ज्ञानवापी मस्जिद के व्यास तहखाने में हिंदू पक्ष को पूजा अधिकार, ये पूरा मामला क्या है?

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    • Author, अनंत झणाणें और उत्पल पाठक
    • पदनाम, वाराणसी से

वाराणसी की एक अदालत ने बुधवार को हिंदू पक्ष को ज्ञानवापी मस्जिद के व्यास तहखाने में पूजा का अधिकार दे दिया है.

कोर्ट के आदेश के बाद हिंदू पक्ष के वकील विष्णु शंकर जैन ने बताया कि जिला प्रशासन को सात दिन के अंदर पूजा कराने के लिए इंतजाम करने को कहा गया है.

हिंदू पक्ष के वकील जैन ने इस फ़ैसले की तुलना राम मंदिर में ताला खोलने के आदेश से की है और कहा है कि ये इस मामले का टर्निंग प्वाइंट है.

हिंदू पक्ष कुछ समय से ज्ञानवापी परिसर में मौजूद एक तहखाने में पूजा का अधिकार मांग रहा था. यह तहखाना मस्जिद परिसर में है.

तो आइए जानते हैं कि उस तहखाने के बारे में जहाँ हिंदुओं को पूजा करने का अधिकार मिला है.

हिन्दू पक्ष का दावा: 1993 तक व्यास तहखाने में होती थी पूजा

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अपनी याचिका में हिंदू पक्ष ने दावा किया है, "परिसर की दक्षिण दिशा में स्थित तहखाने में मूर्ति की पूजा होती थी. दिसंबर 1993 के बाद पुजारी श्री व्यास जी को ज्ञानवापी के बैरिकेड वाले क्षेत्र में घुसने से रोक दिया गया. इस वजह से तहखाने में होने वाले राग, भोग आदि संस्कार भी रुक गए."

हिंदू पक्ष का दावा है कि राज्य सरकार और ज़िला प्रशासन ने बिना किसी कारण तहखाने में पूजा पर रोक लगा दी थी.

हिंदू पक्ष यह भी दावा करता है, "ब्रितानी शासनकाल में भी तहखाने पर व्यास जी के परिवार का कब्ज़ा था और उन्होंने दिसंबर 1993 तक वहां पूजा अर्चना की है."

हिंदू पक्ष का यह भी दावा है कि तहखाने का दरवाज़ा हटा दिया गया है और हिंदू धर्म की पूजा से संबंधित सामग्री, प्राचीन मूर्तियां और धार्मिक महत्व की अन्य सामग्री तहखाने में मौजूद है.

हिंदू पक्ष तहखाने में पूजा का अधिकार जताते हुए कहता हैं, "आवश्यक है कि तहखाने में मौजूद मूर्तियों की नियमित रूप से पूजा की जाए."

अपने मुकदमे में हिंदू पक्ष ने एक रिसीवर को नियुक्त करने की मांग की है जो तहखाने में पूजा करवाने का प्रबंध करे.

ज्ञानवापी मामले में हिंदू पक्ष के वकील विष्णु शंकर जैन

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बनारस के डीएम को बनाया था तहखाने का रिसीवर

17 जनवरी 2024 को हिंदू पक्ष की मांग पर वाराणसी के ज़िला जज अजय कृष्ण विश्वेश ने हिंदू पक्ष की मांग को मानते हुए वाराणसी से ज़िला मजिस्ट्रेट को ज्ञानवापी मस्जिद में दक्षिण की तरफ मौजूद तहखाने (विवादित संपत्ति) का रिसीवर नियुक्त किया.

कोर्ट ने अपने आदेश में लिखा, "रिसीवर ज़िला मजिस्ट्रेट को निर्देश दिया जाता है कि वादग्रस्त संपत्ति को मजिस्ट्रेट अपनी अभिरक्षा में रखें और सुरक्षित रखें. उसके दौरान उसकी स्थिति में कोई परिवर्तन नहीं होने दें.

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ज्ञानवापी के नक़्शे में कहाँ है व्यास जी का तहखाना?

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पहले आपको यह बताते हैं कि जिस व्यासजी के तहखाने में हिंदू पक्ष पूजा अर्चना करने की मांग कर रहा है, आखिरकार वो परिसर के नक़्शे में है कहाँ.

ज्ञानवापी से जुड़े 1936 के दीन मोहम्मद के मुकदमे में अदालत में दाखिल एक नक़्शे में दक्षिण की तरफ अंग्रेजी में लिखा है, "व्यास के स्वामित्व में तहखाना".

सोमनाथ व्यास ने 1991 में ज्ञानवापी की मिलकियत के दावे वाला जो वाद दाखिल किया था, उसमें लगे नक़्शे में भी दक्षिण में "तहखाने का स्वामित्व वादी संख्या 2" के नाम से नज़र आता है.

सोमनाथ व्यास की याचिका के नक़्शे में इस तहखाने के ठीक सामने नंदी को दिखाया गया है और उसकी दाईं ओर गौरीशंकर को. बाईं तरफ बारादरी है जिसके परिसर में व्यास जी की गद्दी, एक कुंआ, पीपल का पेड़ और विनायक को दिखाया गया है. और महाकालेश्वर को बारादरी से सटा हुआ दिखाया है.

नक़्शे में ज्ञानवापी परिसर के इर्द गिर्द सारी ज़मीन पर हिंदू पक्षकारों का कब्ज़ा दिखाया गया है.

दीन मोहम्मद के मामले में लगे हुए नक़्शे में भी व्यास तहखाने के सामने नंदी (नंदेश्वर) और उनके बगल में गौर शंकर को दर्शाया गया है. और बाई तरफ बारादरी और ज्ञानवापी कूप का परिसर है जिसमें एक कुंआ और पीपल का पेड़ भी मौजूद हैं.

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सोमनाथ व्यास की याचिका में तहखाने का विवरण

1991 में सोमनाथ व्यास ने ज्ञानवापी की ज़मीन पर मालिकाना हक़ जताते हुए एक मूल वाद दाखिल किया था.

तब सोमनाथ व्यास 61 साल के थे. पंडित सोमनाथ अपने आप को व्यास ज्ञानवापी परिसर में मौजूद गद्दी के पंडित बताते थे और अदालत में उन्होंने भगवान विश्वेश्वर का सखा बन कर ज्ञानवापी की ज़मीन पर एक टाइटल सूट (मिलकियत का मामला) दाखिल किया था.

उनका दावा था, "प्लाट नंबर 9130 पर ध्वस्त किए गए आदि विश्वेश्वर के मंदिर का कुछ हिस्सा अब भी बाकी है और वो अपनी जगह मौजूद है."

सोमनाथ व्यास ने अपनी याचिका में लिखा था कि दक्षिण में मौजूद 'तहखाना, पूर्व में रहे मंदिर और उसकी ज़मीन 1991 में उनके कब्ज़े में है.'

इसमें यह भी दावा था कि हिंदू यहाँ पूजा करते हैं और उसे आदि विश्वेश्वर का मंदिर मान कर उसकी परिक्रमा करते हैं.

सोमनाथ व्यास का दावा था कि क्योंकि कि तहखाना उनके कब्ज़े में है तो इससे यह साबित होता है कि पूरे प्लाट नंबर 9130 (ज्ञानवापी परिसर) पर उनका कब्ज़ा है. और क्योंकि तहखाने की ज़मीन, उसके नीचे की मिटटी उनके कब्ज़े में है तो उस तर्क से उसके ऊपर मौजूद ढांचे (मस्जिद) पर मालिकाना हक़ भी उनका और हिंदुओं का है.

7 मार्च 2000 को पंडित सोमनाथ व्यास का निधन हो गया और उसके बाद इस मामले में वादी नुमनेर 5 और अदालत में मुक़दमा लड़ने वाले वकील विजय शंकर रस्तोगी स्वयंभू भगवान आदि विश्वेश्वर के सखा बन कर मुक़दमा लड़ते आ रहे हैं.

मुस्लिम पक्ष का क्या है दावा

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मुस्लिम पक्ष का कहना है कि जिस तहखाने में हिन्दू पक्ष पूजा करने का अधिकार मांग रहा है उसमें व्यास नाम के परिवार के किसी शख्स ने कभी पूजा नहीं की है और इसलिए दिसंबर 1993 में तहखाने में पूजा रोकने का सवाल ही नही उठता है.

मस्जिद पक्ष का कहना है कि तहखाने में कोई भी तथाकथित मूर्ती नहीं थी. मस्जिद पक्ष इस बात को भी असत्य बताता है कि अंग्रेज़ों के शासनकाल में व्यास परिवार तहखाने में पूजा करता था.

मस्जिद पक्ष का यह भी दावा है कि तहखाने में व्यास परिवार या किसी भक्त ने कभी भी कोई पूजा नहीं की और उस पर शुरू से ही मस्जिद पक्ष का कब्ज़ा रहा है.

मस्जिद पक्ष का कहना है कि प्लाट नंबर 9130 में 'ज्ञानवापी मस्जिद हज़ारों सालों से चली आ रही है तहखाना भी मस्जिद आलमगीरी (ज्ञानवापी) का हिस्सा है.'

अपनी दलील में मस्जिद पक्ष 1937 के दीन मोहम्मद के फैसले का ज़िक्र करते हुए कहता है कि उस मुक़दमे के फैसले में यह घोषित किया गया कि मस्जिद, उसका प्रांगण और उसके साथ संलंग्न भूमि हनीफा मुस्लिम वक्फ़ की है और मुसलमानों को उसमें पूजा का अधिकार है.

तहखानों के बारे में क्या कहती है एएसआई की रिपोर्ट?

व्यास जी का तहखाना एएसआई की जांच के दायरे में नही था लेकिन एएसआई ने ज्ञानवापी के दूसरे तहखानों की जांच की और उसके बारे में अपने निष्कर्ष दिए.

एएसआई के मुताबिक़, मस्जिद में इबादत के लिए उसके पूर्वी हिस्से में तहखाने बनाए गए और मस्जिद में चबूतरा और ज़्यादा जगह भी बनाई गई ताकि इसमें अधिक से अधिक लोग नमाज़ पढ़ सकें.

एएसआई कहता है कि पूर्वी हिस्से में तहखाने बनाने के लिए मंदिर के स्तंभों का इस्तेमाल किया गया.

एन2 नाम के एक तहखाने में एक स्तंभ का इस्तेमाल किया हुआ जिस पर घंटियां, दीपक रखने जगह और शिलालेख मौजूद हैं.

और एस2 नाम के तहखाने में मिट्टी के नीचे दबी हुई हिंदू देवी देवताओं की मूर्तियां भी बरामद हुईं.

ज्ञानवापी सर्वे की टीम

ज्ञानवापी मामला- अब तक क्या हुआ?

2019: दिसंबर 2019 में अयोध्या राम मंदिर फ़ैसले के क़रीब एक महीने बाद वाराणसी सिविल कोर्ट में नई याचिका दाख़िल करके ज्ञानवापी मस्जिद का सर्वे कराने की माँग की गई.

2020: वाराणसी के सिविल कोर्ट से मूल याचिका पर सुनवाई की माँग की गई.

2020: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने सिविल कोर्ट की कार्यवाही पर रोक लगाई और फिर इस मामले पर फ़ैसला सुरक्षित रखा.

2021: हाई कोर्ट की रोक के बावजूद वाराणसी सिविल कोर्ट ने अप्रैल में मामला दोबारा खोला और मस्जिद के सर्वे की अनुमति दे दी.

2021: मस्जिद इंतजामिया ने इलाहाबाद हाई कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया और हाई कोर्ट ने फिर सिविल कोर्ट की कार्यवाही पर रोक लगाई और फटकार भी लगाई.

2021: अगस्त में पाँच हिंदू महिलाओं ने वाराणसी सिविल कोर्ट में श्रृंगार गौरी की पूजा की अनुमति के लिए याचिका दाखिल की.

2022: अप्रैल में सिविल कोर्ट ने ज्ञानवापी मस्जिद का सर्वे करने और उसकी वीडियोग्राफ़ी के आदेश दे दिए.

2022: मस्जिद इंतज़ामिया ने कई तकनीकी पहलुओं के आधार पर इस आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती दी, जो ख़ारिज हो गई.

2022: मई में मस्जिद इंतज़ामिया ज्ञानवापी मस्जिद की वीडियोग्राफ़ी को लेकर सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया.

2022: सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शुरू होने से पहले 16 मई को सर्वे की रिपोर्ट फ़ाइल की गई और वाराणसी सिविल कोर्ट ने मस्जिद के अंदर उस इलाक़े को सील करने का आदेश दिया, जहाँ शिवलिंग मिलने का दावा किया गया था. वहाँ नमाज़ पर भी रोक लगा दी गई.

2022: 17 मई को सुप्रीम कोर्ट ने 'शिवलिंग' की सुरक्षा वुजूख़ाने को सील करने का आदेश दिया, लेकिन साथ ही मस्जिद में नमाज़ जारी रखने की अनुमति दे दी.

2022: 20 मई को सुप्रीम कोर्ट ने ये मामला वाराणसी की ज़िला अदालत में भेज दिया, सुप्रीम कोर्ट ने अदालत से यह तय करने को कहा है कि मामले आगे सुनवाई के लायक है या नहीं.

2023: 21 जुलाई को बनारस की अदालत ने दिया एएसआई सर्वे का आदेश.

2023: अगस्त में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सर्वे को अनुमति दे दी.

2024: वाराणसी के ज़िला जज ने ज्ञानवापी की एएसआई सर्वे की रिपोर्ट मामले से जुड़े सभी पक्षों को सौंपने के आदेश दिए.

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