प्राण-प्रतिष्ठा समारोह के बाद क्या कह रहे हैं अयोध्या और कभी दंगा प्रभावित रही कुछ जगहों के मुसलमान
धन्नीपुर (अयोध्या) से अनंत झणाणें, गोधरा (गुजरात) से राॅक्सी गागडेकर छारा, मुंबई से दीपाली जगताप और भोपाल से सलमान रावी की रिपोर्ट.

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अयोध्या के नए बने राम मंदिर में भगवान राम लला की प्राण प्रतिष्ठा का कार्यक्रम सोमवार को संपन्न हो गया.
इस अवसर पर पीएम मोदी के अलावा आरएसएस के मुखिया मोहन भागवत, उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ और राज्यपाल आनंदी बेन पटेल भी मौजूद थीं. इन सबके अलावा वहां देश के कई बड़े उद्योगपति और सिनेमा जगत के बड़े सितारे भी मौजूद थे.
देशभर के हिंदू समुदाय में इस समारोह को लेकर काफ़ी उत्साह देखा गया. लोगों ने पूजा पाठ करने के अलावा जुलूस निकालकर और भोज खिलाकर अपनी खुशियां मनाई.
दूसरी ओर, मुसलमानों में इस कार्यक्रम को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिली. ख़ासकर उन इलाक़ों में जहां कभी 1992 या 2002 में दंगे हुए थे.
अधिकतर मुसलमानों ने कहा कि उन्हें इस कार्यक्रम से कोई दिक्कत नहीं है, क्योंकि हिंदुस्तान में हर किसी को अपने धर्म को मानने की आज़ादी है.
कुछ जगहों पर तो मुसलमानों ने दावा किया कि उन्होंने इस अवसर पर हिंदुओं के उत्सव मनाने की तैयारियों में सहयोग दिया है.
वहीं अयोध्या धाम से क़रीब 20 किलोमीटर दूर धन्नीपुर, जहां मस्जिद बनाने के लिए 5 एकड़ ज़मीन मिली, वहां के मुसलमानों को भी सरकार से उम्मीदें हैं.
क्या सोचते हैं धन्नीपुर के मुसलमान

धन्नीपुर में मस्जिद के अलावा कैंसर अस्पताल और कम्युनिटी किचन भी बनाने की योजना है, लेकिन चार साल बाद भी यहां शिलान्यास तक नहीं हो पाया है.
ऐसे में यहां के मुसलमानों ने कहा कि उन्हें सरकार से उम्मीद है कि राम मंदिर का उद्घाटन हो जाने के बाद शायद सरकार अब मस्जिद निर्माण पर भी ध्यान देगी.
इस पर वहां के स्थानीय निवासी शाबान ख़ानने बीबीसी संवाददाता अनंत झणाणें से हुई बातचीत में कहा, ‘‘मोदी जी कहते हैं ‘सबका साथ, सबका विकास’, उस हिसाब से यहां भी कुछ न कुछ होना चाहिए.’’
उन्होंने बताया कि यहां मस्जिद ही नहीं अस्पताल भी बनना है, इससे उन्हें बहुत ख़ुशी हुई थी कि उनके इलाक़े में अस्पताल आएगा, लेकिन अभी तक इसका काम शुरू नहीं हो पाया है.
शाबान ख़ान ने कहा, ‘‘लेकिन अभी तक एक ईंट भी नहीं रखी गई है, ये कहीं न कहीं दुख का विषय है.’’
वहीं नईम ख़ानकी मांग है कि मस्जिद निर्माण में सरकार को रुचि लेनी चाहिए, लेकिन सरकार अभी तक राम जन्मभूमि में व्यस्त थी.
उन्होंने उम्मीद दिखाते हुए कहा, ‘‘मेरा मानना है कि मंदिर का उद्घाटन हो जाने के बाद हमारी सरकार, हमारे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी यहां का भी संज्ञान लेंगे और यहां का चौमुखी विकास करवाएंगे.’’
गोधरा के मुसलमानों ने क्या कहा

2002 के गुजरात दंगों के समय गोधरा का पोलन बाज़ार हिंसा से बुरी तरह प्रभावित हुआ था.
बीबीसी संवाददाता राॅक्सी गागडेकर छारा ने राम मंदिर के उद्घाटन पर वहां के मुसलमानों से बातचीत की तो लोगों ने उम्मीद जताई कि अब शायद इस विवाद का अंत हो जाएगा.
गोधरा निवासी इम्तियाज़ अब्दुल रहमान ने बीबीसी से कहा, ‘‘बाबा साहेब आंबेडकर ने जो डेमोक्रेसी (संविधान) बनाया है, उसके अनुसार हर किसी को अपने धर्म का पालन करने का अधिकार है. हम उनको बधाई देते हैं कि वे अच्छा रहें और अच्छा करें. शांति का माहौल बनाए रखें.’’
वहीं के रहने वाले रफ़ीक़ तिजोरीवाला ने कहा कि गोधरा का मुसलमान चाहता है कि यह कार्यक्रम भी शांति से पूरा हो जाए, ऐसी सोच रखता है.
वैसे सोमवार को गोधरा में पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियों को किसी भी प्रतिकूल परिस्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैनात देखा गया.
क्या रही मुंबई के मुसलमानों की राय

दिसंबर 1992 में बाबरी मस्जिद के तोड़े जाने के बाद मुंबई में जहां दंगे हुए, उनमें शहर का मोहम्मद अली रोड वाला इलाक़ा भी शामिल था.
सोमवार को भी वहां अच्छी संख्या में पुलिस को तैनात देखा गया. लोग भी अन्य दिनों की तुलना में बाहर कम देखे गए और कई दुकानें भी बंद रहीं.
बीबीसी संवाददाता दीपाली जगताप ने वहां रहने वाले कुछ मुसलमानों से बातचीत करके जानना चाहा कि वे राम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम के बारे में क्या सोचते हैं.
स्थानीय निवासी सरफ़राज़ अहमद ने बीबीसी से कहा, ‘‘सबका अपना अपना मज़हब या धर्म है. वे लोग अपने मंदिर बना रहे हैं, अच्छा है, बनाएं. हम अपना काम कर रहे हैं. उस मामले से किसी मुसलमान को कोई लेना देना नहीं है. वो मंदिर बनाएं या कुछ भी बनाएं, ये उनका धर्म है, वो कर सकते हैं. उससे कोई लेना देना नहीं है.’’
क्या बताया भोपाल के मुसलमानों ने

बाबरी मस्जिद विध्वंस के समय यानी 1992 में मुंबई के बाद जिन जगहों के दंगे ज़्यादा भीषण साबित हुए, उनमें भोपाल भी था.
बीबीसी संवाददाता सलमान रावी ने भोपाल दंगे के केंद्र रहे बुधवारा बाज़ार पहुचंकर वहां के मुसलमानों से प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम के बारे में बात की.
वहां के कुछ मुसलमानों ने बताया कि वे सोमवार को मंदिरों में होने वाले उत्सव और उसकी साफ सफाई और अन्य तैयारियों में सहयोग दिया है.
स्थानीय निवासी रिज़वान ने बताया कि वे सरकार के पीछे चल रहे हैं और यात्रा वगैरह के दौरान शासन प्रशासन को सहयोग दे रहे हैं.
उन्होंने कहा, ‘‘सरकार ने कह कर रखा है कि उनकी यात्रा वगैरह निकलेंगी, उसका हम सब सहयोग कर रहे हैं. उसके लिए कोई विरोध नहीं है. दिल में किसी को खौफ़ नहीं है.’’
बाज़ार में कई दुकानें बंद देखी गईं, इस बारे में रिज़वान से बीबीसी ने जब पूछा तो उन्होंने कहा, ‘‘दुकानें बंद हैं अभी, लेकिन माहौल अच्छा ही है, ख़राब नहीं है.’’

वहीं इतवारा के पार्षद रफ़ीक क़ुरैशी ने बताया कि उन्होंने मंदिरों में सफ़ाई, पुताई और पेड़ छंटाई आदि का काम किया है.
उन्होंने कहा, ‘‘आज के कार्यक्रम की सारी व्यवस्थाएं की है मंदिरों में, ताकि लोगों को ऐसा न लगे कि हम सहयोग नहीं कर रहे हैं. हमारा पूरा सहयोग है.’’
बुधवारा बाज़ार के निवासी निज़ाम ने कहा कि राम तो सबके ही हैं, हिंदू मुस्लिम, सिख, ईसाई सबके हैं.
उन्होंने प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम के बारे में कहा, ‘‘जो हो रहा है, सब अच्छा हो रहा है. उससे हम लोगों को कोई दिक्कत नहीं है, मतलब जो चीज़ें हो रही हैं, वो अपनी जगह पर अच्छी हो रही हैं, उससे कोई आपत्ति नहीं है. भगवान राम सबके ही हैं. हिंदुस्तान एक है.’’
क्या बोले कोयंबटूर के मुसलमान?

तमिलनाडु का कोयंबटूर शहर हिंदू-मुसलमान तनाव का गवाह रहा है.
वहां के रहने वाले सिराजुद्दीन कहते हैं, “सुप्रीम कोर्ट ने अपना फ़ैसला साल 2019 में दे दिया था. उस फ़ैसले में कोर्ट ने ये नहीं कहा कि वहां कभी राम मंदिर था. फ़ैसले में ये भी कहा गया था कि बाबरी मस्जिद को ढहाया गया. मुझे लगता है कि मुसलमानों के साथ जो धोखा हुआ है, 22 जनवरी को उसका जश्न मनाया गया.
कोयंबटूर की ही मुमताज़ कहती हैं, “ये हमारी पूरी क़ौम के साथ नाइंसाफ़ी और धोख़ा है. ये सौ फ़ीसदी राजनीति है. राम और बाबर के बिना बीजेपी का कोई अस्तित्व ही नहीं है. ये सिर्फ़ चुनाव जीतने के लिए किया गया है. ये राम भक्ति नहीं है, क्योंकि कोई भी धर्म हिंसा का समर्थन नहीं करता. भगवान राम और हनुमान भी कभी नहीं चाहेंगे कि किसी और समुदाय के उपासना स्थल पर कब्ज़ा करके उस पर मंदिर बनाया जाए.”
क्या बोले मलेरकोटला के मुसलमान?

पंजाब के मलेरकोटला के मुस्लिम समुदाय ने भी राम मंदिर के उद्घाटन पर अपनी प्रतिक्रिया दी.
मुकर्रम सैफ़ी कहते हैं, “भारतीय जनता पार्टी के लोग लगातार कह रहे हैं कि पूरे देश में इसका जश्न मनाया जाना चाहिए. ये पूरा जश्न भाजपा का है. वो मुसलमानों को मज़ाक उड़ाने की कोशिश कर रहे हैं."
मलेर कोटला के ही रमज़ान सैयद कहते हैं, “क़ायदे से हमें हमारे हिंदू भाइयों के लिए ख़ुश होना चाहिए. जैसे हम, मस्जिद जाने के लिए स्वतंत्र हैं, ईसाई चर्च जाने के लिए, सिख, गुरुद्वारा जाने के लिए, उसी तरह से हिंदू, मंदिर जाने के लिए स्वतंत्र हैं. लेकिन ये वाला मामला अलग है. हर कोई जानता है कि ये चुनावी साल है. सब राजनीति के लिए हो रहा है. धार्मिक मसलों को कोर्ट में ले जाना ठीक नहीं है."
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