योगी आदित्यनाथ ने विधानसभा में की काशी, मथुरा की बात, बोले- “कृष्ण कन्हैया कहाँ मानने वाले हैं ”

योगी आदित्यनाथ

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इमेज कैप्शन, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश विधानसभा में बजट सत्र के दौरान बुधवार को काशी और मथुरा मुद्दे का ज़िक्र किया.

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को अयोध्या के राम मंदिर का ज़िक्र करते हुए वाराणसी और मथुरा का मुद्दा उठाया.

उत्तर प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के दौरान योगी आदित्यनाथ ने कहा, “ये समाज सैंकड़ों वर्षों से, यहां की आस्था केवल तीन (जगहों) के लिए बात कर रही है. तीन के लिए.”

उन्होंने कहा, “हमने तो केवल तीन जगह मांगी है. अन्य जगहों के बारे में कोई मुद्दा नहीं था.”

यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा, “वो तीन के लिए भी इसलिए कि वो विशिष्ट स्थल हैं. वे सामान्य नहीं हैं. ईश्वर की अवतरण की धरती है. उसको सामान्य स्तर पर नहीं मान सकते. ”

उन्होंने कहा, “अयोध्या का उत्सव लोगों ने देखा. तो नंदी बाबा ने कहा कि हम काहे इंतज़ार करें. उन्होंने भी इंतज़ार किए बगैर रात्रि में बैरिकेड तुड़वा डाले. और हमारे कृष्ण कन्हैया कहां मानने वाले हैं. ”

ज्ञानवापी मस्जिद के व्यास तहखाने में शुरू हुई पूजा

नरेंद्र मोदी और योगी आदित्यनाथ

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इमेज कैप्शन, अयोध्या के राम मंदिर में 22 जनवरी को हुए प्राण प्रतिष्ठा समारोह के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मंदिर की प्रतिकृति देते यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ. साथ में हैं आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत.

अयोध्या में बीती 22 जनवरी को राम मंदिर में रामलला का प्राण प्रतिष्ठा समारोह हुआ. इस समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मौजूद थे.

अयोध्या में सुप्रीम कोर्ट के आदेश से मंदिर बनाया गया है. जिस जगह मंदिर बना है, वहां 1992 तक बाबरी मस्जिद थी, जिसे कारसेवकों ने छह दिसंबर 1992 को गिरा दिया था.

हिंदुओं की मान्यता है कि अयोध्या में जहां राम मंदिर बना है, वहां भगवान राम का जन्म हुआ था.

वाराणसी की ज्ञानवापी मस्जिद पर भी हिंदू पक्ष अपना दावा जताता है. यहां भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक स्थित है.

मान्यताओं के अनुसार मथुरा में भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था. मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर से लगी ईदगाह मस्जिद है. हिंदू पक्ष इस पर भी अपना दावा जताता है.

वाराणसी की एक कोर्ट ने बीते महीने ज्ञानवापी मस्जिद के व्यास तहखाने में हिंदू पक्ष को पूजा का अधिकार दे दिया है. कोर्ट के रिसीवर (जिलाधिकारी) ने आदेश आने के कुछ घंटे बाद ही रात में पूजा शुरू करा दी.

इस मामले में अंजुमन इंतज़ामिया मसाजिद समिति ने हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की है जिसकी सुनवाई चल रही है.

'अयोध्या, काशी, मथुरा के साथ हुआ अन्याय'

काशी विश्वनाथ मंदिर कॉरिडोर का गेट

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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने भाषण में इसी का ज़िक्र किया.

योगी आदित्यनाथ ने कहा, “अयोध्या के साथ अन्याय हुआ. यही हुआ काशी के साथ और यही हुआ था मथुरा के साथ.”

उन्होंने कहा, “जब मैं अन्याय की बात करता हूं तो हमें पांच हज़ार वर्ष पुरानी बात भी याद आने लगती है. उस समय पांडवों के साथ भी अन्याय हुआ था. उस समय कृष्ण गए थे कौरवों के पास. उन्होंने भी कहा था बस दे दो केवल पांच ग्राम रखो अपनी धरती तमाम.”

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि समाज 'सैंकड़ों साल से तीन जगह मांग रहा है.'

उन्होंने कहा कि आज़ादी मिलने के बाद ये मांग पूरी हो जानी चाहिए थी. उन्होंने आरोप लगाया कि ‘वोटबैंक’ की वजह से विवाद खड़ा कर दिया गया.

उन्होंने कहा, “यानी भारत में लोक आस्था का अपमान हो, बहुसंख्यक समाज गिड़गिड़ाए. ये पहली बार देखने को मिला”

'जान बूझकर रोका विकास'

मथुरा में मंदिर मस्जिद

योगी आदित्यनाथ ने आरोप लगाया कि अयोध्या, काशी और मथुरा के विकास को जानबूझकर रोका गया.

योगी आदित्यनाथ ने कहा, “कौन सी मंशा थी कि अयोध्या का विकास ही अवरुद्ध कर दो. काशी का विकास ही अवरुद्ध कर दो. मथुरा वृंदावन के विकास को ही अवरुद्ध कर दो. ”

उन्होंने कहा कि जब मामला न्यायालय में चल रहा था तब भी अयोध्या का विकास किया जा सकता था.

यूपी के सीएम ने कहा, “वहाँ की सड़कों को तो चौड़ा किया जा सकता था न. वहाँ के घाटों का पुनरुद्धार किया जा सकता था. अयोध्या वासियों को बिजली आपूर्ति की जा सकती थी. वहाँ एयरपोर्ट बनाया जा सकता था.”

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योगी आदित्यनाथ ने विरोधी दलों की सरकारों पर सवाल उठाते हुआ कि उनकी सरकार अच्छी नीयत के साथ काम कर रही है.

उन्होंने कहा, “ये तो मुद्दा नीयत का है. हमारी आस्था थी. नीति भी साफ़ थी और नियती भी स्पष्ट थी. हमने बिना रुके, बिना डिगे, बिना झुके. हम लोग अयोध्या भी गए प्रदेश के हर जनपद में गए. अगर मैं अयोध्या और काशी गया हूँ तो नोएडा और बिजनौर भी गया हूँ.”

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उन्हें न वोट बैंक की चिंता है और न ही कुर्सी जाने की.

उन्होंने कहा, “अयोध्या को इसलिए अभिशप्त कर दिया गया था क्योंकि वोट बैंक कट जाएगा. मुझे और मेरी सरकार अयोध्या में दीपोत्सव शुरू करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है.”

उन्होंने कहा, “लोग बोलते थे कि विवाद है. हमने कहा कि मामला एक स्थल विशेष का होगा. न्यायालय में सुनवाई हो रही है. लेकिन अयोध्या का विकास और वहाँ आने वाले श्रद्धालुओं को आप कैसे वंचित रख सकते हैं सुविधाओं से. ”

उपासना स्थल क़ानून 1991

उपासना स्थल कानून

लेकिन संसद में बने उपासना स्थल कानून के तहत 15 अगस्त 1947 को जो धार्मिक स्थान जिस स्वरूप में था, उसी स्वरूप में रहेगा.

उपासना स्थल क़ानून 1991 कहता है कि आज़ादी के समय मौजूद किसी पूजा स्थल का धार्मिक चरित्र बना रहेगा और उसे बदला नहीं जा सकता.

इसके मक़सद और कारण में कहा गया कि ‘पूजा स्थलों के परिवर्तन से संबंधित उठने वाले विवादों को रोकने’ और ‘सांप्रदायिक सद्भाव और शांति बनाए रखने के लिए इसे पास किया गया था.’

इसमें आगे कहा गया है कि आज़ादी के समय मौजूद किसी पूजा स्थल के धार्मिक चरित्र को बदलने के लिए कोई मुक़दमा दायर नहीं किया जा सकता.

हालाँकि यह क़ानून बाबरी मस्जिद-राम जन्मभूमि विवाद पर लागू नहीं होता है.

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