ईरान में प्रदर्शनों को मज़बूत कर रही है सोशल मीडिया की ताक़त

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- Author, फ़ेरानाक आमीदी
- पदनाम, बीबीसी वर्ल्ड सर्विस
ईरान में पिछले छह सप्ताह से सरकार विरोधी प्रदर्शन जारी हैं. महिलाएँ और स्कूली छात्राएँ इनमें सबसे आगे हैं. महिलाएँ अपने हिजाब को जला रही हैं और उन्हें हवा में लहराते हुए नारा लगा रही हैं, "औरत, ज़िंदगी और आज़ादी".
ईरान में ये प्रदर्शन 22 वर्षीय कुर्द युवती महसा अमीनी की मौत के बाद शुरू हुए हैं. आरोप है कि महसा अमीनी ने 'हिजाब सही से नहीं पहना था' और इस वजह से नैतिक पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया था और पुलिस हिरासत में ही उनकी मौत हो गई थी.
महसा के घरवालों का आरोप है कि पुलिस हिरासत में प्रताड़ना से महसा की मौत हुई थी लेकिन पुलिस और सरकार का कहना है कि दिल का दौरा पड़ने के कारण महसा अमीनी की मौत हुई थी.
लेकिन उनकी मौत के बाद हो रहे प्रदर्शनों में हज़ारों लोग सड़कों पर निकले हैं और ईरान में धर्मगुरुओं के ख़िलाफ़ मोर्चा संभाला है.
वहीं ईरान और दुनियाभर में लाखों लोग ऐसे भी हैं, जो सोशल मीडिया के ज़रिए आवाज़ बुलंद कर रहे हैं और इन प्रदर्शनों के बारे में जागरुकता फैला रहे हैं.
धारणाओं को चुनौती देना
ट्विटर पर अपने हैशटैग को ट्रेंड कराना ईरान के लोगों के लिए अपनी आवाज़ को दुनिया तक पहुँचाने का ज़रिया बन गया है.
महसा अमीनी की मौत के बाद एक महीने के भीतर ही हैशटैग #mahsaamini को फ़ारसी भाषा में 25 करोड़ बार और अंग्रेज़ी में पाँच करोड़ बार ट्वीट किया जा चुका है.

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ईरान की महिला अधिकार कार्यकर्ता नेगिन शिरानघाई कहती हैं, "ईरान में लोगों को लगातार ये बताया जा रहा है कि सत्ता का कोई विरोध है ही नहीं और जो छोटा-मोटा विरोध है भी उसे कुचल दिया जाएगा."
"हैशटैग लोगों के लिए एक दूसरे को पहचानने और ताक़त का अहसास कराने में अहम भूमकिा निभा रहे हैं."
आज के नेतृत्वविहीन प्रदर्शन के दौर में हैशटैग नेताओं की भूमिका निभा सकते हैं.
वो कहती हैं, "लोग हैशटैग से क्या चाहते हैं? उम्मीद, दिशानिर्देश और जानकारी. ईरान के प्रदर्शनों में हैशटैग ने अभी तक ये ही किया है."
लेकिन हैशटैग और ट्विटर पर एक साथ किए जाने वाले ट्वीट (ट्विटर स्टॉर्म) उन तरीक़ों में से कुछ एक ही हैं, जिनका इस्तेमाल ईरान के लोग एक दूसरे के बारे में जानने और दुनिया तक संदेश पहुँचाने के लिए कर रहे हैं.
विश्वास को बढ़ाना
ईरान में सरकार आम तौर पर प्रदर्शनों को हिंसक रूप से कुचल देती है.
नार्वे स्थित ईरान ह्यूमन राइट्स संगठन के मुताबिक़ अब तक 253 प्रदर्शनकारी मारे जा चुके हैं, जिनमें 34 बच्चे हैं.
लेकिन ऐसे दुखद और मुश्किल माहौल में भी ईरान के लोग अपने विश्वास को बढ़ाए रखने के लिए व्यंग्य का इस्तेमाल कर रहे हैं.

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ईरान में सरकारी टीवी चैनल के शाम को प्रसारित न्यूज़ बुलेटिन को हैक करके सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह ख़ामेनेई की आग की लिपटों में घिरी तस्वीर चला दी गई थी. लोगों ने इस पर एंकर के हैरान चेहरे पर ख़ूब मीम बनाए.
स्नूप डॉग और केविन हार्ट के अपने टॉक शो में हंसते हुए वायरल वीडियो में भी एंकर के चेहरे को लगाकर शेयर किया गया.
अनिवार्य हिजाब क़ानून और जैसा कि प्रदर्शनकारियों का मानना है कि इस्लामी क़ानून उनकी रोज़मर्रा की ज़िंदगी में दख़ल देते हैं, इन्हें लेकर भी सोशल मीडिया पर ख़ूब निशाना साधा जा रहा है.
प्रदर्शनों के शुरुआती दिनों में, ईरान के बहुत से लोगों ने इंस्टाग्राम और ट्विटर पर अपने प्रदर्शनों में शामिल होने की वजहों को अभिव्यक्त किया जो फ़ारसी वाक्यांश 'बराये…' से शुरू होता था. इसका मतलब होता है, '….की ख़ातिर'.
एक यूज़र @Usaneh_dahr ने ट्वीट किया, "आप (नैतिक पुलिस) जब गुज़रते थे तो हमें अपने संगीत की आवाज़ कम करनी होती थी और अपनी कार में कैसेटों को छुपाना होता था. ये उसी की ख़ातिर है."
ईरान में पश्चिमी पॉप संगीत और ईरान के बाहर बना ईरानी पॉप संगीत प्रतिबंधित है, दशकों से यहाँ पुलिसकर्मी गाड़ियों को रोकते हैं और तलाशी लेते हैं. यहाँ तक उनकी भाषा 'अश्लील संगीत' कहे जाने वाले इस संगीत को रोकने के लिए घरों तक पर छापे मार दिए जाते हैं.
एक अन्य महिला ने ट्वीट किया, "हर उस लड़की की ख़ातिर जिसने पेशेवर डांस स्कूल में जाने के अपने सपने को मार दिया और फिर मेरे अपने लिए."

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ईरान में सार्वजनिक रूप से डांस करने पर रोक है. हालाँकि पुरुषों के कुछ पारंपरिक नृत्यों को इसमें छूट है.
किसी भी परिस्थिति में महिलाओं को सार्वजनिक रूप से गाना गाने या डांस करने की अनुमति नहीं है. हालांकि सिर्फ़ महिलाओं के लिए चलने वाले डांस स्कूल हैं, जो भूमिगत हैं.
साल 2017 में, सरकार ने सिर्फ़ महिलाओं के लिए संचालित होने वाले जिमों में भी जुम्बा क्लास को ग़ैर-इस्लामिक कहते हुए बंद करवा दिया था.
ट्विटर यूज़र @RMshii94 ने विरोध की वजह बताते हुए कहा, "अपनी मातृभाषा के लिए."
ईरान के स्कूलों में नस्लीय अल्पसंख्यकों की भाषाओं को पढ़ाए जाने पर पिछले 43 सालों से प्रतिबंध है. ये ट्वीट उसी के संदर्भ में है.
इस प्रतिबंध का उल्लंघन करने वालों को जेल तक जाना पड़ता है, जैसे कि ज़ारा मोहम्मदी फ़िलहाल पाँच साल की सज़ा काट रही हैं. वो बच्चों को अपनी मातृभाषा कुर्द भाषा सिखा रहीं थीं.
प्रदर्शनों का गीत
ईरान में रहने वाले एक ईरानी पॉप गायक, शेरविन हाजीपुर, ने ऐसे ही ट्वीट को इकट्ठा करके एक गीत बना दिया है जिसका शीर्षक है 'बराये…'

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इंस्टाग्राम पर पोस्ट किए गए उनके वीडियो को पहले 48 घंटों में ही चालीस लाख से अधिक बार देख लिया गया था.
उसके बाद से ये गीत 'बराये…' इन प्रदर्शनों का एंथम बन गया है और इसे दुनियाभर में हो रहे प्रदर्शनों में गाया-बजाया जा रहा है.
हाजीपुर को 29 सितंबर को गिरफ़्तार कर लिया गया था और चार अक्तूबर को ज़मानत पर रिहा किया गया.
हाजीपुर ने रिहा होने के बाद कहा कि उन्हें इस बात का अफ़सोस है कि उनके गीत को ईरान के बाहर राजनीतिक समूह 'कुछ मक़सदों' के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं.

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हालांकि ये स्पष्ट नहीं है कि जब उन्होंने बयान दिया तब वो हिरासत में ही थे या उन्होंने ये वीडियो दबाव में बनाया.
कार्यकर्ताओं के मुताबिक़ ईरान में सरकारी मीडिया आमतौर पर 'स्वीकारोक्ति' के वीडियो विरोध को दबाने के लिए प्रसारित करता है.
बाल काटना
बीते चार दशकों में ईरान में कलाकार सांस्कृतिक और इस्लामी मामलों के मंत्रालय के दिशा-निर्देशों से बचने के तरीक़े निकालते रहे हैं.
फ़ारूज़ान, लॉस एंजेलेस स्थित एक डिजिटल क्रिएटर हैं, वो अपने इंस्टाग्राम पर लगातार प्रदर्शनों के समर्थन में पोस्ट कर रही हैं.
उन्होंने एक कलाकृति बनाई है जिसमें एक युवती ईरान के ऐतिहासिक और चर्चित पुल 'सी-ओ-से पुल' के पास खड़े होकर अपने बाल काट रही है. 17वीं सदी का ये पुल ईरान के इस्फ़ाहान का चर्चित स्मारक है.

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बाल काटना ईरान के प्रदर्शनों का प्रतीक बन गया है और दुनियाभर में महिलाएँ बाल काटकर ईरान की महिलाओं के प्रति समर्थन ज़ाहिर कर रही हैं.
ईरान के भीतर ही रहने वाले बिन्यामिन नाम से पहचाने जाने वाले एक कलाकार ने यूनिटी ऑफ़ फ्रीडम नाम से शॉर्ट वीडियो बनाया है जो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है.
ऑनलाइन इस तरह की सामग्री का लगातार शेयर किया जाने का मतलब ये भी है कि ईरान में प्रदर्शन ख़ामोश नहीं किए जा सके हैं, भले ही सड़कों पर प्रदर्शनों को कुचला जा रहा हो.
नेगिन शीराघई कहती हैं, "एक देश जहाँ कोई मीडिया नहीं है, सोशल मीडिया लोगों का माध्यम बन गया है. ये एक विकेंद्रित मीडिया है जो लोगों को दिखने और सुने जाने का मौक़ा दे रहा है."
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