तूमाज सालेही: ईरानी सरकार की आलोचना करने वाले गायक जिन्हें मौत की सज़ा सुनाई गई

ईरान

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    • Author, मेहरज़ाद फ़तूही
    • पदनाम, बीबीसी वर्ल्ड सर्विस

जब ईरान की एक अदालत ने प्रसिद्ध रैपर तूमाज सालेही को मौत की सज़ा सुनाई तो उनके वकील ने उसे ‘अजीब और बहुत ही असामान्य’ अदालती कार्रवाई बताया.

तूमाज सालेही देश में अपने संगीत के ज़रिए ईरानी सरकार की कठोर नीतियों की आलोचना करते हैं और वह इस मामले में महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं.

उन्हें मौत की सज़ा मिलने का संबंध साल 2022 और साल 2023 के दौरान उन विरोध प्रदर्शनों में शामिल होने से है जिनमें 22 साल की कुर्द युवती की पुलिस के हाथों गिरफ़्तारी के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाई जा रही थी.

ध्यान रहे कि इस कुर्द युवती पर आरोप था कि उसने कथित तौर पर सर पर हिजाब रखने के आदेश को नहीं माना था.

तूमाज सालेही के वकील ने कहा है वे इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ ऊंची अदालत में अपील करेंगे. दूसरी और अदालत की ओर से संकेत मिला है कि अगर ईरानी रैपर शर्मिंदगी ज़ाहिर करेंगे और अदालत से सहयोग करेंगे तो उनकी मौत की सज़ा को लंबे समय की क़ैद में बदला जा सकता है.

सालेही के ख़िलाफ़ इस अदालती फ़ैसले की देश और विदेश में बहुत आलोचना हो रही है और मानवाधिकारों के लिए काम करने वाले कार्यकर्ताओं ने इस पर गंभीर विरोध जताया है.

ईरान की गलियों में ड्राइवर भी विरोध जताने के लिए तूमाज सालेही के गाने बजा रहे हैं.

तूमाज सालेही कौन हैं और उनके ख़िलाफ़ क्या आरोप हैं?

तूमाज सालेही

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तूमाज सालेही 33 साल के लोकप्रिय ईरानी रैपर हैं. उन्होंने अपना बचपन केंद्रीय ईरान के प्रांत इस्फ़हान में अपने परिवार के साथ गुज़ारा.

उनके पिता ने राजनीतिक क़ैदी के तौर पर आठ साल जेल में बिताए.

तूमाज सालेही अपने पारिवारिक व्यापार के साथ जुड़े हैं जो मेडिकल डिवाइस के पुर्ज़े डिज़ाइन करता और बनाता है.

सालेही ने 24 साल की उम्र में गाना शुरू किया. रैपिंग में वह भेदभावपूर्ण व्यवहार, ग़रीबी, भ्रष्टाचार और प्रताड़ना की आलोचना करते दिखाई देते हैं.

लेकिन गायकी की दुनिया में मशहूर होने से पहले उन्हें पहली बार एक ऐसी शर्ट पहनने की वजह से गिरफ़्तार किया गया था जिस पर अमेरिकी डॉलर्स की तस्वीर छपी हुई थी.

कई देशों ने सालेही के साहस को सराहा

कई देशों ने सालेही के साहस को सराहा

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साल 2022 और 2023 में प्रदर्शन से कुछ महीने पहले सालेही ने एक गाना गया जिसका शीर्षक था ‘छिपने के लिए चूहे का बिल ख़रीद लो.’ इस पर उन्हें गिरफ़्तार कर लिया गया था.

इस गाने में उन्होंने इस्लामी गणतंत्र ईरान की नीतियों और देश के अंदर व बाहर इसका समर्थन करने वालों की कड़ी आलोचना की थी. लेकिन इस गिरफ़्तारी के कुछ ही दिन बाद उन्हें ज़मानत पर रिहा कर दिया गया था.

कई देशों ने ईरान सरकार की आलोचना करने पर सालेही के साहस को सराहा है. उदाहरण के लिए इटली के फ़्लोरेंस शहर ने उन्हें मानद नागरिकता दी है.

पिछले साल सालेही को अपने गाने ‘तक़वा’ के लिए ग्लोबल म्यूज़िक अवॉर्ड मिला. इस गाने में वह भविष्य की सरकार के बारे में बताते हैं.

सालेही को मौत की सज़ा देने की घोषणा के बाद उनके समर्थकों ने गिरफ़्तारी के ख़तरे के बावजूद तेहरान के हाईवे पर तख़्तियां लेकर कर प्रदर्शन किया. इस दृश्य को बहुत अधिक शेयर किया गया है.

हिरासत के दौरान मारपीट की शिकायत

अमेरिका में तूमाज सालेही के समर्थन में प्रदर्शन

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साल 2022 में पुलिस की हिरासत में महसा अमीनी की मौत के बाद जब प्रदर्शन शुरू हुए तो सालेही ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट से एक वीडियो संदेश दिया जिसमें सरकार के ख़िलाफ़ खड़े होने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया गया.

दो महीने तक वह गिरफ़्तारी के ख़तरे के कारण भूमिगत रहे लेकिन सुरक्षा बलों ने किसी तरह उन्हें गिरफ़्तार कर लिया.

रिपोर्ट्स से पता चलता है कि सालेही और उनके दोस्तों को गिरफ़्तारी के दौरान हिंसा का निशाना बनाया गया.

इससे संबंधित जो तस्वीरें सामने आईं उनसे पता चलता है कि सालेही को गंभीर चोट लगी थी और उनके चेहरे पर मारपीट के निशान थे. इसके ख़िलाफ़ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफ़ी आलोचना हुई और प्रदर्शन भी हुए थे.

क़रीब ढाई सौ दिनों तक नज़रबंदी और एक साल तक जेल में रहने के बाद नवंबर 2023 के दौरान उन्हें जेल से ज़मानत पर रिहाई मिली.

लेकिन अभी बारह दिन ही गुज़रे थे कि उन्हें दोबारा गिरफ़्तार करके जेल में डाल दिया गया. शुरू में ईरान की अदालत ने दावा किया कि सालेही को ग़लत बातें फैलाने पर दोबारा गिरफ़्तार किया गया है.

मतभेद का संकेत?

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सोशल मीडिया पर सालेही को बहुत समर्थन मिला है और उनके लिए उम्मीद जताई गई है.

मोहसिन बुरहानी एक वकील और ईरानी यूनिवर्सिटी में प्रोफ़ेसर हैं. सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म ‘एक्स’ पर उन्होंने लिखा, “हमें पूरी उम्मीद है कि सालेही की मौत की सज़ा को सुप्रीम कोर्ट रद्द कर देगा.”

कैहान कल्होर प्रसिद्ध ईरानी संगीतकार हैं. उन्होंने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर लिखा, “सालेही को रिहा किया जाना ज़रूरी है. अगर हम चुप रहे तो इसका मतलब है कि हम ज़ुल्म का समर्थन कर रहे हैं.”

जर्मन संसद के एक सदस्य ने सालेही को सुनाई गई मौत की सज़ा को अमानवीय कृत्य बताया है. उन्होंने कहा है, “यह केवल एक बात को ज़ाहिर करता है कि इस्लामी गणतंत्र तूमाज से कितना डरा हुआ है.”

कुछ ईरानी विश्लेषक समझते हैं कि सालेही को दी जाने वाली सज़ा दरअसल सरकार के ख़िलाफ़ विरोध की हर आवाज़ को चुप करने का संदेश है.

एक इंटरव्यू में बीबीसी फ़ारसी से बातचीत में इक़बाल इक़बाली ने तूमाज सालेही को मौत की सज़ा देने के फ़ैसले पर कहा, “इस्लामी गणतंत्र की ओर से यह उन लोगों से प्रतिशोध है… यह एक चेतावनी है कि ईरान के विरोधियों को फांसी दी जाएगी.”

संयुक्त राष्ट्र से जुड़े विशेषज्ञों ने एक बयान में सालेही की तुरंत रिहाई की मांग की है. इस बयान में ईरानी अधिकारियों पर ज़ोर दिया गया है कि वह मौत की सज़ा के फ़ैसले को वापस लें.

विशेषज्ञ कहते हैं कि सरकारी नीतियों की आलोचना अभिव्यक्ति की आज़ादी के अधिकार और सांस्कृतिक जीवन में हिस्सा लेने के अधिकार के तहत सुरक्षित है. इसे अपराध नहीं माना जाना चाहिए.

वह कहते हैं कि कला को किसी भी समाज में आलोचना करने की इजाज़त होनी चाहिए और सीमाओं को आगे बढ़ाने की भी अनुमति होनी चाहिए.

वह कहते हैं कि सालेही के गाने सरकार के लिए कठोर हैं. लेकिन यह सांस्कृतिक अधिकार और कला की अभिव्यक्ति में आज़ादी के प्रतीक हैं.

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