ईरान के सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारी की यौन उत्पीड़न के बाद की थी हत्या: ख़ुफ़िया दस्तावेज़ों ने खोला राज़

निका शकारामी
इमेज कैप्शन, ईरान में महिलाओं के सख़्त ड्रेस कोड के ख़िलाफ़ प्रदर्शन के दौरान जब निका लापता हुई थीं, तो उनकी उम्र महज़ 16 बरस थी
    • Author, बेरट्रैम हिल, एइडा मिलार और माइकल सिमकिन
    • पदनाम, बीबीसी आई इन्वेस्टिगेशंस

ईरान के तीन सुरक्षा कर्मियों ने एक किशोर उम्र लड़की का यौन शोषण करने के बाद उसकी हत्या कर दी थी.

ये राज़ एक सरकारी दस्तावेज़ लीक होने के बाद खुला है. माना जा रहा है कि ये दस्तावेज़ ईरान के सुरक्षा बलों ने ही तैयार किया था.

इस दस्तावेज़ की मदद से हमें ये पता लगा पाने में काफ़ी मदद मिली कि 16 बरस की निका शकारामी आख़िर 2022 के सरकार विरोधी प्रदर्शनों के दौरान कहां ग़ायब हो गई थीं.

निका का शव लापता होने के नौ दिनों बाद बरामद हुआ था. ईरान की हुकूमत ने दावा किया था कि निका ने ख़ुद ही अपनी जान ली थी.

हमने ईरान की सरकारी रिपोर्ट के आरोपों के बारे में वहां की सरकार और रिवोल्यूशनरी गार्ड्स से जवाब मांगा. लेकिन, उन्होंने इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी.

इस रिपोर्ट को 'बेहद गोपनीय' के दर्जे में रखा गया है. इसमें ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कोर (आईआरजीसी) के निका के मामले की सुनवाई का ब्योरा दिया गया है.

रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ईरान का वो सुरक्षा बल है, जो देश के इस्लामिक तंत्र की हिफ़ाज़त करता है.

इस रिपोर्ट में निका के हत्यारों के अलावा रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के उन वरिष्ठ कमांडरों के भी नाम हैं, जिन्होंने सच्चाई छुपाने की कोशिश की थी.

इस सरकारी दस्तावेज़ में निका की हत्या के पहले और उसके बाद की घटनाओं के बहुत परेशान करने वाले ब्यौरे दर्ज किए गए हैं.

इनमें एक ख़ुफ़िया वैन का ज़िक्र है, जिसमें सुरक्षा बलों ने निका को क़ैद करके रखा था. इस रिपोर्ट में लिखा हुआ है कि:

  • एक शख़्स निका के ऊपर बैठा हुई था, और उसने निका का यौन उत्पीड़न किया.
  • हथकड़ी लगाने और बंधक बनाए जाने के बावजूद निका ने पूरी ताक़त से विरोध जताया. उसने हाथ-पैर चलाए और गालियां दीं.
  • इस रिपोर्ट में ये भी स्वीकार किया गया है कि निका के पुरज़ोर विरोध की वजह से उसे गिरफ़्तार करने वाले सुरक्षाकर्मी भड़क गए और उन्होंने निका को डंडों से पीटा था.
निका शकारामी
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ईरान के बहुत से नक़ली सरकारी दस्तावेज़ भी चलन में हैं. इसीलिए, बीबीसी ने इस दस्तावेज़ में दर्ज बातों की कई महीनों तक दूसरे स्रोतों से तस्दीक़ करने की कोशिश की.

हमारी व्यापक पड़ताल से संकेत मिलता है कि हमने जो काग़ज़ात हासिल किए थे, वो वाक़ई में निका के अंतिम वक़्त की गवाही देने वाले हैं.

निका शकारामी की गुमशुदगी और फिर उसकी मौत की घटना की बड़े पैमाने पर चर्चा हुई थी. उसकी तस्वीर ईरान की महिलाओं की ज़्यादा आज़ादी हासिल करने की जंग की प्रतीक बन गई थी.

जब 2022 के पतझड़ के दिनों में ईरान की सड़कों पर विरोध प्रदर्शन अपने उरूज पर थे, तब हिजाब पहनने के हुकूमत के सख़्त और अनिवार्य नियम का विरोध कर रहे प्रदर्शनकारी निका के नाम से नारे लगाया करते थे.

ईरान में 'औरत, ज़िंदगी, आज़ादी की मुहिम' नाम से चलाए गए ये विरोध प्रदर्शन निका की मौत के कुछ दिन पहले ही शुरू हुए थे.

इत्तिफ़ाक़ से इन प्रदर्शनों की शुरुआत 22 साल की एक महिला महसा अमीनी की मौत के बाद भड़क उठे थे.

संयुक्त राष्ट्र के एक तहक़ीक़ात करने वाले मिशन के मुताबिक़ महसा अमीनी की मौत पुलिस हिरासत में लगी चोटों की वजह से हुई थी.

पुलिस ने महसा पर हिजाब न पहनने का इल्ज़ाम लगाकर उसे हिरासत में लिया था.

निका के मामले की बात करें, तो उनके परिवार को उनकी लाश, प्रदर्शन के दौरान लापता होने के एक हफ़्ते से भी ज़्यादा वक़्त के बाद एक मुर्दाघर से मिली थी.

लेकिन, ईरान के अधिकारियों ने इस बात से इनकार किया था कि उनकी मौत का ताल्लुक़, विरोध प्रदर्शनों से है.

ख़ुद अपनी तफ़्तीश करने के बाद ईरान के अधिकारियों ने दावा किया था कि निका ने ख़ुदकुशी कर ली थी.

लापता होने से ठीक पहले 20 सितंबर को निका को तेहरान के मध्य में स्थित लालेह पार्क के पास बनाए गए एक वीडियो में देखा गया था. वो कचरे के एक डिब्बे पर खड़े होकर हिजाबों को आग लगा रही थीं.

इस वीडियो में उनके इर्द-गिर्द खड़े लोग 'तानाशाही मुर्दाबाद' के नारे लगा रहे थे. प्रदर्शनकारियों के निशाने पर ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली ख़मेनेई थे.

ईरान की सरकारी ख़ुफ़िया रिपोर्ट से पता चलता है सुरक्षा बल निका पर नज़र रख रहे थे. हालांकि, उस वक़्त शायद निका को शायद इसका अंदाज़ा भी नहीं रहा होगा.

निका शकारामी

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ये रिपोर्ट इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कोर के कमांडर को भेजी गई है. इसमें उन टीमों से बात की गई है, जो विरोध प्रदर्शनों की निगरानी कर रहे थे.

इस दस्तावेज़ की शुरुआत ये बताने से होती है कि उस दौरान विरोध प्रदर्शनों की निगरानी के लिए कई ख़ुफ़िया इकाइयां तैनात की गई थीं.

रिपोर्ट में बताया गया है कि इनमें से एक, टीम 12 थी. उसको शक था कि निका ही इन प्रदर्शनों की 'अगुवाई' कर रही है.

इस शक की बुनियाद निका का अजीब-ओ-ग़रीब बर्ताव और बार बार उसके मोबाइल पर लगातार आ रहे फोन कॉल थे.

टीम 12 ने अपने एक सदस्य को भीड़ में प्रदर्शनकारी बनाकर भेजा, ताकि वो इस बात की तस्दीक़ कर सके कि निका वाक़ई में प्रदर्शनकारियों की एक नेता थी. रिपोर्ट के मुताबिक़, इसके बाद उस सुरक्षाकर्मी ने अपनी टीम को कहा कि वो निका को गिरफ़्तार कर ले. लेकिन, निका वहां से भाग निकली.

निका की चाची ने पहले बीबीसी पर्शियन को बताया था कि उस रात निका ने अपनी एक दोस्त को फोन करके ख़बर दी थी कि सुरक्षा बल उसका पीछा कर रहे हैं.

रिपोर्ट के मुताबिक़, लगभग एक घंटे बाद निका फिर से देखी गई. इस बार सुरक्षा कर्मियों ने निका को हिरासत में ले लिया और उसे अपनी टीम की गाड़ी में डाल दिया.

ये एक फ्रीज़र वैन थी, जिस पर कहीं नहीं लिखा था कि वो सुरक्षाबलों की गाड़ी है.

निका शकारामी

निका वैन के पिछले हिस्से में टीम 12 के तीन सदस्यों- अराश कल्होर, सादेग़ मोंजाज़े और बहरूज़ सादेग़ी के साथ थी

उनकी टीम का लीडर मुर्तज़ा जलील आगे वैन के ड्राइवर के साथ बैठा हुआ था.

सुरक्षा बलों के इस गुट ने पहले कोई ऐसा ठिकाना तलाशने की कोशिश की, जहां वो निका को लेकर जा सकें.

उन्होंने पास ही बनाए गए पुलिस के एक अस्थायी शिविर का रुख़ किया. लेकिन पुलिसवालों ने उन्हें लौटा दिया, क्योंकि कैंप मे पहले ही बहुत भीड़ थी.

इसके बाद टीम 12 निकिता को लेकर एक नज़रबंदी शिविर पहुंची, जो उसकी गिरफ़्तारी वाली जगह से लगभग 35 मिनट की दूरी पर थी.

पहले तो इस नज़रबंदी शिविर का कमांडर निका को अपने यहां रखने के लिए तैयार हो गया था. लेकिन, बाद में उसका मन बदल गया.

उस नज़रबंदी शिविर के कमांडर ने जांच करने वालों को बताया कि "आरोपी (निका) लगातार गालियां दे रही थी और नारे लगा रही थी."

उसने बताया कि, "उस समय उसके शिविर में 14 और महिलाएं मौजूद थीं और मुझे लगा कि वो उन सबको भी भड़का देगी. मुझे फ़िक्र इस बात की थी कि कहीं वो मेरे यहां बलवा न भड़का दे."

रिपोर्ट में बताया गया है कि इसके बाद टीम 12 के अगुवा मुर्तज़ा जलील ने एक बार फिर रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कोर के मुख्यालय से संपर्क किया और सलाह मांगी कि वो क्या करे. तब उसको बताया गया कि वो निका को तेहरान की बदनाम एविन जेल में ले जाए.

मुर्तज़ा ने बताया कि जब वो जेल के रास्ते में थे, तभी उसे वैन के पीछे वाले हिस्से से शोर और टकराने की आवाज़ सुनाई थी.

हमें पता है कि मुर्तज़ा को क्या सुनाई दे रहा था. इसकी गवाही वो दस्तावेज़ देता है, जिसमें वैन के पिछले हिस्से में निका पर नज़र रखने वाले सुरक्षा कर्मियों का बयान दर्ज है.

निका शकारामी

उनमें से एक, बहरूज़ सादेग़ी ने कहा कि जब नज़रबंदी शिविर ने उन सबको लौटा दिया और वो निका को दोबारा वैन में ले आए, तो निका ने गाली गलौज करना और चीख़ना शुरू कर दिया था.

बहरूज़ ने इस घटना की जांच करने वालों को बताया, "अराश कल्होर ने अपनी जुराबों से उसका मुंह दबा दिया. लेकिन वो हाथ पैर चलाकर विरोध करने लगी. इसके बाद सादेग़ (मोंजाज़े) फ्रीज़र के ऊपरी हिस्से पर सवार हो गया. इसके बाद हालात क़ाबू में आ गए."

उसने आगे बताया कि, "मुझे नहीं पता कि असल में क्या हुआ. लेकिन, कुछ मिनटों के बाद वो फिर गाली देने लगी. मैं कुछ देख नहीं पा रहा था. मैं बस उसके लड़ने और हाथा-पाई करने की आवाज़ें सुन पा रहा था."

इसके आगे की बेहद डरावनी हक़ीक़त ख़ुद अराश कल्होर ने बयान की है.

रिपोर्ट के मुताबिक़ अराश ने कहा कि उसने थोड़ी देर के लिए अपने मोबाइल फोन की टॉर्च चलाई और देखा कि सादेग़ मोंजाज़ी ने अपना हाथ उसकी पैंट के अंदर डाला हुआ था.

अराश ने कहा कि ये देखकर उसका दिमाग़ फिर गया.

उसने कहा कि, "उसे ये तो नहीं पता कि ये कौन कर रहा था. लेकिन, उसे सुनाई दे रहा था कि डंडे से निका की पिटाई हो रही थी… मैंने हाथ पैर चलाना और घूंसा मारना शुरू कर दिया. लेकिन, सच तो ये है कि मुझे ये नहीं पता था कि मैं उसको मार रहा था या अपने ही किसी आदमी को."

लेकिन, सादेग़ मोंजाज़ी ने अराश कल्होर के बयान के उलट जानकारी दी. उसने बताया कि वो अराश से जल भुनकर गया था. उसने निका के ट्राउज़र में हाथ डालने की बात से भी इनकार किया. हालांकि, उसने इस बात से इनकार नहीं किया कि वो उसके ऊपर बैठे बैठे "उत्तेजित हो गया था" और उसने निका के नितंबों को छुआ था.

उसने बताया कि इस बात से निका भड़क गई. जबकि उसके हाथ पीछे बंधे हुए थे. मगर उसने इतनी ज़ोर से धक्का दिया कि मोंजाज़ी उसके ऊपर से गिर पड़ा.

निका शकारामी

"उसने मेरे मुंह पर लात मारी तो मुझे अपनी हिफ़ाज़त करनी पड़ी."

वहीं, वैन के केबिन में बैठे मुर्तज़ा जलील ने ड्राइवर को वैन रोकने का हुक्म दिया.

उसने बताया कि उसने निका के चेहरे और सिर से ख़ून साफ किया, "दोनों ही अच्छी हालत में नहीं दिख रहे थे."

ये वो हालात हैं, जिनमें आख़िरकार निका की लाश उसकी मां को मुर्दाघर से मिली थी.

अक्टूबर में बीबीसी पर्शियन ने निका का जो मृत्यु प्रमाणपत्र हासिल किया था, उसमें लिखा हुआ था कि निका की मौत "किसी मज़बूत चीज़ से बार बार पिटाई करने की वजह से आई चोटों से हुई थी."

टीम 12 के अगुवा मुर्तज़ा जलील ने माना कि उसने ये पता लगाने की कोशिश नहीं की थी कि आख़िर वैन के पिछले हिस्से में हुआ क्या था.

उसने जांच करने वालों को बताया कि, "मैं केवल ये सोच रहा था कि उसे कहां ठिकाने लगाया जाए और मैंने किसी से कोई सवाल नहीं किया. मैंने सिर्फ़ ये पूछा कि 'उसकी सांस चल रही है क्या?' मुझे लगता है कि बहरूज़ सादेग़ी ने जवाब दिया था कि 'नहीं. वो मर चुकी है'."

अपनी टीम के हाथों मौत होने के बाद मुर्तज़ा जलील ने तीसरी बार आईआरजीसी के मुख्यालय को फ़ोन किया.

इस बार उसने फोन पर और बड़े अधिकारी से बात की, जिसका कोड नेम 'नईम 16' था.

नईम 16 ने जांच करने वाले अधिकारियों को बताया कि, "हमारे ठिकानों पर पहले ही कई मौतें हो चुकी थीं. मैं इस तादाद को बढ़ाकर 20 तक नहीं पहुंचाना चाहता था. उसे हमारे अड्डे तक लाने से हमारे किसी मसले का हल तो होना नहीं था."

नईम 16 ने जलील से कहा कि वो "उसे सड़क पर फेंक दे." जलील ने बताया कि उन्होंने निका की लाश को तेहरान के यादगार-ए-इमाम हाइवे की एक ख़ामोश गली में फेंक दिया.

रिपोर्ट में ये नतीजा निकाला गया है कि निका पर यौन हमले की वजह से वैन के पिछले हिस्से में झगड़ा होने लगा और टीम 12 के सदस्यों की पिटाई से निका की मौत हो गई.

रिपोर्ट के मुताबिक़, "तीन डंडों और तीन टेज़र का इस्तेमाल किया गया था. ये साफ़ नहीं है कि किसका हमला निका के लिए जानलेवा साबित हुआ."

लापता होने से ठीक पहले 20 सितंबर को निका को तेहरान के मध्य में स्थित लालेह पार्क के पास बनाए गए एक वीडियो में देखा गया था. वो कचरे के एक डिब्बे पर खड़े होकर हिजाबों को आग लगा रही थीं

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इमेज कैप्शन, लापता होने से ठीक पहले 20 सितंबर को निका को तेहरान के मध्य में स्थित लालेह पार्क के पास बनाए गए एक वीडियो में देखा गया था. वो कचरे के एक डिब्बे पर खड़े होकर हिजाबों को आग लगा रही थीं

ये ख़ुफ़िया रिपोर्ट ईरान की सरकार के उस बयान से ठीक उलट है, जिसमें निका की मौत की दूसरी वजह बताई गई थी. निका को दफ़्न किए जाने के लगभग एक महीने बाद, ईरान के सरकारी टीवी चैनल पर इस आधिकारिक जांच के नतीजों की जानकारी दी गई थी. इसमें बताया गया था कि निका ने एक इमारत से कूदकर जान दे दी थी.

सरकारी चैनल की इस रिपोर्ट में एक शख़्स के सीसीटीवी की तस्वीरें भी दिखाई गई थीं. वो दावा कर रहा था कि निका एक बहुमंज़िला इमारत में दाख़िल हो रही थी और उसकी तस्वीर सीसीटीवी कैमरे में क़ैद हो गई थी. लेकिन, निका की मां ने बीबीसी पर्शियन को फोन पर दिए इंटरव्यू में बताया था कि वो "किसी भी सूरत में इस बात की तस्दीक़ नहीं कर सकती थीं कि सीसीटीवी में दिख रही महिला निका ही थी."

निका की मां नसरीन शकारामी ने बाद में बीबीसी की एक डॉक्यूमेंट्री में प्रदर्शनकारियों की मौत को लेकर अधिकारियों के दावों पर चर्चा करते हुए बताया था कि, "हम सबको पता है कि वो झूठ बोल रहे हैं."

बीबीसी आई में हमने जो जांच की, उसका मक़सद केवल इस रिपोर्ट के तथ्यों की पड़ताल तक सीमित नहीं था. बल्कि, हम ये भी पता लगाना चाहते थे कि इसमें जो दावे किए गए थे, उन पर भरोसा भी किया जा सकता है, या फिर ये सिर्फ़ गढ़ी हुई कहानी है.

कई बार होता ये है कि हम इंटरनेट पर जिन प्रचलित दस्तावेज़ों और दूसरे काग़ज़ात को ईरान का आधिकारिक दस्तावेज़ मान लेते हैं, वो बाद में फ़र्ज़ी पाए गए हैं.

हालांकि, इनमें से ज़्यादातर नक़ली दस्तावेज़ों का पता लगाना बहुत आसान है. क्योंकि, वो आधिकारिक रिपोर्ट के स्वरूप से बिल्कुल अलग होते हैं. उनमें शब्दों के बीच हाशिया ग़लत होता है. चिट्ठियों का शीर्षक अलग होता है या फिर उनमें व्याकरण और हिज्जे की कई ग़लतियां होती हैं.

ऐसे नक़ली दस्तावेज़ों में ग़लत आधिकारिक नारे या फिर लोगो ग़लत होते हैं. मिसाल के तौर पर इनमें उस साल के सरकारी नारे नहीं लिखे होते, जिस साल का काग़ज़ होने का दावा किया जाता है.

नक़ली दस्तावेज़ पकड़ने का एक और तरीक़ा उनकी ज़ुबान होती है, जो ईरान की आधिकारिक संस्थाओं की विशेष तरह से लिखी जाने वाली भाषा से बिल्कुल अलग होती है.

हमने जिस दस्तावेज़ की पड़ताल की थी, उसमें ऐसी कमियां बहुत कम पायी गईं. मिसाल के तौर पर जिस वक़्त की ये रिपोर्ट है और इसमें जिस 'नाजा' पुलिस बल का ज़िक्र है, उसे उस वक़्त 'फ़राजा' के नाम से जाना जाता था.

इसीलिए, इस दस्तावेज़ की प्रामाणिकता की पुष्टि के लिए हमने इसे ईरान के एक पूर्व ख़ुफ़िया अधिकारी को दिखाया. उन्होंने सैकड़ों ऐसे वैध दस्तावेज़ देखे हुए हैं.

उन्होंने आईआरजीसी के आर्काइव में जाकर इसकी पड़ताल की. इसके लिए उन्होंने एक आधिकारिक कोड का इस्तेमाल किया, जो ईरान में हर सीनियर अधिकारी को रोज़ दिया जाता है. इस पूर्व ख़ुफ़िया अधिकारी ने आर्काइव में जाकर चेक किया कि क्या ये रिपोर्ट वाक़ई में मौजूद थी और ये किस मामले से जुड़ी हुई थी.

इस अधिकारी को इस बात की तस्दीक़ मिल गई कि ये रिपोर्ट वाक़ई तैयार की गई थी. और, इसका नंबर ये बता रहा था कि ये रिपोर्ट 2022 के विरोध प्रदर्शनों पर जमा की गई 322 पेज की एक फाइल का हिस्सा थी.

हम कभी भी इस बात पर सौ फ़ीसद निश्चिंत नहीं हो सकते. मगर इस पूर्व ख़ुफ़िया अधिकारी की बातों से हमें ये विश्वास हो गया कि ये रिपोर्ट असली है.

आईआरजीसी के आर्काइव तक उनकी ख़ास पहुंच ने हमें एक और रहस्य से पर्दा उठाने में भी मदद की. ये रहस्य 'नईम 16' नाम के उस अधिकारी का था, जिसने निका की लाश को फेंक देने का आदेश दिया था.

ईरान के पूर्व ख़ुफ़िया अधिकारी ने 'नईम 16' का पता लगाने के लिए एक और फोन कॉल की. इस बार उन्होंने ये फोन ईरान के सुरक्षा तंत्र के किसी शख़्स को किया था. उन्हें बताया गया कि नईम 16 असल में कैप्टन मुहम्मद ज़मानी का कोड नेम है, जो आईआरजीसी में तैनात हैं.

निका की मौत को लेकर पांच घंटे की जो सुनवाई चली थी, उसमें मुहम्मद ज़मानी की मौजूदगी का ज़िक्र भी इस रिपोर्ट में किया गया है.

हमने आईआरजीसी और ईरान की सरकार पर लगे इल्ज़ामों पर उनसे जवाब मांगा. लेकिन, उन्होंने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी.

अब तक हमें जो पता है, उसके मुताबिक़ निका की मौत के लिए ज़िम्मेदार लोगों को कोई सज़ा नहीं दी गई है.

अपनी बड़ी बहन आएदा के साथ निका. अब ऐदा को भी गिरफ़्तार कर लिया गया है

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इमेज कैप्शन, अपनी बड़ी बहन आएदा के साथ निका. अब ऐदा को भी गिरफ़्तार कर लिया गया है

इन लोगों को सज़ा क्यों नहीं दी गई, इसका एक संकेत ईरान के इस ख़ुफ़िया दस्तावेज़ में ही मिल जाता है. टीम 12 के सारे सदस्य जो इस सुनवाई के दौरान मौजूद थे, उन सबके नाम लिखे हुए हैं और इसके दाहिनी ओर उस संगठन का नाम दर्ज है, जिसके वो सदस्य हैं. वो नाम 'हिज़्बुल्लाह' का है.

ये ईरान का एक अर्धसैनिक समूह है, जिसका लेबनान के इसी नाम के संगठन यानी हिज़्बुल्लाह से कोई ताल्लुक़ नहीं है. इस हिज़्बुल्लाह के सदस्यों को आईआरजीसी कई बार अपने लिए इस्तेमाल करता है.

लेकिन, कई बार हिज़्बुल्लाह के सदस्य उसके अधिकार क्षेत्र के बाहर भी काम करते हैं. ऐसा लगता है कि ईरान की इस सरकारी रिपोर्ट में भी ये बात मानी गई है.

रिपोर्ट में कहा गया है कि, "चूंकि ये शख़्स हिज़्बुल्लाह बल से ताल्लुक़ रखते हैं, तो इस मामले पर आगे कार्रवाई करने के लिए ज़रूरी इजाज़त और सुरक्षा की गारंटी हासिल करना मुमकिन नहीं है."

हालांकि, इस रिपोर्ट में ये ज़रूर बताया गया है कि नईम 16 को लिखित रूप से फटकार लगाई गई.

संयुक्त राष्ट्र के तहक़ीक़ात के मिशन के मुताबिक़ ईरान के 'औरत, ज़िंदगी और आज़ादी आंदोलन' के दौरान, सुरक्षा बलों के हाथों कम से कम 551 प्रदर्शनकारियों की मौत हुई थी.

सुरक्षा बलों की ख़ूनी कार्रवाई की वजह से कुछ महीनों बाद ये विरोध प्रदर्शन बंद हो गए थे. इसके बाद ईरान की नैतिकता की निगहबान पुलिस की गतिविधियां भी शांत हो गई थीं.

लेकिन, इसी महीने की शुरुआत में इस्लामिक ड्रेस कोड का उल्लंघन करने के ख़िलाफ़ कार्रवाई की नई मुहिम शुरू की गई थी.

इस मुहिम के दौरान गिरफ़्तार किए गए लोगों में निका की बड़ी बहन आएदा भी शामिल हैं.

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