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नसबंदी: भारतीय पुरुष क्यों इस पर बात भी नहीं करना चाहते?
- Author, अंजलि दास
- पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए
"मैंने जब उनसे नसबंदी की बात कही तो वो तुरंत भड़क गए. मुझे डांटा और बोले आज बोल दिया सो बोल दिया आगे इस पर बहस नहीं होगी."
ये कहकर रश्मि (बदला हुआ नाम) रुआंसी हो गई.
रश्मि दिल्ली एनसीआर की सोसाइटी में खाना बनाने का काम करती हैं. वे मूलत: पश्चिम बंगाल की रहने वाली हैं और उसके तीन बच्चे हैं. वो आगे बच्चा नहीं चाहती हैं.
जब उन्होंने अपने पति से नसबंदी कराने को कहा तो उनका जवाब था, ''तुम्हें करवाना है तो करवाओ. मुझे क्यों बोल रही हो? इसके बाद वो और ग़ुस्सा हो गए और बोले कि इस पर आगे बहस नहीं होगी.’’
रश्मि अपने बच्चों की अच्छी स्कूली शिक्षा चाहती हैं, तो हार मानकर उन्हें ही नसबंदी करानी पड़ी, जिसके लिए उन्हें घर में खाना पकाने का काम छोड़ना पड़ा था.
लेकिन क्या केवल रश्मि ही हैं जिन्हें नसबंदी के नाम पर पति से झिड़की मिली?
क्या कहते हैं आंकड़े?
आंकड़ों को देखें तो भारत के ज़्यादातर परिवारों में परिवार नियोजन का ज़िम्मा अभी भी औरतें ही उठा रही हैं.
भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक़ 2008 से 2019 के बीच 5.16 करोड़ लोगों की नसबंदी की गई. इनमें भी वैसेक्टमी यानी पुरुष नसंबदी की दर केवल तीन फ़ीसद रही.
वैसेक्टमी की स्वीकार्यता विकसित देशों में तो है लेकिन भारत समेत दुनिया के अन्य विकासशील देशों में बहुत कम है.
संयुक्त राष्ट्र संघ की 2015 की एक रिपोर्ट के मुताबिक़ कनाडा, ब्रिटेन और अमेरिका में वैसेक्टमी की दर क्रमशः 21.7%, 21% और 10.8 फ़ीसद थी.
अमेरिका में 23 वर्षीय कंटेंट क्रिएटर कीथ लाउस और एक बेटी के पिता ने उस समय वैसेक्टमी करवा ली जब उनकी पार्टनर को अन्य गर्भनिरोधक उपाय का ख़राब अनुभव मिला.
वे कहते हैं, "पति-पत्नी में से किसी एक को नसंबदी करानी थी तो मेरे लिए यह एक आसान फ़ैसला था."
साथ ही वे यह भी कहते हैं, "मेरा मानना है कि महिलाओं को बच्चे के जन्म और उसके नियंत्रण, दोनों की ज़िम्मेदारी नहीं दी जानी चाहिए."
अमेरिका के यूटा यूनिवर्सिटी में यूरोलॉजी सर्जरी के असिस्टेंट प्रोफ़ेसर अलेक्जेंडर पास्तज़क कहते हैं कि वैसेक्टमी के लिए आने वाले अधिकांश पुरुष बताते हैं कि वो ये इसलिए करवा रहे हैं क्योंकि "उनकी पत्नी ने उनसे ऐसा करने को कहा है."
भारतीय समाज में स्त्री समानता और उसकी वास्तविकता के परिदृश्य बहुत अलग हैं.
उस पर भी बात अगर पुरुषों की नसबंदी की करें तो यह एक तरह से टैबू माना जाता है जिसके बारे में लोग बात करना भी वर्जित मानते हैं.
वैसेक्टमी क्या है?
लेकिन वैसेक्टमी से भारतीय पुरुष कतराते क्यों हैं?
गुवाहाटी अपोलो एक्सेलकेयर हॉस्पिटल में वरिष्ठ यूरोलॉजिस्ट डॉ. जॉय नारायण चक्रवर्ती बताते हैं, "वैसेक्टमी (पुरुष नसबंदी) वो सर्जरी है जिसमें पुरुषों के टेस्टिकल में एक कट (चीरा) लगा कर स्पर्म (शुक्राणु) को बाहर ले जाने वाली ट्यूब को काट दिया जाता है."
वे कहते हैं, "ये सर्जरी आमतौर पर लोकल एनेस्थीसिया की मदद से की जाती है यानी वैसेक्टमी कराने वाला शख़्स होश में होता है और उसे कोई दर्द महसूस नहीं होता. इस सर्जरी में बहुत कम समय लगता है."
साथ ही वे यह भी बताते हैं कि वैसेक्टमी की सर्जरी लगभग 20 मिनट की होती है.
भारत सरकार के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक़ वैसेक्टमी गर्भनिरोधक के रूप में 99 फ़ीसद कारगर है.
लेकिन वैसेक्टमी को लेकर कई तरह के मिथक भी जुड़े हैं मसलन इससे यौन क्रिया में परेशानी आती है.
डॉ. जॉय चक्रवर्ती कहते हैं, "यह कोरी कल्पना है, भ्रांति है, मिथक है कि वैसेक्टमी के बाद यौन क्रिया में किसी तरह की रुकावट आती है."
वे बताते हैं, "वैसेक्टमी प्रक्रिया में इरेक्शन के लिए ज़िम्मेदार नस को न छुआ जाता और न ही काटा जाता है. वीर्य बनना जारी रहता है और उसे बाहर ले जाने वाली ट्यूब भी सुरक्षित रहती है. इससे सेक्स की इच्छा और यौन क्रिया में कोई फ़र्क़ नहीं आता."
राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन की रिपोर्ट के मुताबिक़ वैसेक्टमी के बाद टेस्टिक्ल्स से स्पर्म (शुक्राणु) बनना जारी रहते हैं. वैसेक्टमी के बाद टेस्टिस में जो स्पर्म सेल बनते हैं वो ट्यूब कटे होने की वजह से वीर्य के साथ नहीं बल्कि आपके शरीर में ही घुल जाते हैं.
इसमें साफ़ किया गया है कि वैसेक्टमी की वजह से न तो मोटापा बढ़ता है, न शरीर कमज़ोर पड़ता है और पुरुष पहले की तरह ही कड़ी मेहनत कर सकते हैं.
स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के यूरोलॉजी विभाग के शोधकर्ताओं के मुताबिक़ 1973 में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के गर्भपात के अधिकार पर प्रतिबंध लगाने के बाद वैसेक्टमी के मामले में वृद्धि देखी गई.
दुनिया के कई देशों में वैसेक्टमी को लेकर यह ट्रेंड देखने को मिला है. यहां तक कि गूगल ट्रेंड सर्च में भी वैसेक्टमी शब्द के सर्च में 850 फ़ीसद की बढ़ोतरी देखने को मिली.
न्यूयॉर्क, कैलिफ़ोर्निया, फ़्लोरिडा, आयोवा और अन्य जगहों पर 30 से कम उम्र के लड़कों के बीच वैसेक्टमी करवाने के मामले दो गुने हो गए.
वहां 2007 से 2009 के बीच 18 से 45 साल के पुरुषों के वैसेक्टमी करवाने के मामले में 34 फ़ीसद का इज़ाफ़ा हुआ.
सर्जरी कहां करवानी चाहिए?
मुंबई के हिंदुजा अस्पताल में यूरोलॉजिस्ट डॉक्टर सोनी मेहता कहते हैं कि यह सर्जरी सरकारी अस्पताल में करवाई जा सकती है.
डॉ. जॉय चक्रवर्ती ज़ोर देकर कहते हैं, "सरकारी अस्पताल में इस सर्जरी के पैसे नहीं लगते तो आपको ये वहीं करवानी चाहिए."
साथ ही वे कहते हैं, "अगर आप निजी अस्पताल में करवाना चाहते हैं तो वहां की सुविधा के अनुसार आपको पैसे खर्च करने पड़ते हैं."
सर्जरी के बाद और पहले कोई एहतियात बरतने के सवाल पर वे बताते हैं, "कोई विशेष एहतियात बरतने की ज़रूरत नहीं पड़ती. हां, अगर आप डायबिटिक हैं तो सर्जरी से पहले शुगर लेवल नॉर्मल होना चाहिए."
क्या किडनी या प्रोस्टेट की समस्या वाले भी अगर ये सर्जरी करवाना चाहें तो करवा सकते हैं? इस पर वे बोले हां, इसे कोई भी सामान्य व्यक्ति करवा सकता है.
वहीं सेक्स लाइफ़ पर इसके असर को लेकर डॉक्टर सोनी बताते हैं, "इस सर्जरी के बाद लगभग छह महीने तक आपके सीमेन (वीर्य) में स्पर्म (शुक्राणु) आते रह सकते हैं लिहाजा कंडोम जैसे एहतियात का इस्तेमाल करते रहना चाहिए."
ये कैसे पता चलेगा कि आपका सीमेन शुक्राणु रहित हो चुका है?
इस पर डॉक्टर सोनी कहते हैं, "इसके लिए सीमेन एनालिसिस टेस्ट किया जाता है."
इस टेस्ट को नसबंदी परीक्षण या वीर्य विश्लेषण भी कहा जाता है.
इसके लिए नमूना देने से पहले इस बात का ध्यान रखें कि दो-तीन दिन किसी भी प्रकार का यौन संबंध, यौन क्रिया न करें.
ऐसा करने से वीर्य में शुक्राणुओं की संख्या अपने उच्चतम स्तर पर होती है.
वैसेक्टमी से जुड़े ज़रूरी सवाल
वर्षों से यह चिंता रही है कि वैसेक्टमी से क्या पुरुषों के स्वास्थ्य पर भविष्य में कोई नकारात्मक असर पड़ता है?
राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन की रिपोर्ट में बताया गया है कि कई सूक्ष्म विश्लेषण करते शोध रिपोर्ट में यह पाया गया है कि वैसेक्टमी का दिल की बीमारी, टेस्टिकुलर, या प्रोस्टेट कैंसर, प्रतिरक्षा प्रणाली यानी इम्यून सिस्टम के बिगड़ने या अन्य किसी भी तरह के रोग से कोई संबंध नहीं है और न ही इस तरह की बीमारियों पर इस ऑपरेशन का कोई प्रतिकूल असर पड़ता है.
वैसेक्टमी के बाद क्या यौन संक्रमण से होनी वाली बीमारियां भी नहीं होतीं?
भारत सरकार के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय की रिपोर्ट में स्पष्ट तौर पर लिखा गया है कि वैसेक्टमी यौन संक्रमण से होने वाली बीमारियों (एसटीआई) को दूसरे के शरीर में प्रवेश करने से नहीं रोक सकता है. उसके लिए कंडोम का इस्तेमाल ही सबसे कारगर उपायों में से है.
क्या वैसेक्टमी की सर्जरी को रिवर्स किया जा सकता है?
भारत सरकार के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय की रिपोर्ट में लिखा गया है कि ऐसा बिल्कुल किया जा सकता है.
हालांकि वैसेक्टमी करवाने वाले पुरुष को यह बताया जाना ज़रूरी है कि उसे पलटा तो जा सकता है लेकिन इसकी सर्जरी जटिल होती है और इसकी सफलता की गारंटी नहीं दी जा सकती.
जनसंख्या पर नियंत्रण ज़रूरी लेकिन ये भी ध्यान रहे
बढ़ती आबादी भारत के सामने एक विकराल रूप धारण कर रही है.
15 अगस्त को लाल क़िले की प्राचीर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत की आबादी 140 करोड़ बताई.
वहीं संयुक्त राष्ट्र संघ के मुताबिक़ 2050 तक भारत की आबादी 150 करोड़ के पार पहुंच जाएगी.
देश की आज़ादी के बाद जन्म दर को कम करने और जनसंख्या वृद्धि दर को धीमा करने के लक्ष्य के साथ परिवार नियोजन कार्यक्रम शुरू करने वाला भारत दुनिया का पहला देश बना.
बाद के वर्षों ख़ासकर 1972 से 1980 के दौरान परिवार नियोजन जनसंख्या नियंत्रण का एक व्यापक अभियान बन गया.
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