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जम्मू-कश्मीर ने 42 बार की रणजी चैंपियन मुंबई को मात देकर कैसे किया उलटफेर
- Author, ख़ुर्रम हबीब
- पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए
जम्मू-कश्मीर ने रणजी ट्रॉफी के नॉकआउट चरण में लगभग अपनी जगह पक्की कर ली है.
उन्होंने मुंबई को हराकर बड़ा उलटफेर किया है. इस मुंबई टीम में भारतीय राष्ट्रीय टीम के पांच टेस्ट खिलाड़ी और फ़र्स्ट-क्लास क्रिकेट के कुछ अनुभवी खिलाड़ी शामिल थे.
रोहित शर्मा, यशस्वी जायसवाल, अजिंक्य रहाणे, शार्दुल ठाकुर और श्रेयस अय्यर की मौजूदगी के बावजूद, जम्मू-कश्मीर के गेंदबाज़ी आक्रमण पर कोई असर नहीं पड़ा.
जम्मू-कश्मीर के तेज़ गेंदबाज़ों ने मुंबई को दोनों पारियों में 120 और 290 रन पर समेट दिया.
इस तरह, उन्होंने पांच विकेट से मैच जीत लिया. टीम ने छह मैचों में चार जीत और दो ड्रॉ के साथ 29 अंक हासिल किए हैं.
इन अंकों के साथ जम्मू-कश्मीर टीम ने शीर्ष स्थान हासिल कर लिया है. उसने बड़ौदा और मुंबई, दोनों को पीछे छोड़ दिया है.
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ये बहुत बड़ी जीत क्यों है?
ये यकीनन एक बड़ी जीत है क्योंकि मुंबई, रणजी ट्रॉफी की सबसे सफल टीम है. उसने 42 बार खिताब जीता है. इसके अलावा वह 6 बार फ़ाइनल मैच का हिस्सा रही है.
वहीं, जम्मू-कश्मीर अब तक फ़ाइनल तो क्या, सेमीफ़ाइनल में भी कभी नहीं पहुंची.
सुविधाओं के मामले में जम्मू-कश्मीर, मुंबई के आगे कुछ भी नहीं है.
मुंबई, रणजी ट्रॉफी की संस्थापक टीमों में से एक है, जहां बीसीसीआई का मुख्यालय स्थित है. टीम ने रणजी ट्रॉफी के इतिहास का पहला सीज़न जीता था.
मुंबई के पास वानखेड़े स्टेडियम, क्रिकेट क्लब ऑफ़ इंडिया का ब्रेबोर्न स्टेडियम और शरद पवार स्टेडियम कॉम्प्लेक्स जैसे बड़े और आधुनिक क्रिकेट ग्राउंड हैं.
वानखेड़े स्टेडियम और शरद पवार स्टेडियम, मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन के अपने ग्राउंड हैं.
दूसरी ओर, जम्मू-कश्मीर के पास केवल दो-तीन मैदान हैं, जो या तो कॉलेज या फिर सरकारी विभागों के हैं.
श्रीनगर में बर्फबारी के चलते टीम ने 4-5 दिनों का कैंप जम्मू के एक कॉलेज ग्राउंड में किया.
राजनीतिक अस्थिरता के कारण जम्मू-कश्मीर में क्रिकेट का इंफ्रास्ट्रक्चर और सुविधाएं विकसित नहीं हो पाई हैं.
अभी भी वहां क्रिकेट एसोसिएशन नहीं है और एडमिनिस्ट्रेटर मिथुन मन्हास क्रिकेट संचालन का जिम्मा संभाल रहे हैं.
पहले से ही थी उम्मीद
मुंबई पर जीत भले ही आश्चर्यजनक हो, लेकिन ये जीत आने की उम्मीद पहले से थी.
अनुभवी कप्तान पारस डोगरा ने कहा कि वो जीत को लेकर आत्मविश्वास से भरे हुए थे क्योंकि टीम लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रही थी.
डोगरा ने कहा कि उन्हें इस पर भरोसा था क्योंकि जम्मू-कश्मीर के पास देश की सबसे मज़बूत तेज़ गेंदबाज़ी लाइन-अप है.
वो कहते हैं, "हमें पता था कि हम मुंबई को हरा सकते हैं क्योंकि हम अच्छा क्रिकेट खेल रहे थे और एक भी मैच नहीं हारे थे. हमारे तेज़ गेंदबाज़ बहुत अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं."
उन्होंने कहा, "हमारा तेज़ गेंदबाज़ आक्रमण भारत की घरेलू क्रिकेट में सबसे अच्छा है. तीनों गेंदबाजों- आकिब नबी, उमर नज़ीर और युद्धवीर सिंह ने मिलकर विपक्षी टीम को दबाव में रखा."
"रसिख सलाम (आईपीएल स्टार खिलाड़ी) चोटिल होने के कारण बेंच पर थे, फिर भी हम अच्छा प्रदर्शन कर पाए,"
रसिख सलाम के अलावा उमरान मलिक, जो तेज़ गेंदबाज़ों में से एक हैं, वो भी चोटिल हैं और पूरा सीज़न नहीं खेल पाए.
डोगरा ने कहा, "रेड बॉल के साथ, अगर आप सही लाइन पर टिके रहते हैं, तो ये अपना काम करेगी. हमारे गेंदबाज़ गेंद को अंदर और बाहर स्विंग कराते हैं और लगातार सही क्षेत्रों में गेंदबाज़ी करते हैं. अगर कोई ऐसा करता है, तो बल्लेबाज के लिए खेलना आसान नहीं होता."
31 साल के तेज़ गेंदबाज़ उमर नज़ीर मीर, जम्मू-कश्मीर के सबसे अनुभवी गेंदबाज़ों में से एक हैं.
वो 58 प्रथम श्रेणी मैच खेल चुके हैं. उन्होंने अपना फ़र्स्ट-क्लास डेब्यू 2013 में किया था.
इस मैच में उन्होंने रोहित शर्मा का विकेट चटका कर सबको चौंका दिया. उनके लंबे क़द से उनको काफ़ी मदद मिलती है.
जम्मू-कश्मीर क्रिकेट टीम की 'बुनियाद'
जम्मू-कश्मीर टीम को इस पायदान तक पहुंचाने में दो लोगों का अहम योगदान है, पहले हैं कप्तान पारस डोगरा और दूसरे कोच अजय शर्मा.
अजय शर्मा घरेलू क्रिकेट के बड़े खिलाड़ियों में से एक रहे हैं. उन्होंने फ़र्स्ट- क्लास क्रिकेट में 10,000 से ज्यादा रन बनाए हैं. अजय शर्मा के पास भारत के लिए एक टेस्ट और 31 वनडे खेलने का अनुभव भी है.
लंबे अनुभव की वजह से अजय शर्मा घरेलू क्रिकेट की बारीकियों को बेहद अच्छे तरीके से समझते हैं.
इस सीजन में जम्मू-कश्मीर की टीम के लिए बेहतर प्रदर्शन कर रहे शुभम खजूरिया ने भी कहा है कि अजय शर्मा के अनुभव ने टीम को सफलता दिलाने में अहम योगदान निभाया है.
खजूरिया ने छह मैचों में 57.56 की औसत से 518 रन बनाए हैं. वे देशभर में रन बनाने वालों की सूची में 11वें स्थान पर हैं.
खजूरिया ने इस सीजन में महाराष्ट्र के ख़िलाफ़ 255 रनों की पारी खेली. खजूरिया ये कारनामा करने वाले जम्मू-कश्मीर टीम के तीसरे खिलाड़ी हैं.
इतना ही नहीं खजूरिया जम्मू-कश्मीर की ओर से एक पारी में सबसे बड़ा स्कोर बनाने वाले खिलाड़ी भी बन गए हैं.
उन्होंने इस सफलता का श्रेय अजय शर्मा को देते हुए कहा, "अजय सर ने हमें सिखाया है कि अच्छी शुरुआत को बड़े स्कोर में कैसे बदला जाए. जैसे, अगर आप 30 पर बल्लेबाजी कर रहे हैं, तो उन्होंने हमें सिखाया है कि इसे 70 में कैसे बदला जाए और 70 या 100 पर खेल रहे हैं तो उसे और बड़ी पारी में कैसे बदला जाए."
29 साल के खजूरिया ने 2011 में 15 साल की उम्र में डेब्यू किया था.
वो कहते हैं कि वो तब से ही पारस डोगरा से प्रभावित हैं. दिलचस्प बात ये है कि जम्मू-कश्मीर ने मुंबई के ख़िलाफ़ रणजी में ये दूसरी जीत दर्ज की है.
2014-15 सीज़न में जब जम्मू-कश्मीर ने वानखेड़े स्टेडियम में जीत हासिल की थी, तब खजूरिया भी टीम का हिस्सा थे.
वो कहते हैं, "मैं उनकी (डोगरा) शैली की नकल करने की कोशिश करता था, क्योंकि हम अक्सर हिमाचल के ख़िलाफ़ खेलते थे."
खजूरिया ने कहा, "उन्होंने जम्मू-कश्मीर की बल्लेबाजी में स्थिरता और अनुभव को जोड़ा है. वो एक मार्गदर्शक की तरह हैं. दो ऐसे लोग हैं, जिन्होंने घरेलू क्रिकेट में 10,000 से अधिक रन बनाए हैं."
वे कहते हैं, "हमें समय-समय पर फीडबैक मिलता है, क्रूशियल मोमेंट्स पर निर्णय, फील्ड प्लेसमेंट जैसी चीजों ने बड़ा अंतर पैदा किया है."
खजरिया बताते हैं, "हम कभी टाइटल नहीं जीत पाए हैं, लेकिन इस बार दृढ़ संकल्प के साथ तैयारी की है कि फ़ाइनल में खेलना है और ट्रॉफी भी उठानी है. हम सिर्फ 2-3 बार ही नॉकआउट में पहुंचे हैं,"
बल्लेबाज़ ही नहीं गेंदबाज़ भी हैं अजय-पारस जोड़ी के प्रशंसक
तेज़ गेंदबाज़ आकिब नबी ने रणजी ट्रॉफी के इस सीजन में 37 विकेट लिए हैं. वे पूरे देश में विकेट लेने वालों की सूची में तीसरे स्थान पर हैं. तेज़ गेंदबाज़ों की बात करें तो वे शीर्ष पर हैं.
28 वर्षीय खिलाड़ी, जिन्होंने 2019 में रणजी ट्रॉफी में डेब्यू किया था, उन्हें दो साल पहले सनराइज़र्स हैदराबाद कैंप में डेल स्टेन से सीखने का मौका मिला था.
नबी ने कहा, "मैंने स्टेन से रेड बॉल क्रिकेट से जुड़ी कुछ तकनीकी बातों के बारे में पूछा था और उन्होंने कुछ सुझाव दिए, जिन्हें मैंने अपनी गेंदबाजी में शामिल किया."
वे भी टीम के प्रदर्शन के लिए डोगरा और कोच शर्मा दोनों को श्रेय देते हैं. नबी कहते हैं, "उनका (डोगरा का) अनुभव शानदार रहा है, वो टीम में स्थिरता लाए हैं. जब भी हम तनाव में होते हैं, हम उनसे बात करते हैं. इससे बहुत मदद मिलती है."
वो कहते हैं, "पारस (डोगरा) भाई ने क्रिकेट के मैदान पर कई कठिन परिस्थितियों का सामना किया है. वे अपने अनुभव को ड्रेसिंग रूम में लाते हैं. खासकर ये सिखाने के लिए कि कठिन परिस्थितियों में कैसे स्थिर रहना है."
"अजय (शर्मा) सर के साथ भी ऐसा ही है. वो हमारे साथ बहुत मेहनत करते हैं. अगर किसी को बल्लेबाजी या मानसिक तौर पर मुश्किल आती है तो वे उससे बात करते हैं और उसे सुधारने में मदद करते हैं."
नबी कहते हैं, "वो चाहते हैं कि हर बच्चा टीम के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ दे. वो कहते हैं कि वो आपसे कंप्लीट एफ़र्ट चाहते हैं. ये बहुत आम बात है. वो लोगों से कड़ी मेहनत करवाने में विश्वास करते हैं."
क्वार्टर फ़ाइनल से एक कदम दूर होने के बावजूद, जम्मू और कश्मीर की अगले चरण में जगह की अभी गारंटी नहीं है. उन्हें कम से कम बड़ौदा के ख़िलाफ़ अपना आखिरी मैच ड्रॉ करना होगा.
अगर वे सीधे हार जाते हैं और मुंबई मेघालय को एक पारी या 10 विकेट से हरा देता है, जो कि मुमकिन है, तो जम्मू और कश्मीर तीसरे स्थान पर खिसक सकता है और अंतिम आठ में पहुंचने से चूक सकता है.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.