दिया जाए."
कुछ ऐसा ही कहना है डॉक्टर अश्विनी कुमार सिंह का जो यथार्थ सुपरस्पेशिलिटी हॉस्पिटल, ग्रेटर नोएडा में प्लास्टिक सर्ज़न हैं.
वह दो बातों पर ज़ोर देते हैं, "पहला ये कि जो भी शख़्स यह सर्जरी करवाना चाहता है वो इस पर पूरी तरह पहले विचार कर ले फिर आगे बढ़े. दूसरा ये कि यह सर्जरी मान्यता प्राप्त डॉक्टर से ही कराए."
ब्रिटेन की स्वास्थ्य मंत्री मारिया कॉलफ़ील्ड कहती हैं कि ब्राज़ीलियाई बट-लिफ़्ट (बीबीएल) में अन्य कॉस्मेटिक सर्जरी की तुलना में 10 गुना अधिक ख़तरा है.
लिपोसक्शन को समझें
ब्रिटिश स्वास्थ्य सेवा कंपनी राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा (एनएचएस) के मुताबिक़ लिपोसक्शन एक कॉस्मेटिक सर्जरी है.
यह सर्जरी उस शख़्स की होती है जो अपने शरीर से अतिरिक्त चर्बी को निकलवाना चाहता है.
'लाइपो' का अर्थ 'चर्बी या वसा' और 'सक्शन' का मतलब 'निकालना' होता है.
ये सर्जरी शरीर के उस भाग में की जाती है जहां चर्बी की मात्रा जमा हो रही होती है और जिसे व्यायाम या स्वस्थ आहार से भी कम कर पाना कठिन होता है.
इस सर्जरी की मदद से बट यानी नितंब, गला, ठुड्डी या ठोड़ी, पेट, जांघें, हाथ के ऊपर और पीछे के हिस्से, पैर के पीछे का हिस्सा या पिंडली और पीठ से कुछ चर्बी कम किया जाता है.
लिपोसक्शन का उद्देश्य शरीर के आकार को एक लंबे वक़्त के लिए बेहतर बनाना है, जो कि इस पर निर्भर करता है कि आप अपना वजन स्वस्थ बनाए रखें.
यह उन लोगों पर सबसे अच्छा काम करता है जो ओवरवेट न हो. यह सर्जरी शरीर के उस भाग में की जाती है जहां चमड़ी सख्त और लचीली हो गई हो.
हालांकि लिपोसक्शन सर्जरी एनएचएस में उपलब्ध नहीं है, जहां इसकी वजह बताई गई है- चूकिं यह "कॉस्मेटिक कारणों" की वजह से करवाई जाती है, इसलिए हमारे पास मौजूद नहीं है.
'लिपोसक्शन पूरी तरह सुरक्षित है'
लेकिन डॉक्टर अश्विनी कहते हैं कि लिपोसक्शन पूरी तरह से सुरक्षित है. 99.9 प्रतिशत मरीज़ों में कोई परेशानी नहीं आती, सब कुछ ठीक रहता है. अगर ये सुरक्षित नहीं होता तो अमेरिका के एफ़डीए से इसे मान्यता नहीं मिलती."
बीबीसी की सहयोगी अंजलि दास से डॉक्टर अश्विनी कहते हैं कि इसे करवाने वाले के सभी वाइटल्स पहले चेक किए जाते हैं, जैसा कि कोई भी सर्जरी से पहले किया जाता है.
डॉ.अश्विनी कहते हैं, "सर्जरी होने से पहले पूरी तरीके से जांच होती है और जब पेशेंट फिट होता है तभी उसकी सर्जरी की जाती है.
वे कहते हैं, "दवाइयां सर्जरी के बाद लेनी होती है. दवाइयों में एंटीबायोटिक्स और पेनकिलर्स दिए जाते हैं.
'वज़न कम करने की प्रक्रिया नहीं'
डॉक्टर अश्विनी कहते हैं, "लिपोसक्शन कराने से पहले सभी व्यक्तियों की पहले काउंसलिंग की जाती है, हम उनकी एक्सपेक्टेशंस पता करते हैं. और इसी के अनुसार हम जांच के बाद बताते हैं कि वो सही होगा या नहीं. हम कई बार साफ़ तौर पर मना भी कर देते हैं."
लिपोसक्शन को लेकर वे साफ़ तौर पर यह कहते हैं, "यह वेट रिडक्शन प्रोसिज़र यानी वजन कम करने की प्रक्रिया नहीं है. यह 'बॉडी कंटूरिंग प्रोसीज़र' है. यानी शरीर के एक बेहतर शेप या आकार देने की प्रक्रिया है. इससे वजन कम करने का कोई लेना देना नहीं है. बॉडी की शेप अच्छी बनाई जाती है. शरीर के जिस हिस्से से संभव है उसके बारे में बता दिया जाता है और जहां नहीं है उसके बारे में साफ़ मना कर दिया जाता है."
कब समस्याएं पैदा होती हैं?
कई ऐसी ख़बरें आती हैं जिसमें बताया जाता है कि लिपोसक्शन की वजह से मौत हो गई, इस सवाल पर डॉ अश्विनी कहते हैं, "हमेशा सर्टिफाइड प्लास्टिक सर्जन से ही यह सर्जरी करवानी चाहिए. टेक्निशियन या ऐसे सर्जन जो प्लास्टिक सर्जन नहीं है, उनसे करवाने पर ही समस्याएं पैदा होती है.’’
साथ ही वे कहते हैं कि यह ज़रूर देखना चाहिए कि यह सर्जरी कहां हो रही है. जिस अस्पताल में यह सर्जरी होने वाली है वहां कि व्यवस्था क्या है. जैसे- आईसीयू का सेटअप हो, क्योंकि अगर कोई समस्या आए भी तो उसका तुरंत निदान किया जा सके. सही सेटअप होगा तो सर्जरी के दौरान अगर कोई परेशानी आती भी है तो अधिकतर का इलाज आसानी से किया जा सकता है."
वे कहते हैं, "अगर आप छोटे सेंटर में करेंगे जहां कोई बैकअप नहीं है, आईसीयू सेटअप नहीं है तो वहां पर किसी बड़ी लिपोसक्शन में समस्या आ सकती है."
लिपोसक्शन की प्रक्रिया
डॉक्टर अश्विनी कहते हैं, "लिपोसक्शन में एक सॉल्यूशन बॉडी में इंजेक्ट की जाती है. जो अतिरिक्त वसा को तोड़ता है और उसी को सक्शन के ज़रिए बाहर निकाल लिया जाता है."
"यूनिवर्सल लिपोसक्शन की गाइडलाइंस है कि आप एक बार में कितना लिपोसक्शन कर सकते हैं और इस प्रक्रिया के बाद आपको क्या सावधानी बरतनी होती है.
जितने भी प्लास्टिक सर्जन हैं वो इसका बखूबी पालन करते हैं."
डॉक्टर अश्विनी कहते हैं, "एक प्लास्टिक सर्जन के पास "डीएनबी इन प्लास्टिक सर्जरी" की डिग्री और मेडिकल काउंसिल का रजिस्ट्रेशन होना अनिवार्य है और साथ में एक्सपीरियंस भी होना चाहिए."
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